यूपी में हर साल 105 टन सोने और 1650 टन चांदी की खपत?, उत्तर प्रदेश के लोग भर रहे तिजोरी

By राजेंद्र कुमार | Updated: January 28, 2026 17:28 IST2026-01-28T17:27:04+5:302026-01-28T17:28:01+5:30

डीजीएफटी के आयात आंकड़ों और यूपी की औसतन 15 प्रतिशत हिस्सेदारी के आधार पर पिछले दस साल में यूपी ने एक लाख करोड़ की चांदी और 4.4 लाख करोड़ का सोना खरीदा, जो आज बढ़कर करीब 21 लाख करोड़ का हो गया है.

up man varanasi lucknow 105 tonnes gold and 1650 tonnes silver consumed annually UP People Uttar Pradesh filling their coffers | यूपी में हर साल 105 टन सोने और 1650 टन चांदी की खपत?, उत्तर प्रदेश के लोग भर रहे तिजोरी

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Highlights सर्राफा कारोबारी दावे के पक्ष में डीजीएफटी (विदेश व्यापार महानिदेशालय) के आकड़ों का हवाला दे रहे हैं.तिजोरी में  रखा सोना-चांदी हजारों रुपए से लाखों और करोड़ो रुपए में तब्दील हो गया है.अलग अलग वर्षों में खरीदा गए सोना और चांदी की कीमत आज कई गुना बढ़ चुकी है.

लखनऊः अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने-चांदी के बढ़ रहे भाव यूपी वालों की तिजोरी भर रहे हैं. यूपी के सर्राफा कारोबारी यह दावा कर रहे हैं. इन कारोबारियों के मुताबिक पिछले 10 वर्षों के दौरान खरीदे गए सोना और चांदी ने यूपी के लोगों को बिना किसी शेयर या फंड निवेश के घर बैठे करोड़पति बना दिया है. सर्राफा कारोबारी दावे के पक्ष में डीजीएफटी (विदेश व्यापार महानिदेशालय) के आकड़ों का हवाला दे रहे हैं.

डीजीएफटी के आयात आंकड़ों और यूपी की औसतन 15 प्रतिशत हिस्सेदारी के आधार पर पिछले दस साल में यूपी ने एक लाख करोड़ की चांदी और 4.4 लाख करोड़ का सोना खरीदा, जो आज बढ़कर करीब 21 लाख करोड़ का हो गया है. यानी जिन लोगों ने यह सोना-चांदी खरीदा था, उनकी तिजोरी में  रखा सोना-चांदी हजारों रुपए से लाखों और करोड़ो रुपए में तब्दील हो गया है.

सोना-चांदी का निवेश सबसे अधिक लाभप्रद रहा

यूपी के बड़े सर्राफा कारोबारियों का कहना है कि यूपी में बीते दस वर्षों के दौरान खरीदा गया सोना और चांदी आम लोगों के लिए सबसे मजबूत निवेश साबित हुआ है. लखनऊ के बड़े सर्राफा कारोबारी अरुण बंसल के अनुसार, अलग अलग वर्षों में खरीदा गए सोना और चांदी की कीमत आज कई गुना बढ़ चुकी है.

वर्तमान में सोना करीब एक लाख 60 हजार रुपए प्रति 10 ग्राम और चांदी करीब तीन लाख 60 हजार रुपए प्रति किलो के स्तर से अधिक पर पहुंच चुकी है. सोने चांदी की इन दरों पर देखें तो पिछले दस साल में यूपी में आई सोना चांदी की कुल कीमत करीब 21 लाख करोड़ रुपए के आसपास पहुंच गई है.

जाहिर है कि जिन लोगों के दस साल या तीन साल पहले भी सोना-चांदी खरीदा होगा उसकी कीमत अब कई गुना से ज्यादा बढ़ गई है. इस कारण पिछले दस वर्षों में यूपी के घरों, दुकानों और बैंक लॉकरों में रखा सोना चांदी अब केवल पारंपरिक बचत नहीं रह गया है.

बल्कि यह प्रदेश की सबसे बड़ी निजी संपत्ति में बदल चुका है. बिना शेयर बाजार में निवेश किए और बिना किसी जोखिम के आम लोगों की दौलत चुपचाप कई गुना बढ़ चुकी है. सर्राफा कारोबारियों का कहना है कि सोना-चांदी का निवेश सबसे अधिक लाभप्रद रहा है.

हर साल यूपी में सोने-चांदी की खपत

ऑल इंडिया ज्वेलर्स एंड गोल्ड स्मिथ फेडरेशन के अध्यक्ष पंकज अरोड़ा के अनुसार, हर साल करीब 700 टन सोना और 5 से 6 हजार टन चांदी का आयात देश में होता है.इसमें यूपी की करीब हिस्सेदारी 15 प्रतिशत है. इस आधार पर यूपी में हर साल लगभग 105 टन सोना और 1650 टन चांदी की खपत होती है. इस हिसाब से बीते दस वर्षों में यूपी के भीतर करीब 1050 टन सोना और 16500 टन चांदी पहुंची.

दस वर्ष पहले यूपी में जब  लोगों ने जब सोना-चांदी की खरीद की थी, उस समय बाजार भाव काफी कम थे. वर्ष 2015 से 2024 के बीच सोने की औसत कीमत 26 हजार से 70 हजार रुपए प्रति 10 ग्राम के बीच रही, जबकि चांदी 40 से 95 रुपए प्रति ग्राम के आसपास बिकती रही. उस समय यूपी में इन दस वर्षों में सोना और चांदी खरीदने पर कुल मिलाकर लगभग 6 लाख करोड़ रुपये के आसपास खर्च हुआ था.

अब यही सोना और चांदी मौजूदा भाव पर आंकी जाए तो इसकी कीमत करीब 21 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है. इसका सीधा मतलब है कि केवल कीमतों में बढ़ोतरी के कारण प्रदेश के लोगों की संपत्ति में करीब 15 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का इजाफा हो चुका है.

इसलिए बढ़ रहे सोने-चांदी का दाम

सोना -चांदी के बढ़ रहे दामों को लेकर केडिया फिनटेक के सीईओ और बाजार एक्सपर्ट नितिन केडिया तथा ऑल इंडिया ज्वेलर्स एंड गोल्ड स्मिथ फेडरेशन के अध्यक्ष पंकज अरोड़ा का कहना है कि  वैश्विक आर्थिक अस्थिरता, महंगाई, डॉलर में उतार चढ़ाव और अंतरराष्ट्रीय तनाव के कारण सोने की मांग लगातार बढ़ी है. जबकि चांदी के दामों में हो रहा इजाफा अमेरिका द्वारा रेयरप्रेशस मेटल श्रेणी में शामिल किए जाने और सोलर ऊर्जा तथा इलेक्ट्रिक वाहन और इलेक्ट्रॉनिक उद्योग में बढ़ती खपत के कारण हो रहा है. 

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