विदेश में पढ़ाई, इलाज के लिए पैसे भेजना सस्ता, 10 लाख रुपये से अधिक की राशि भेजने पर 2 प्रतिशत टीसीएस, मुख्य बातें
By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: February 1, 2026 15:11 IST2026-02-01T15:09:52+5:302026-02-01T15:11:10+5:30
शराब, कबाड़ (स्क्रैप) और खनिजों के विक्रेताओं के लिए टीसीएस दर को युक्तिसंगत बनाकर दो प्रतिशत किया जाएगा और तेंदू पत्तों पर इसे पांच प्रतिशत से घटाकर दो प्रतिशत किया जाएगा।

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नई दिल्लीः वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को उदारीकृत प्रेषण योजना (एलआरएस) के तहत शिक्षा और चिकित्सा उद्देश्यों के लिए विदेश से भेजे जाने वाले धन (रेमिटेंस) के साथ-साथ विदेशी यात्रा पैकेज की बिक्री पर ‘स्रोत पर कर संग्रह’ (टीसीएस) की दर को घटाकर दो प्रतिशत करने का प्रस्ताव रखा। लोकसभा में केंद्रीय बजट 2026-27 पेश करते हुए मंत्री ने यह भी प्रस्तावित किया कि विशिष्ट वस्तुओं - शराब, कबाड़ (स्क्रैप) और खनिजों के विक्रेताओं के लिए टीसीएस दर को युक्तिसंगत बनाकर दो प्रतिशत किया जाएगा और तेंदू पत्तों पर इसे पांच प्रतिशत से घटाकर दो प्रतिशत किया जाएगा।
सीतारमण ने कहा, ‘‘मैं उदारीकृत प्रेषण योजना (एलआरएस) के तहत शिक्षा और चिकित्सा उद्देश्यों के लिए टीसीएस दर को पांच प्रतिशत से घटाकर दो प्रतिशत करने का प्रस्ताव करती हूं।’’ प्रस्ताव के अनुसार, शिक्षा या चिकित्सा उपचार के लिए 10 लाख रुपये से अधिक की राशि भेजने पर अब मौजूदा पांच प्रतिशत के बजाय दो प्रतिशत टीसीएस लगेगा।
एलआरएस के तहत, नाबालिगों सहित सभी निवासी व्यक्तियों को प्रति वित्त वर्ष 2,50,000 अमेरिकी डॉलर तक विदेश भेजने की अनुमति है। हालांकि, शिक्षा या चिकित्सा के अलावा अन्य उद्देश्यों के लिए टीसीएस की दर 20 प्रतिशत बनी रहेगी। वित्त मंत्री ने विदेशी यात्रा पैकेज की बिक्री पर भी टीसीएस दर को मौजूदा पांच और 20 प्रतिशत से घटाकर बिना किसी सीमा के सीधे दो प्रतिशत करने का प्रस्ताव दिया।
वर्तमान में 10 लाख रुपये तक के विदेशी यात्रा पैकेज पर पांच प्रतिशत और उससे अधिक पर 20 प्रतिशत टीसीएस लगता है। इसके अलावा, खनिज (कोयला, लिग्नाइट या लौह अयस्क), शराब और कबाड़ की बिक्री पर वर्तमान में टीसीएस की दर एक प्रतिशत है, जिसे अब दो प्रतिशत करने का प्रस्ताव है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को वित्त वर्ष 2026-27 का आम बजट पेश करते हुए लोकलुभावन योजनाओं से परहेज किया और ‘सुधार एक्सप्रेस’ को जारी रखने की घोषणा की। सीतारमण ने अपना लगातार रिकॉर्ड नौवां बजट पेश करते हुए किसानों, युवाओं और छोटी कंपनियों पर विशेष ध्यान दने के साथ अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए बुनियादी ढांचे पर जोर दिया और सुधारों का खाका पेश किया।
उन्होंने विनिर्माण पर जोर देने के साथ पूंजीगत व्यय लक्ष्य बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ रुपये का प्रस्ताव किया जो चालू वित्त वर्ष के लिए 11.2 लाख करोड़ रुपये है। वित्त मंत्री ने लगभग सवा घंटा के अपने बजट भाषण में सुधारों का खाका पेश करते हुए 'विकसित भारत' के लिए बैंकों को तैयार करने को लेकर एक उच्चस्तरीय समिति के गठन का भी प्रस्ताव किया।
उन्होंने वृद्धि के प्रमुख इंजन के रूप में एमएसएमई के महत्व को रेखांकित करते हुए 10,000 करोड़ रुपये के एसएमई विकास कोष का प्रस्ताव रखा। इसका मकसद क्षेत्र में भविष्य के ‘चैंपियन’ तैयार करना और उद्योगों को प्रोत्साहन देना है। बजट का ताना-बाना 'तीन कर्तव्यों' यानी आर्थिक वृद्धि को गति देने, लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने और 'सबका साथ, सबका विकास' के इर्द-गिर्द बुना गया है।
बजट में किसानों की आय बढ़ाने के व्यापक उद्देश्य से 500 जलाशयों और अमृत सरोवरों का विकास करने, तटीय क्षेत्रों में मत्स्य मूल्य श्रृंखला को मजबूती प्रदान करने तथा स्टार्टअप एवं महिलाओं की अगुवाई वाले समूह को मत्स्य कृषक उत्पादक संगठनों के साथ शामिल करते हुए बाजार से जोड़ने का प्रस्ताव किया गया है।
सीतारमण ने तटीय क्षेत्रों में नारियल, चंदन, कोको और काजू जैसी उच्च मूल्य वाली फसलों में सहायता प्रदान कर उच्च मूल्य वाली खेतीबाड़ी पर जोर दिया। बजट में आयकर की दरों एवं संरचना के मोर्चे पर कोई भी बदलाव नहीं किया गया है। इसमें राजकोषीय घाटा वित्त वर्ष 2026-27 में 4.3 प्रतिशत रखने का लक्ष्य रखा गया है जो चालू वित्त वर्ष के 4.4 प्रतिशत के अनुमान से कम है।
इसमें कर्ज- जीडीपी अनुपात को 2026-27 में घटाकर 55.6 प्रतिशत पर लाने का प्रस्ताव है जो चालू वित्त वर्ष में 56.1 प्रतिशत है। बजट में आगामी वित्त वर्ष के लिए 53.5 लाख करोड़ रुपये के व्यय का अनुमान है। शुद्ध कर प्राप्तियां 28.7 लाख करोड़ रुपये अनुमानित है जबकि बाजार से उधारी 17.2 लाख करोड़ रुपये रहने की संभावना जतायी गयी है।