बिहार में प्रति व्यक्ति आय प्रतिदिन मात्र 150 से 190 रुपये?, पिछले 20 वर्षों में कैसा विकास हुआ?, बिहार विधानसभा में पेश किया गया आर्थिक सर्वेक्षण
By एस पी सिन्हा | Updated: February 2, 2026 17:41 IST2026-02-02T17:40:27+5:302026-02-02T17:41:11+5:30
वर्ष 2024-25 में राज्य का सकल घरेलू उत्पाद वर्तमान मूल्य पर करीब 8 लाख करोड़ रुपये आंका गया है। विकास दर 13.07 फीसदी रही है, जो देश के 22 राज्यों से अधिक है।

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पटनाः बिहार विधानमंडल के बजट सत्र के पहले दिन राज्यपाल के अभिभाषण के बाद सरकार की ओर से वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव के द्वारा सदन में आर्थिक सर्वेक्षण पेश किया गया। आम बजट से ठीक पहले पेश हुए आर्थिक सर्वेक्षण ने बिहार की अर्थव्यवस्था को लेकर सत्ता और विपक्ष दोनों को असहज कर दिया है। सर्वेक्षण के मुताबिक, प्रति व्यक्ति आय के मामले में बिहार देश का सबसे गरीब राज्य साबित हुआ है। इस खुलासे के बाद सवाल सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं रहे, बल्कि सीधे 20 साल की राजनीतिक हुकूमत पर जा टिके हैं। सर्वेक्षण यह भी बताता है कि बिहार पूरी तरह ठहरा हुआ राज्य नहीं है। वर्ष 2024-25 में राज्य का सकल घरेलू उत्पाद वर्तमान मूल्य पर करीब 8 लाख करोड़ रुपये आंका गया है। विकास दर 13.07 फीसदी रही है, जो देश के 22 राज्यों से अधिक है।
लेकिन चिंता की बात यह है कि बिहार अपनी ही पिछली तीन वर्षों की विकास रफ्तार से फिसल गया है। यानी विकास हो रहा है, मगर अपेक्षित गति नहीं पकड़ पा रहा। इन्हीं आंकड़ों को आधार बनाकर राजद ने नीतीश सरकार पर तीखा हमला बोला है। राजद प्रवक्ता शक्ति यादव का कहना है कि जब पिछले 20 वर्षों से सत्ता की कमान एक ही नेतृत्व के हाथ में है,
तो हर नाकामी का दोष पिछली सरकारों पर डालना अब स्वीकार्य नहीं है। अगर दो दशक बाद भी बिहार सबसे गरीब राज्य है, तो इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। बिहार में प्रति व्यक्ति आय प्रतिदिन मात्र 150 से 190 रुपये है, जो देश में सबसे निचले पायदान पर है। उन्होंने कहा कि नीतीश जी बताएं कि पिछले 20 वर्षों में कैसा विकास हुआ?
शिक्षा और स्वास्थ्य में हम सबसे नीचे हैं और पलायन में सबसे अव्वल। उधर, सत्ताधारी जदयू विपक्ष के आरोपों को सिरे से खारिज किया। जदयू के मुख्य प्रवक्ता एवं विधान पार्षद नीरज कुमार ने कहा कि नीतीश कुमार ने ‘माइंस में पड़े बिहार’ को बाहर निकाला है।
उन्होंने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सुधारों में बिहार ने बड़ी छलांग लगाई है और आर्थिक सर्वेक्षण के आंकड़ों को व्यापक संदर्भ में देखना चाहिए। लेकिन आर्थिक सर्वेक्षण की रिपोर्ट ने बिहार की राजनीति को एक बार फिर कठघरे में खड़ा कर दिया है। एक तरफ गरीबी का कठोर सच है, दूसरी ओर विकास की उम्मीदें।