Actress Pooja Kumar life story: She was winner in Amitabh Bachchan's ABCL out of 60K contestants | अमिताभ बच्चन की वजह से सालों तक हिन्दी फिल्मों से दूर रही ये हीरोइन, कमल हासन ने दिया काम
अमिताभ बच्चन की वजह से सालों तक हिन्दी फिल्मों से दूर रही ये हीरोइन, कमल हासन ने दिया काम

- शान्तिस्वरूप त्रिपाठी

मूलत: भारतीय मगर अमेरिका में जन्म पूजा कुमार 1995 में ‘मिस इंडिया अमेरिका’ चुनी जाने के बाद अभिनय के क्षेत्र से जुड़ी। अब उनकी पहचान अंतर्राष्ट्रीय अभिनेता व निर्माता के रूप में होती है। मगर बहुत कम लोगों को पता है कि कई वर्ष पहले अमिताभ बच्चन की कंपनी ‘एबीसीएल’ ने साठ हजार प्रतियोगियों में से पूजा कुमार को चुना था। मगर बाद में ‘एबीसीएल’ बंद हो गई थी। इसी के साथ पूजा कुमार के लिए बॉलीवुड के दरवाजे भी बंद हो गए। हालांकि पूजा ने हार नहीं मानी उन्होंने ‘मैन आन लेड्ज’, ‘ब्राउल इन सेल ब्लॉक 99’, ‘पार्क  शॉर्कस’, ‘नाइट फार हीना’, ‘एनीथिंग फार यू’ सहित कई हॉलीवुड फिल्मों में अभिनय किया। इतना ही नहीं पूजा कुमार ने कई तमिल व तेलुगू भाषा की फिल्में भी कीं। गत वर्ष तेलुगू भाषा की फिल्म ‘गरुण वेगा’ ने जबर्दस्त सफलता हासिल की थी। पूजा कुमार ने कमल हासन निर्मित, लिखित व निर्देशित फिल्म ‘विश्वरूप 2 ’ में अभिनय किया है। जो कि हिंदी व तमिल भाषा में बनी है तथा तेलुगू में डब की गई है। यह फिल्म 10 अगस्त भारतीय सिनेमाघरों में रिलीज हो गई।

आप तो एबीसीएल की खोज मानी जाती हैं। इसके बावजूद पहली बार किसी हिंदी वर्जन वाली फिल्म ‘विश्वरूप 2’ में आप लीड किरदार में नजर आने वाली हैं। तो इतनी देरी क्यों हुई?

- इसकी मूल वजह यह है कि मैं अमेरिका में रहती हूं। मैं बीच बीच में आकर तेलुगू फिल्में करती रही हूं। एबीसीएल के बाद कुछ हुआ नहीं था, तो भारतीय फिल्मों से जुड़ने का सवाल ही नहीं उठा। मैं अमेरिका में रहकर ही हॉलीवुड फिल्मों की शूटिंग करती हूं। मैं 15 साल की उम्र से सिर्फ अंग्रेजी फिल्में करती आ रही हूं। अचानक मेरी एक अंग्रेजी फिल्म कमल हासन सर ने देखी 2012 में उन्होंने मेरे मैनेजर के माध्यम से मुझसे ‘विश्वरूप’ के लिए संपर्क किया था। मैं तो कमल हासन के नाम से परिचित थी। इसलिए उनके साथ काम करने से मना करने का सवाल ही नहीं था। पर मैंने कमल हासन सर से कहा कि मैं तमिल तो बिलकुल नहीं बोल सकती। उन्होंने कहा कि चिंता न करें। तो मैंने उनके साथ काम करने के लिए हामी भर दी थी। कमल हासन ने हमें बताया था कि फिल्म को न्यूयॉर्क व लंदन के बाद कुछ दृश्य भारत में फिल्माएंगे। 2013  में ‘विश्वरूप’ प्रदर्शित हुई थी। और अब ‘विश्वरूप 2’ में मैंने अभिनय किया है। ‘विश्वरूप’ के बाद मैंने कई तमिल व तेलुगू फिल्में कीं। मैंने 2010 में हिंदी फिल्म ‘अनजाना अनजानी’ में भी पेस्टो का किरदार निभाया था।

‘विश्वरूप’ और ‘विश्वरूप 2’ दोनों फिल्मों  में आपके किरदार में कुछ अंतर है क्या?

