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रसायन, पेट्रोरसायन की मांग सालाना 9 प्रतिशत की दर से बढ़ेगी: गौड़ा

By भाषा | Updated: December 15, 2020 17:17 IST

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नयी दिल्ली, 15 दिसंबर रसायन एवं उर्वरक मंत्री डी वी सदानंद गौड़ा ने मंगलवार को कहा कि रसायन एवं पेट्रोरसायन की मांग सालाना 9 प्रतिशत की दर से बढ़ने की उम्मीद है और 2025 तक उद्योग का आकार बढ़कर 300 अरब डॉलर का हो जाने का अनुमान है।

उद्योग मंडल एसोचैम के सम्मेलन को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा कि भारतीय रसायन उद्योग पिछले डेढ़ दशक में एक उच्च विनियमित बाजार में प्रमुख रसायनों के विनिर्माण से एक उदारीकृत अर्थव्यवस्था में एक परिपक्व उद्योग के रूप में तब्दील हुआ है।

उन्होंने कहा कि भारत में ज्यादातर उत्पादित रसायन कच्चे माल के रूप में हैं जिनका उपयोग उवर्रक, दवा, कपड़ा और प्लास्टिक, कृषि रसायन, पेंट समेत विभिन्न विनिर्माण कार्यों में होता है। इनका अंतिम रूप से उपयोग करने वाले वाहन, इलेक्ट्रॉनिक्स, डिब्बा बंद खाद्य पदार्थ और कपड़ा जैसे क्षेत्र देश में विशेष रसायन उद्योग को गति दे रहे हैं।

गौड़ा ने कहा, ‘‘मजबूत घरेलू मांग के साथ घरेलू और विदेशी कंपनियों के बड़े पैमाने पर निवेश उद्योग को नई ऊंचाई पर ले जा रहे हैं।’’

मंत्री ने कहा कि खर्च योग्य आय बढ़ने, आबादी की औसत उम्र, शहरीकरण और दूर-दराज के क्षेत्र में पहुंच बढ़ने एवं ग्रामीण क्षेत्रों से बढ़ती मांग रसायन एवं पेट्रोरसायन क्षेत्र की वृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘उत्पादन अैर खपत एशियाई और दक्षिण पूर्व एशिया में बढ़ रही है, ऐसे में रसायन और पेट्रोरसायन की मांग में सालाना 9 प्रतिशत की दर से वृद्धि का अनुमान है। यह अनुमानित जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) वृद्धि दर से कहीं अधिक है। इस दर से वृद्धि के साथ 2025 तक उद्योग का आकार 300 अरब डॉलर का हो जाएगा।’’

गौड़ा ने कहा कि उद्योग का आकार 2018 में 163 अरब डॉलर था। यह विनिर्माण क्षेत्र की जीवीए (सकल मूल्य वर्धन) में 13.4 प्रतिशत और राष्ट्रीय जीवीए में 2.4 प्रतिशत का योगदान दे रहा था। क्षेत्र में 20 लाख कर्मचारी कार्यरत हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय रसायन और पेट्रोरसायन उद्योग की अर्थव्यवस्था के सभी क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका है।

गौड़ा ने कहा कि सत्ता में आने वाले सरकारों ने इस क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिये कई कदम उठाये हैं। खतरनाक रसायनों और कुछ खास तरह की दवाओं को छोड़कर इस क्षेत्र के लिये लाइसेंस लेने की आवश्यकता को समाप्त कर दिया गया है।

नुकसानदायक रसायानों को छोड़कर अन्य सभी रसायनों के क्षेत्र में 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अनुमति दी गई है। उद्यमियों को स्वत: मंजूरी मार्ग के तहत औद्योगिक उद्यमी ज्ञापन (आईईएम) का रास्ता अपनाते हुये रसायन उद्योग लगाने की अनुमति दी गई है।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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