रुपया कहां से आता और कहां जाता है?, सरकार की आमदनी का सबसे बड़ा...

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: February 1, 2026 15:04 IST2026-02-01T15:03:30+5:302026-02-01T15:04:40+5:30

Budget 2026 Live: खर्च के मामले में प्रत्येक एक रुपये में सबसे बड़ी राशि, यानी 22 पैसे करों और शुल्कों में राज्यों के हिस्से के रूप में आवंटित की जाती है।

rupee kaha se aata hai khaya jata hai Budget 2026 Live Where does money come from where does it go biggest source of government income | रुपया कहां से आता और कहां जाता है?, सरकार की आमदनी का सबसे बड़ा...

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Highlightsहिस्सेदारी और कर्ज पर ब्याज भुगतान सबसे बड़ी मदें बनी हुई हैं।सीमा शुल्क से चार पैसे और गैर-ऋण पूंजी प्राप्तियों से दो पैसे सरकारी खजाने में आते हैं।केंद्र प्रायोजित योजनाओं के लिए आठ पैसे का प्रावधान किया गया है।

नई दिल्लीः वित्त वर्ष 2026-27 के बजट दस्तावेजों के अनुसार सरकार की आमदनी का सबसे बड़ा हिस्सा उधार और अन्य देनदारियों से आता है, जबकि खर्च के मोर्चे पर करों में राज्यों की हिस्सेदारी और कर्ज पर ब्याज भुगतान सबसे बड़ी मदें बनी हुई हैं।

रुपया कहां से आता है:

बजट आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि सरकार को मिलने वाले प्रत्येक एक रुपये में उधार का योगदान सबसे ज्यादा 24 पैसे है। 'उधार और अन्य देनदारियों' के बाद प्रत्यक्ष करों का प्रमुख स्थान है। इसमें आयकर से 21 पैसे और निगम कर से 18 पैसे मिलते हैं।

अप्रत्यक्ष करों में माल एवं सेवा कर (जीएसटी) और अन्य करों से 15 पैसे की प्राप्ति होती है। इसके अलावा, गैर-कर राजस्व से 10 पैसे, केंद्रीय उत्पाद शुल्क से छह पैसे, सीमा शुल्क से चार पैसे और गैर-ऋण पूंजी प्राप्तियों से दो पैसे सरकारी खजाने में आते हैं।

रुपया कहां जाता है:

खर्च के मामले में प्रत्येक एक रुपये में सबसे बड़ी राशि, यानी 22 पैसे करों और शुल्कों में राज्यों के हिस्से के रूप में आवंटित की जाती है। इसके बाद ब्याज भुगतान का स्थान आता है, जिस पर सरकार को 20 पैसे खर्च करने पड़ते हैं। केंद्रीय क्षेत्र की योजनाओं के लिए 17 पैसे और केंद्र प्रायोजित योजनाओं के लिए आठ पैसे का प्रावधान किया गया है। रक्षा क्षेत्र पर खर्च का हिस्सा 11 पैसे है।

वित्त आयोग और अन्य हस्तांतरणों के लिए सात पैसे तथा 'अन्य खर्चों' की मद में भी सात पैसे निर्धारित किए गए हैं। प्रमुख सब्सिडी पर सरकारी खर्च छह पैसे रहता है, जबकि पेंशन के लिए दो पैसे खर्च किए जाते हैं। आंकड़ों से यह स्पष्ट है कि सरकार के पास उपलब्ध कुल संसाधनों का लगभग 42 प्रतिशत हिस्सा केवल राज्यों को उनके करों के भुगतान और पिछले ऋणों पर ब्याज चुकाने में जाता है।

बजट में खाद्य, उर्वरक एवं ईंधन पर सब्सिडी में 4.47 प्रतिशत की कमी का अनुमान

वित्त वर्ष 2026-27 में खाद्य, उर्वरक एवं ईंधन पर सरकार का वार्षिक सब्सिडी व्यय 4.47 प्रतिशत घटकर 4,10,495 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। केंद्रीय बजट 2026-27 के अनुसार, चालू वित्त वर्ष 2025-26 के लिए खाद्य, उर्वरक एवं ईंधन पर संशोधित सब्सिडी 4,29,735 करोड़ रुपये अनुमानित है।

वित्त वर्ष 2026-27 में खाद्य सब्सिडी का अनुमान 2,27,629 करोड़ रुपये है जो चालू वित्त वर्ष 2025-26 के लिए संशोधित अनुमान 2,28,154 करोड़ रुपये से कम है। खाद्य सब्सिडी पर होने वाला अधिकतर व्यय प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (पीएमजीकेएवाई) के अंतर्गत है जिसके तहत सरकार 81 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को मुफ्त राशन उपलब्ध कराती है।

दूसरा प्रमुख व्यय उर्वरक सब्सिडी पर है जिसका अनुमानित व्यय भी अगले वित्त वर्ष के लिए घटकर 1,70,805 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। हालांकि, चालू वित्त वर्ष 2025-26 के लिए संशोधित अनुमान 1,86,460 करोड़ रुपये है।

कुल सब्सिडी में से, वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान यूरिया पर सब्सिडी 1,16,805 करोड़ रुपये और गैर-यूरिया उर्वरकों पर सब्सिडी 54,000 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। पेट्रोलियम सब्सिडी का अनुमान वित्त वर्ष 2026-27 के लिए चालू वित्त वर्ष के संशोधित अनुमान 15,121 करोड़ रुपये के मुकाबले कम होकर 12,085 करोड़ रुपये रहने के आसार हैं।

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