- ‘विश्वरूप’ में मेरा डॉक्टर निरुपमा विश्वनाथन का किरदार इंट्रड्यूज किया गया था। जहां वह इस बात  का पता लगा रही है  कि उसके पति के साथ क्या हुआ? अब  ‘विश्वरूप पार्ट 2 ’ में डॉक्टर  निरूपमा विश्वनाथन सोच रही है कि मैं इन लोगों के साथ रहूं या न रहूं। फिर उसे लगता है कि मुझे इनके साथ रहना चाहिए। क्योंकि यह लोग भारत देश की सुरक्षा के लिए काम कर रहे हैं। उसके बाद वह भी इनके साथ भारत आने की योजना बनाती है। वह पूरा भारत देश की रक्षा करने के लिए काम करना शुरू कर देती है। यानी कि दूसरे भाग में वह एक भारतीय नारी के रूप में नजर आएगी। वह भारतीय नारी की तरह परिवार के साथ मिलकर पूरी ताकत लगाती है। स्पाई थ्रिलर फिल्म ‘विश्वरूप 2’ में मां बेटे के रिश्ते को अहमियत दी गई है।

कमल हासन के साथ रोमांस करते हुए आप कितना सहज थीं?

- शुरुआत में मैं काफी नर्वस थी। लेकिन धीरे धीरे उन्होंने मुझे सहज कर दिया। कैमरे के सामने भले ही हम पति पत्नी के किरदार में होते थे, लेकिन कैमरा आॅफ होते ही मेरे लिए वह सर बन जाते थे। मैं उनका बहुत सम्मान करती हूं।

क्या आप कोई दूसरी भारतीय फिल्म करने वाली हैं?

- मैंने एक फिल्म की है, पर उसके बारे में अभी बात नहीं कर सकती। यह फिल्म 2019 में रिलीज होगी। इन दिनों भारतीय सिनेमा में काफी अच्छा काम हो रहा है। कलाकारों के लिए अच्छे मौके आ रहे हैं। मैं खुश भी हूं और अपने आपको भाग्यशाली मानती हूं कि मैं भारतीय सिनेमा के साथ उस वक्त जुड़ी, जब कुछ फिल्मकार बेहतर सिनेमा बना रहे हैं। यहां तक कि भारतीय सिनेमा में औरतों के लिए भी अच्छे किरदार लिखे जा रहे हैं। मसलन, फिल्म ‘वीरे दी वेडिंग’। इसलिए मैं अब भारतीय सिनेमा के नए रूप को लेकर बहुत खुश हूं। पर हमें अभी बहुत आगे जाना है। पर खुशी की बात है  कि अब भारतीय सिनेमा सही दिशा में आगे बढ़ चुका है। लेकिन अभी भी भारत में ‘मॉम’ या ‘इंग्लिश विंग्लिश’ जैसी नारी प्रधान फिल्में कम बन रही हैं। इसके चलते महिला कलाकारों को एक उम्र के बाद फिल्मों में अच्छे किरदार नहीं मिल पाते।

पर अब माना जा रहा है कि बॉलीवुड में अच्छे नारी पात्र लिखे जा रहे हैं?

- मगर कितने? फिल्म ‘पिंक’ की सफलता के बाद फिल्मकारों में नारी प्रधान फिल्में बनाने व नारी पात्रों को अहमियत देने का एक जुनून सवार हुआ है। इसके चलते अब बॉलीवुड  में कुछ बदलाव नजर आ रहा है। इस बदलाव की सबसे बड़ी वजह यह है कि अब महिला दर्शकों की संख्या तेजी से बढ़ी है। अब लड़कियां फिल्म देखने के लिए पिता या भाई के साथ की मोहताज नहीं रही। तो बढ़ती नारी शक्ति व बढ़ते दर्शकों के चलते बॉलीवुड सिनेमा में बदलाव आना ही है।

आप मां के किरदार निभाने के लिए भी तैयार हैं?

- जी! हां। मां के किरदार को निभाने के लिए ढेर सारा इमोशंस चाहिए। इसलिए मां का किरदार निभाना काफी चुनौतीपूर्ण काम है। मैं तो विविधता पूर्ण किरदार निभाने में यकीन करती हूं।

(पूजा कुमार का यह इंटरव्यू शांतिस्वरूप त्रिपाठी ने लोकमत के लिए किया है)


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