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कई देशों में बेलगाम सब्सिडी, जरूरत से अधिक मत्स्यन से भारतीय मछुआरे प्रभावित: गोयल

By भाषा | Updated: July 15, 2021 20:17 IST

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नयी दिल्ली, 15 जुलाई भारत ने बृहस्पतिवार को कहा कि वह मत्स्यन सब्सिडी पर समझौते को अंतिम रूप देने के लिये काफी गंभीर और उत्सुक है। इसका कारण कई देशों में अनुचित रूप से लाभ दिये जाने और जरूरत से ज्यादा मछली पकड़ने से घरेलू मछुआरों तथा उनकी आजीविका को नुकसान हो रहा है।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने महत्वपूर्ण मत्स्यन सब्सिडी वार्ता पर विश्व व्यापार संगठन की ऑनलाइन मंत्री स्तरीय बैठक में यह बात कही।

गोयल ने इस बात पर निराशा जतायी कि सदस्य देश समझौते में सही संतुलन और निष्पक्षता हासिल करने से अभी दूर हैं।

आधिकारिक बयान में कहा गया है, ‘‘... एक कड़ा बयान देते हुए गोयल ने कहा कि भारत समझौते को अंतिम रूप देने के लिए बहुत उत्सुक है क्योंकि तर्कहीन सब्सिडी और कई देशों में अधिक मछली पकड़ने से भारतीय मछुआरों और उनकी आजीविका को नुकसान हो रहा है।’’

मंत्री ने कहा कि यह आवश्यक है कि बड़े सब्सिडी प्रदाता इस सिद्धांत के अनुसार चले कि जो प्रदूषण के लिये जिम्मेदार है, वह उससे निपटने और उसकी भरपाई के लिये योगदान दे। साथ ही विभिन्न देशों की साझा जिम्मेदारी के साथ उनकी क्षमता के अनुसार अलग-अलग जिम्मेदारी के सिद्धांत का अनुसरण किया जाए। यानी जो बड़े सब्सिडी प्रदाता हैं, वे अपनी सब्सिडी और मछली पकड़ने के काम कम करने के लिये अधिक जिम्मेदारी लें।

गोयल ने आगाह किया कि विश्व व्यापार संगठन के सदस्यों को तीन दशक पहले उरुग्वे दौर के दौरान की गई गलतियों को नहीं दोहराना चाहिए, जिसने विशेष रूप से कृषि में चुनिंदा विकसित देश के सदस्यों के लिए असमान और व्यापार बिगाड़ने वाले अधिकारों की अनुमति दी थी।

बयान के अनुसार इसका असर अल्प विकसित देशों पर पड़ा जिनके पास अपने उद्योग या किसानों का समर्थन करने की क्षमता और संसाधन नहीं थे।

गोयल ने चिंता व्यक्त की कि अब कोई भी असंतुलित या असमान समझौता हमें मौजूदा मछली पकड़ने की व्यवस्था में बांध देगा, जो भविष्य की आवश्यकताओं को पूरा नहीं कर सकता है।

मंत्री ने यह भी कहा है कि प्रस्तावित समझौते को वर्तमान और भविष्य की जरूरतों को पूरा करना है। विकासशील देशों द्वारा दी जाने वाली प्रति व्यक्ति मत्स्यन सब्सिडी उन देशों की तुलना में काफी कम हैं, जो मत्स्यन के क्षेत्र में विकसित हैं।

विकसित राष्ट्र सब्सिडी पर प्रतिबंध लगाने पर जोर दे रहे हैं जबकि भारत एक समान और संतुलित परिणाम चाहता है क्योंकि देश अपने छोटे तथा सीमांत मछुआरों को सहायता प्रदान करता है जो जीविका के लिए इस क्षेत्र पर निर्भर हैं।

अमीर देशों में जहां मछुआरों को अरबों डॉलर की सब्सिडी दी जाती है, भारत की सब्सिडी केवल लगभग 770 करोड़ रुपये है। ईंधन और नाव जैसी चीजों पर सरकार सब्सिडी देती है

इस बैठक का उद्देश्य मतभेदों को दूर करना और समझौते की बातों को अंतिम रूप देने के लिए जल्दी बातचीत को समाप्त करना है ताकि दिसंबर में जिनेवा में विश्व व्यापार संगठन की आगामी मंत्रिस्तरीय बैठक में मत्स्य पालन सब्सिडी पर एक समझौता किया जा सके।

साथ ही इन वार्ताओं का मकसद सतत मछली पकड़ने के समग्र उद्देश्य के साथ सब्सिडी को अनुशासित करना है और अवैध तथा अनियमित रूप से मछली पकड़ने की सब्सिडी को खत्म करना है।

स्विट्जरलैंड के जिनेवा में 30 नवंबर से तीन दिसंबर, 2021 के बीच 12वीं मंत्रीस्तरीय बैठक होगी।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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