2 अरब लोगों का बाजार तैयार?, कार, शराब, मेडिकल प्रोडक्ट्स और केमिकल सस्ते?, भारत और यूरोपीय संघ के बीच एफटीए की घोषणा, जानिए 23 मुख्य बातें
By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: January 27, 2026 15:52 IST2026-01-27T15:52:11+5:302026-01-27T15:52:50+5:30
भारत के चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था तथा यूरोपीय संघ के दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होने से यह वैश्विक जीडीपी (सकल घेरलू उत्पाद) का 25 प्रतिशत हिस्सा और वैश्विक व्यापार का एक तिहाई है।

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नई दिल्लीः भारत और यूरोपीय संघ ने मंगलवार को मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के लिए बातचीत पूरी होने की घोषणा की। एक अधिकारी ने बताया कि इस समझौते के तहत परिधान, रसायन और जूते-चप्पल जैसे कई घरेलू क्षेत्रों को 27 देशों के इस समूह में शुल्क-मुक्त प्रवेश मिलेगा। वहीं, यूरोपीय संघ (ईयू) को कारों और वाइन के लिए रियायती शुल्क पर भारतीय बाजार तक पहुंच प्राप्त होगी। दो दशकों से अधिक समय तक चली बातचीत के बाद संपन्न हुए इस समझौते को 'अबतक का सबसे बड़ा’ समझौता कहा गया है। यह लगभग दो अरब लोगों का बाजार तैयार करेगा।
इसकी मुख्य बातें निम्नलिखित हैं -
* भारत के चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था तथा यूरोपीय संघ के दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होने से यह वैश्विक जीडीपी (सकल घेरलू उत्पाद) का 25 प्रतिशत हिस्सा और वैश्विक व्यापार का एक तिहाई है।
* भारत के 99 प्रतिशत से अधिक निर्यात को यूरोपीय संघ में तरजीही प्रवेश मिलेगा जिससे वृद्धि की अपार संभावनाएं खुलती हैं।
* सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों के लिए नए अवसर खुलेंगे और महिलाओं, कारीगरों, युवाओं एवं पेशेवरों के लिए रोजगार सृजित होंगे।
* कपड़ा, चमड़ा, समुद्री उत्पाद, रत्न व आभूषण जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों में 33 अरब अमेरिकी डॉलर के निर्यात को मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के तहत तरजीही पहुंच से भारी लाभ होने की संभावना है।
* समझौते के लागू होने के पहले दिन करीब 33 अरब अमेरिकी डॉलर के निर्यात पर शुल्क 10 प्रतिशत से घटकर शून्य होगा।
* मोटर वाहन क्षेत्र के लिए, एक सुनियोजित एवं सावधानीपूर्वक तैयार किया गया कोटा-आधारित उदारीकरण पैकेज शामिल।
* इससे न केवल यूरोपीय संघ के मोटर वाहन विनिर्माताओं को भारत में उच्च मूल्य श्रेणियों में अपने मॉडल पेश करने की अनुमति मिलेगी बल्कि भविष्य में ‘मेक इन इंडिया’ और भारत से निर्यात की संभावनाएं भी खुलेंगी।
* भारतीय उपभोक्ताओं को उच्च प्रौद्योगिकी वाले उत्पादों और बढ़ती प्रतिस्पर्धा से लाभ होगा।
* यूरोपीय संघ में पारस्परिक बाजार पहुंच से भारत में बने मोटर वाहनों के लिए भी अवसर खुलेंगे।
