मंत्री 50 करोड़, वित्त मंत्री 150 करोड़ रु. तक की परियोजनाओं की वित्तीय स्वीकृति दे सकेंगे, सीएम योगी बोले-तेज, सरल और पारदर्शी पर काम कीजिए?

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: January 30, 2026 16:31 IST2026-01-30T16:30:29+5:302026-01-30T16:31:10+5:30

मुख्यमंत्री ने सभी विभागों को निर्देश दिए कि वे अपनी वार्षिक कार्ययोजना हर हाल में 15 अप्रैल तक स्वीकृत करा लें।

uttar pradesh government Ministers able give financial approval projects worth up Rs 50 crore Finance Minister Rs 150 crore CM Yogi said Work fast, simple transparent | मंत्री 50 करोड़, वित्त मंत्री 150 करोड़ रु. तक की परियोजनाओं की वित्तीय स्वीकृति दे सकेंगे, सीएम योगी बोले-तेज, सरल और पारदर्शी पर काम कीजिए?

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Highlightsकोषागार प्रक्रियाएं, पेंशन व्यवस्था और विभागीय नवाचारों पर विस्तार से चर्चा की।राज्य अपने मद से समय पर मानदेय जारी करे। भुगतान-आधारित अनुरक्षण अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए।

लखनऊः उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को प्रदेश में परियोजनाओं की वित्तीय स्वीकृति प्रक्रिया को तेज, सरल और पारदर्शी बनाने पर जोर दिया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ यहां वित्त विभाग की विस्तृत समीक्षा कर रहे थे। शुक्रवार को जारी बयान के अनुसार मुख्यमंत्री ने कहा कि विभागीय मंत्री स्तर से मिलने वाली स्वीकृति की सीमा को बढ़ाकर 50 करोड़ रुपये किया जाए जो अभी तक 10 करोड़ रुपये है। उन्होंने कहा कि इसी तरह 50 से 150 करोड़ रुपये तक की परियोजनाओं की मंजूरी वित्त मंत्री स्तर से तथा 150 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली परियोजनाओं की स्वीकृति मुख्यमंत्री स्तर से दी जाए। मुख्यमंत्री ने सभी विभागों को निर्देश दिए कि वे अपनी वार्षिक कार्ययोजना हर हाल में 15 अप्रैल तक स्वीकृत करा लें।

बयान के अनुसार, समयसीमा का पालन न करने वाले विभागों की सूची मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजी जाएगी। योगी ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी परियोजना की लागत में 15 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि होने पर विभाग को कारण सहित पुनः अनुमोदन प्राप्त करना होगा। इस दौरान उन्होंने राज्य की राजकोषीय स्थिति, बजट प्रबंधन, पूंजीगत व्यय, निर्माण कार्यों की व्यवस्था, एकमुश्त प्रावधान, डिजिटल वित्तीय सुधार, कोषागार प्रक्रियाएं, पेंशन व्यवस्था और विभागीय नवाचारों पर विस्तार से चर्चा की।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि आशा बहनों और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं जैसे अल्प-वेतनभोगी कर्मियों का मानदेय हर माह तय तिथि पर उनके बैंक खातों में अंतरित करना सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि जिन योजनाओं में केंद्रांश मिलता है, वहां राज्य अपने मद से समय पर मानदेय जारी करे।

बयान में कहा गया है कि वित्त विभाग ने पिछले तीन वर्षों में कई सुधार किए हैं। कोषागार सुधारों के तहत ‘साइबर ट्रेजरी’ के माध्यम से खातों का पूर्णतः पेपरलेस प्रेषण अप्रैल 2026 तक पूरा हो जाएगा। शासकीय भवनों के अनुरक्षण को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान में अनुबंधों में एकरूपता का अभाव है। उन्होंने निर्देश दिए कि सड़क निर्माण की तर्ज पर सभी नए भवनों में पांच वर्ष का भुगतान-आधारित अनुरक्षण अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश ने वित्तीय अनुशासन, पूंजीगत व्यय और राजस्व संवर्धन के क्षेत्र में देश में नया मानक स्थापित किया है। अब लक्ष्य खर्च की गुणवत्ता और डिजिटल पारदर्शिता को और मजबूत करते हुए प्रदेश को भारत का सबसे सक्षम और विश्वसनीय वित्तीय प्रशासन वाला राज्य बनाना है।

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