लाइव न्यूज़ :

सीआईआई ने कहा; बैंक, एनबीएफसी ऑडिटरों की नियुक्ति पर जारी परिपत्र की समीक्षा करे आरबीआई

By भाषा | Updated: May 23, 2021 18:21 IST

Open in App

नयी दिल्ली, 23 मई उद्योग मंडल सीआईआई ने भरतीय रिजर्व बैंक से बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के लिए ऑडिटर की नियुक्ति से जुड़े परिपत्र की समीक्षा करने के लिए कहा है। उसका कहना है कि यह कंपनी अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप नहीं है और कोविड संकट के समय कंपनियों के लिए समस्या पैदा करेगा।

आरबीआई ने 27 अप्रैल, 2021 को अपने परिपत्र में बैंकों और एनबीएफसी द्वारा लेखा परीक्षकों की नियुक्ति को लेकर विभिन्न प्रतिबंध लगाए और फिर से नियुक्ति के लिए निश्चित अवधि का अंतराल (कूलिंग ऑफ) निर्धारित किया।

भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) ने आरबीआई से परिपत्र की समीक्षा करने का आग्रह करते हुए कहा कि प्रस्तावों से ‘‘कंपनियों, उससे जुड़े पक्षों के साथ-साथ पूरे उद्योग के लिए समस्याएं उत्पन्न होंगी।’’

उद्योग मंडल ने कहा कि कुछ मामलों में आरबीआई को तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है। इसमें यह स्पष्टीकरण शामिल है कि परिपत्र केवल बैंकों और एनबीएफसी तथा उनसे संबंधित ऑडिट कंपनियों के लिये है।

उसने कहा, ‘‘आरबीआई वाणिज्यिक बैंकों और एनबीएफसी पर एक जैसे नियम लागू नहीं कर सकता है। इसमें ऑडिट की अधिकतम संख्या, अनिवार्य संयुक्त ऑडिट और दोबारा नियुक्ति को लेकर निश्चित अवधि का अतंराल जैसे नियम शामिल हैं। हो सकता है कि एनबीएफसी कंपनी अधिनियम, 2013 द्वारा संचालित होते रहे।’’

उद्योग मंडल ने क्षमता और पात्रता को लेकर गंभीर पाबंदियों, ऑडिट की संख्या की सीमा, नियुक्ति के लिये अधिकतम 3 साल की अवधि और दोबारा नियुक्ति के लिये 6 साल की अवधि पर पुनर्विचार करने का भी सुझाव दिया है।

इसके अलावा सीआईआई ने संबंधित पक्षों की परिभाषा की समीक्षा करने को भी कहा है। परिपत्र के अनुसार एक सामान्य ब्रांड नाम का उपयोग करने वाली समूह इकाइयां संबंधित पक्ष में शामिल होंगी।

उद्योग मंडल का कहना है कि चूंकि इसका दूरगामी प्रभाव हैं, अत: इसकी समीक्षा की जरूरत है।

इसके अलावा सीआईआई ने इकाई और समूह को शामिल करते हुए बैंक/एनबीएफसी के लेखापरीक्षकों के रूप में नियुक्ति से पहले/बाद में एक वर्ष के दौरान लेखा परीक्षा/गैर-लेखापरीक्षा सेवाओं पर प्रतिबंध के प्रावधान पर भी विचार करने को कहा है।

उद्योग मंडल का कहना है कि बिना गुणात्मक मानदंड जोड़े इन प्रावधानों के क्रियान्वयन से क्षमता की समस्या खड़ी हो सकती है।

सीआईआई ने आरबीआई से व्यापार सुगमता प्रभावित किये बिना नियमन के प्रभावी क्रियान्वयन का रास्ता सुगम बनाने का आग्रह किया है।

उसने यह भी कहा कि बिना कोई समय दिये महत्वपूर्ण नीतियों में अचानक से बदलाव से उसके क्रियान्वयन में कई व्यवहारिक चुनौतियां उत्पन्न हो सकती हैं।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

Open in App

संबंधित खबरें

ज़रा हटकेVIDEO: 'शरिया लागू कराना है क्या?', BJP नेता नाजिया इलाही खान ने मुंबई में लेंसकार्ट स्टोर पर किया हंगामा, स्टाफ की लगाई क्लास

भारतUdhampur Road Accident: खाई में समा गई यात्रियों से भरी बस, कई यात्रियों की मौत का अंदेशा; मंत्री जितेंद्र सिंह ने घायलों की मदद का दिया आदेश

भारतJammu-Kashmir: बैसरन के घास के मैदान को आखिरकार मिलेगी सड़क, एक साल पहले हुआ था पहलगाम हमला

क्राइम अलर्टDelhi Crime: प्रीत विहार में पार्किंग को लेकर खूनी संघर्ष, सरेआम गोली मारकर हत्या; आरोपी की तलाश में पुलिस

क्राइम अलर्टनींद की गोलियां खिलाकर जुड़वा बेटियों का रेता गला, दूसरे कमरे में सोती रही मां; पिता की करतूत से कानपुर में मची सनसनी

कारोबार अधिक खबरें

कारोबारPetrol, Diesel Prices Today: दिल्ली से मुंबई तक, पेट्रोल-डीजल की ताजा कीमतों में क्या हुआ बदलाव? यहाँ देखें लिस्ट

कारोबारसाइबर ठगी के मामलों में ग्राहक को नहीं ठहरा सकते जिम्मेदार 

कारोबारBank Holidays Next Week: सावधान! अगले सप्ताह बैंक जाने की है योजना? जान लें छुट्टियों का पूरा शेड्यूल

कारोबारPetrol, Diesel Price Today: पेट्रोल और डीजल की ताजा दरें घोषित, महानगरों में ईंधन के दामों में बड़ा अपडेट

कारोबारMeta layoffs: 20 मई को बड़े पैमाने पर छंटनी में 8,000 कर्मचारियों की नौकरी जाने की संभावना