* भारत ने घरेलू प्राथमिकताओं के साथ निर्यात वृद्धि को संतुलित करते हुए, दूग्ध, अनाज, मुर्गी पालन, सोयामील, कुछ फलों और सब्जियों सहित संवेदनशील क्षेत्रों की विवेकपूर्ण तरीके से रक्षा की है।
* एफटीए मजबूत नियामक सहयोग, अधिक पारदर्शिता एवं सुव्यवस्थित सीमा शुल्क, स्वच्छता तथा पादप स्वच्छता (एसपीएस) प्रक्रियाओं और व्यापार में प्रौद्योगिकी बाधाओं से संबंधित नियमों के माध्यम से गैर-शुल्क बाधाओं से निपटने के उपाय प्रदान करता है।
* भविष्य के लिए तैयार परिवहन ढांचा कुशल और अर्ध-कुशल भारतीय पेशेवरों के लिए वैश्विक अवसरों का विस्तार करता है। * कार्बन सीमा समायोजन प्रणाली (सीबीएएम) प्रावधानों के माध्यम से प्रतिबद्धताएं हासिल की गई हैं जिनमें मजबूती को बढ़ाने वाला एक दूरदर्शी सर्वाधिक तरजीही राष्ट्र (एमएफएन) का आश्वासन शामिल है।
* बाजार तक निश्चित पहुंच, गैर-भेदभावपूर्ण व्यवहार, डिजिटल माध्यम से दी जाने वाली सेवाओं पर ध्यान केंद्रित करना और सुगम आवागमन भारत के सेवा निर्यात को बढ़ावा देगा।
* भारत को यूरोपीय संघ के 144 उप-क्षेत्रों जैसे आईटी/आईटीईएस, व्यावसायिक सेवाएं और शिक्षा सेवाओं तक पहुंच हासिल होगी।
* यूरोपीय संघ को भारत द्वारा प्रस्तावित 102 उप-क्षेत्रों तक पहुंच प्राप्त होगी।
* इससे यूरोपीय संघ से भारत में उच्च-प्रौद्योगिकी सेवाएं और निवेश आएगा जिसके परिणामस्वरूप पारस्परिक रूप से लाभकारी व्यवस्था बनेगी।
* मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) दोनों दिशाओं में अल्पकालिक, अस्थायी एवं व्यावसायिक यात्रा को शामिल करते हुए व्यावसायिक परिवहन के लिए एक सुगम व पूर्वानुमानित ढांचा प्रदान करता है।
* यूरोपीय संघ और भारत एक दूसरे को अंतर-कॉर्पोरेट स्थानांतरण (आईसीटी) और व्यावसायिक आगंतुकों के लिए परिवहन प्रतिबद्धताएं प्रदान कर रहे हैं। साथ ही आईसीटी के आश्रितों और परिवार के सदस्यों के लिए प्रवेश और कार्य अधिकार भी प्रदान कर रहे हैं।
* यूरोपीय संघ ने संविदात्मक सेवा आपूर्तिकर्ताओं (सीएसएस) के लिए 37 क्षेत्रों/उप-क्षेत्रों और स्वतंत्र पेशेवरों (आईपी) के लिए 17 क्षेत्रों/उप-क्षेत्रों में प्रतिबद्धताएं भी पेश की हैं।
* भारत ने पांच साल की अवधि में सामाजिक सुरक्षा समझौतों पर रचनात्मक रूप से विचार-विमर्श करने के लिए एक ढांचा भी हासिल किया है।
* भारत ने यूरोपीय संघ के उन देशों में भारतीय पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के चिकित्सकों को स्वदेशी लाइसेंस के तहत काम करने की अनुमति सुनिश्चित की है जहां पारंपरिक चिकित्सकीय पद्धतियों का विनियमन नहीं है।
* मुक्त व्यापार समझौता नवाचार को बढ़ावा देने और सीमा पार इलेक्ट्रॉनिक भुगतान को सुरक्षित करने के लिए सहयोग को प्रोत्साहित करता है।
* यूरोपीय संघ भारत का 22वां मुक्त व्यापार समझौता भागीदार बन गया है।
