India-EU Trade Deal: दूसरों देश को कार्बन रियायत देगा यूरोपीय संघ तो भारत को भी फायदा?, भारतीय निर्यातकों को राहत

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: January 27, 2026 16:21 IST2026-01-27T16:20:22+5:302026-01-27T16:21:08+5:30

India-EU Trade Deal: नियम के तहत ईयू के कदम भारतीय कंपनियों को मिलने वाले समझौते के लाभों को नुकसान पहुंचाते हैं।

India-EU Trade Deal gives carbon concessions other countries will India also benefit relaxation 27-nation bloc other SEBAM provisions  automatically available Indian | India-EU Trade Deal: दूसरों देश को कार्बन रियायत देगा यूरोपीय संघ तो भारत को भी फायदा?, भारतीय निर्यातकों को राहत

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Highlightsकार्बन सीमा समायोजन प्रणाली (सीबएएम) या कार्बन कर एक जनवरी से प्रभावी हुआ है। निर्माण के दौरान एक निर्धारित सीमा से अधिक कार्बन उत्सर्जन होता है।अन्य देश को दी जाने वाली कोई भी ढील भारत को भी दी जाएगी।

नई दिल्लीः यूरोपीय संघ (ईयू) ने व्यापार समझौते में भारत को अपने कार्बन नियमों पर कोई सीधी रियायत नहीं दी है। हालांकि, वह इस बात पर सहमत हो गया है कि 27 देशों के इस समूह द्वारा सीबाम प्रावधानों के तहत किसी भी दूसरे देश को दी जाने वाली कोई भी ढील अपने आप भारतीय निर्यातकों को भी मिल जाएगी। एक अधिकारी ने मंगलवार को यह जानकारी दी। मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) अधिकारों के 'पुनर्संतुलन' का प्रावधान भी करता है। यह तब लागू होगा जब इस नियम के तहत ईयू के कदम भारतीय कंपनियों को मिलने वाले समझौते के लाभों को नुकसान पहुंचाते हैं।

कार्बन सीमा समायोजन प्रणाली (सीबएएम) या कार्बन कर एक जनवरी से प्रभावी हुआ है। यह भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापार समझौते के सबसे विवादित मुद्दों में से एक था। इस व्यवस्था के तहत ईयू इस्पात, एल्युमीनियम, उर्वरक और सीमेंट जैसी वस्तुओं पर कार्बन कर लगाएगा, क्योंकि इनके निर्माण के दौरान एक निर्धारित सीमा से अधिक कार्बन उत्सर्जन होता है।

वर्तमान में, यह कर इस्पात और एल्युमीनियम उत्पादों पर लागू है। वाणिज्य मंत्रालय के अधिकारी ने कहा, ''सीबीएएम एक कठिन मुद्दा है। इसमें किसी के लिए भी कोई लचीलापन नहीं है। हालांकि, एक प्रतिबद्धता है कि भविष्य में किसी भी अन्य देश को दी जाने वाली कोई भी ढील भारत को भी दी जाएगी। हमने उन्हें इसके लिए राजी किया है।''

अधिकारी ने बताया कि समझौते के अनुसार, भविष्य में सीबाम नियमों के तहत ईयू किसी भी देश को जो भी रियायत देगा, वह अपने आप ही भारत को मिल जाएगी। दोनों पक्ष कार्बन कीमतों और सत्यापनकर्ताओं की मान्यता पर तकनीकी सहयोग बढ़ाने के साथ ही ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने और उभरती कार्बन आवश्यकताओं के अनुपालन के लिए वित्तीय सहायता और लक्षित समर्थन पर भी सहमत हुए हैं। अधिकारी ने कहा, ''हमने उन्हें प्रेरित किया है कि हम आपके साथ बातचीत के लिए दोबारा नहीं आना चाहते।

यदि आप किसी को कोई ढील देते हैं... तो कृपया वह हमें भी दें। इसलिए यह एफटीए का हिस्सा है।'' एक अन्य अधिकारी ने कहा कि किसी भी नए उपाय के खिलाफ भारत के हितों की रक्षा के लिए इसमें एक 'गैर-उल्लंघन’ उपबंध भी है।

उन्होंने बताया, ''अगर समझौते के बाद कोई नया उपाय आता है, जो एफटीए के तहत हमें मिलने वाली रियायतों को शून्य कर देता है, तो हमारे पास परामर्श का अधिकार है। अगर परामर्श से कोई परिणाम नहीं निकलता है, तो हमारे पास पुनर्संतुलन का अधिकार है।'' भारत-ब्रिटेन व्यापार समझौते के तहत ऐसा ही विकल्प रखा गया है।

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