लखनऊ, दो फरवरी केंद्र सरकार की तरह उत्तर प्रदेश सरकार भी पेपरलेस बजट पेश करने की तैयारी कर रही है। इसके पहले मंत्री परिषद की बैठकों और कार्यप्रणाली को ऑनलाइन किये जाने की सरकार ने प्रक्रिया शुरू कर दी है।
मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पांच कालिदास मार्ग स्थित सरकारी आवास पर मंत्री परिषद के सदस्यों को 'ई-कैबिनेट' के लिये प्रशिक्षण दिया गया।
यहां जारी सरकारी बयान के अनुसार, मंत्रियों के प्रशिक्षण कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि केंद्रीय बजट की तरह राज्य के बजट को भी पेपरलेस किये जाने के प्रयास किये जायें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विधान मंडल सत्र से पहले सभी सदस्यों (विधायकों) को भी टैबलेट उपलब्ध कराये जायें और टैबलेट के प्रभावी प्रयोग के लिये विधायकों का प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किया जाये।
उन्होंने कहा कि मंत्री परिषद एवं विधान मंडल के सदस्यों के व्यापक रूप से तकनीक से जुड़ने से नये भारत का नया उत्तर प्रदेश बनता हुआ दिखायी देगा।
योगी ने कहा, ‘‘आधुनिक तकनीक विभिन्न कार्यां के शीघ्र एवं पारदर्शी संपादन में अत्यंत सहायक है और राज्य सरकार ई-ऑफिस व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिये निरंतर कार्य कर रही है।’’
ई-कैबिनेट व्यवस्था लागू करने की समस्त कार्यवाही को तत्परता से पूर्ण करने के निर्देश देते हुए योगी ने कहा कि मंत्री परिषद की आगामी बैठक को ई-कैबिनेट माध्यम से सम्पन्न कराने के लिए मंत्रियों का गहन प्रशिक्षण कराया जाये। ई-कैबिनेट व्यवस्था लागू हो जाने से मंत्री परिषद की कार्यवाही पेपरलेस हो जायेगी और इससे ई-गवर्नेन्स और ई-ऑफिस की व्यवस्था प्रभावी हो सकेगी।
उन्होंने कहा कि ई-कैबिनेट व्यवस्था से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संकल्प ‘मिनिमम गवर्नमेण्ट, मैक्सिमम गवर्नेन्स’ के अनुरूप कार्यां को सम्पादित करने में सुगमता व तेजी आयेगी।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री के सचिव आलोक कुमार ने ई-कैबिनेट व्यवस्था के सम्बन्ध में एक प्रस्तुतीकरण दिया। उन्होंने बताया कि ई-कैबिनेट व्यवस्था के अंतर्गत सिक्योरिटी फीचर्स का ध्यान रखा गया है। ई-कैबिनेट में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से भी मंत्री कैबिनेट की बैठक में भाग ले सकेंगे।
इस अवसर पर उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य तथा डाक्टर दिनेश शर्मा सहित अन्य मंत्री और अधिकारी मौजूद थे।
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