अधिकारी ने कहा कि वाहन और इस्पात को छोड़कर, भारत के लगभग सभी सामानों (93 प्रतिशत से अधिक) को यूरोपीय संघ में शून्य-शुल्क पहुंच मिलेगी। बाकी छह प्रतिशत से अधिक वस्तुओं के लिए भारतीय निर्यातकों को शुल्क में कटौती और कोटा-आधारित शुल्क रियायतें (जैसे ऑटोमोबाइल के लिए) मिलेंगी।
यूरोपीय संघ इस मुक्त व्यापार समझौते के लागू होने के साथ ही पहले दिन भारत के 90 प्रतिशत सामानों पर आयात शुल्क समाप्त कर देगा। यह समझौता अगले साल की शुरुआत में लागू होने की उम्मीद है। अन्य तीन प्रतिशत वस्तुओं पर शुल्क को सात वर्षों में चरणबद्ध तरीके से समाप्त किया जाएगा।
अधिकारी ने कहा, ''इस प्रकार ईयू द्वारा भारत को व्यापार मूल्य के 99.5 प्रतिशत हिस्से पर रियायतें दी जा रही हैं।'' दूसरी ओर, यूरोपीय संघ को भारत में दस वर्षों की अवधि में अपने 93 प्रतिशत सामानों के लिए शुल्क-मुक्त पहुंच मिलेगी। भारत समझौते को लागू करने के पहले दिन यूरोपीय वस्तुओं के केवल 30 प्रतिशत हिस्से पर शुल्क हटाएगा।
भारत यूरोपीय संघ को व्यापार मूल्य के 3.7 प्रतिशत हिस्से पर शुल्क रियायतें और कोटा-आधारित कटौती भी दे रहा है। कुल मिलाकर, भारत ईयू को व्यापार मूल्य के 97.5 प्रतिशत पर शुल्क रियायतें दे रहा है। अधिकारी ने बताया कि शुल्क-मुक्त पहुंच पाने वाले प्रमुख भारतीय क्षेत्रों में कपड़ा, परिधान, समुद्री उत्पाद, रसायन, प्लास्टिक, रबर, चमड़ा और जूते-चप्पल शामिल हैं।
इसके अलावा आधार धातु, रत्न और आभूषण, फर्नीचर, खिलौने और खेल के सामान को भी यह लाभ मिलेगा। इस समय इन क्षेत्रों पर यूरोपीय संघ में शून्य से 26 प्रतिशत तक शुल्क लगता है। भारत ने एफटीए के तहत ईयू की वस्तुओं के लिए भी शुल्क को उदार बनाया है। अधिकारी ने कहा, ''हमारे मामले में, भारत 10 वर्षों में ईयू के लिए आयात शुल्क को घटाकर शून्य कर देगा।
शुरुआत में शून्य तक की कमी सीमित है। समझौते के लागू होने पर हम अपने व्यापार मूल्य के 30 प्रतिशत तक की कटौती करेंगे। लेकिन धीरे-धीरे, हम अपने कुल द्विपक्षीय व्यापार मूल्य के 93 प्रतिशत पर शून्य तक पहुंच जाएंगे।'' सेवाओं के मोर्चे पर यूरोपीय संघ ने भारत को अपने अब तक के सबसे अच्छे प्रस्तावों में से एक दिया है।
उसने 155 उप-क्षेत्रों में 144 को खोल दिया है, जबकि भारत उनके लिए 102 उप-क्षेत्र खोल रहा है। अधिकारी ने कहा कि इसके अलावा छात्रों की आवाजाही को लेकर भी प्रतिबद्धताएं हैं। उन्होंने कहा, ''हमारे पास यूरोपीय संघ से पढ़ाई के बाद कामकाजी वीजा पर भी कुछ प्रतिबद्धताएं हैं।'' वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार के अलावा, एफटीए में डिजिटल व्यापार, स्वच्छता एवं पादप स्वच्छता उपायों, व्यापार में तकनीकी बाधाओं और बौद्धिक संपदा अधिकारों पर अध्याय शामिल हैं। इसमें ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिजों और सरकारी खरीद पर कोई अध्याय नहीं है।
यूरोपीय संघ का औसत शुल्क पहले से ही कम है। ये लगभग 3.8 प्रतिशत हैं और व्यापार सौदे के तहत उन्हें भारत के लिए घटाकर 0.1 प्रतिशत कर दिया जाएगा। कुछ क्षेत्रों में शुल्क अधिक हैं। इनमें समुद्री उत्पाद, रसायन, प्लास्टिक और रबर शामिल हैं। इन सभी पर यूरोपीय संघ व्यापार सौदे के तहत भारत के लिए शुल्क समाप्त कर देगा।
वर्ष 2024 में इन क्षेत्रों से भारत का निर्यात कुल 35 अरब डॉलर था। कार्यान्वयन के पहले दिन 33.5 अरब डॉलर पर शुल्क हटा दिया जाएगा। बाकी पर यह तीन, पांच और सात वर्षों में 'शून्य' हो जाएगा। ऑटोमोबाइल में दोनों पक्षों ने कोटा आधारित शुल्क रियायतों पर बातचीत की है, क्योंकि इस क्षेत्र में यूरोपीय संघ की मांग बहुत आक्रामक है।
भारत का ऑटो क्षेत्र काफी हद तक छोटी कारों (खुदरा कीमतें 10 लाख रुपये से 25 लाख रुपये) के दबदबे वाला है। इस खंड में यूरोपीय संघ की रुचि बहुत अधिक नहीं है। अधिकारी ने कहा, ''हमने तय किया है कि जो कारें इस देश में 25 लाख रुपये से कम में बिकने वाली हैं, ईयू उन कारों का भारत में निर्यात नहीं करेगा। वे इनका निर्माण यहां कर सकते हैं।''
दूसरी ओर 25 लाख रुपये से ऊपर भारत का बाजार सीमित है, लेकिन ईयू की इसमें रुचि अधिक है क्योंकि वे इस खंड में अच्छे निर्माता हैं। इस समय ऑटोमोबाइल पर भारत का आयात शुल्क 66 प्रतिशत से 125 प्रतिशत तक है। भारत कोटे से बाहर कोई शुल्क कटौती नहीं देगा। इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए भारत का कोटा समझौते के पांचवें वर्ष से शुरू होगा।
ईवी के लिए शुल्क कटौती अलग-अलग खंड में भिन्न होगी। अधिकारी ने कहा, ''पहले साल में कुछ खंड में यह 35 फीसदी और कुछ में 30 फीसदी होगी। फिर यह धीरे-धीरे नीचे जाएगी।'' भारत डेयरी (पनीर सहित), सोया मील और अनाज क्षेत्रों में कोई शुल्क रियायत नहीं देगा। यूरोपीय संघ भी अपने चीनी, बीफ, मांस और पोल्ट्री क्षेत्रों की रक्षा कर रहा है।
भारत को यूरोपीय संघ में 'टेबल ग्रेप्स' (खाने वाले अंगूर) के लिए कोटा आधारित शुल्क कटौती मिली है। यूरोपीय संघ सालाना लगभग 1.4 अरब डॉलर के टेबल ग्रेप्स का आयात करता है। अधिकारी ने कहा, ''हमें लगभग 10 करोड़ डॉलर यानी 85,000 टन अंगूरों के लिए शुल्क-मुक्त पहुंच मिली है।'' भारत सात वर्षों में शुल्क कम करेगा।
उच्च मूल्य वाली वाइन पर शुल्क सात वर्षों में 150 प्रतिशत से गिरकर 20 प्रतिशत हो जाएगा। दूसरी ओर 2.5 यूरो से कम की वाइन के लिए कोई रियायत नहीं होगी। मंत्रालय के एक अधिकारी के अनुसार इस समय दोनों पक्षों के बीच वस्तुओं का द्विपक्षीय व्यापार लगभग 136 अरब डॉलर है।
समझौते के लागू होने पर तीन से चार वर्षों के भीतर इसके 200 अरब डॉलर को पार करने की उम्मीद है। इसी तरह सेवाओं का व्यापार, जो वर्तमान में लगभग 80-85 अरब डॉलर का है, बढ़कर 125 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते को लेकर बातचीत पूरी होने की मंगलवार को घोषणा की गई। इस समझौते के अगले वर्ष लागू होने की संभावना है।