शोभना जैन का ब्लॉग: ‘रोटी-बेटी’ से जुड़े रिश्तों को पटरी पर लाने की कवायद

By शोभना जैन | Published: May 20, 2022 12:43 PM2022-05-20T12:43:55+5:302022-05-20T12:52:20+5:30

जानकारों का कहना है कि भारत को वहां राजनीतिक संवेदनशीलता और राजनीतिक सतर्कता से भी काम करना पड़ेगा।

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शोभना जैन का ब्लॉग: ‘रोटी-बेटी’ से जुड़े रिश्तों को पटरी पर लाने की कवायद

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Highlightsइस यात्रा के जरिये भारत ने संदेश दिया गया है कि सांस्कृतिक तौर पर दोनों देश नजदीकी से जुड़े हुए हैं। विकास योजनाओं में सहयोग देने की आड़ में चीन इन देशों को ऋण के जाल में उलझा रहा है। चीन के ऋण जाल में फंसे श्रीलंका की मौजूदा बदहाली सबके सामने है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस सप्ताह 17 मई को बुद्ध पूर्णिमा के मौके पर नेपाल स्थित महात्मा बुद्ध की जन्मस्थली लुम्बिनी जा कर अपने श्रद्धा सुमन अर्पित किए, बौद्ध मतावलंबियों के श्रद्धा स्थल मायादेवी मंदिर में पूजा-अर्चना की और बौद्ध संस्कृति और विरासत के एक केंद्र के शिलान्यास समारोह में भाग लिया है. 

पीएम मोदी का नैपाल दौरा

दरअसल पीएम मोदी की कुछ घंटों की यह यात्रा महज एक ‘द्विपक्षीय संकेतात्मक’ यात्रा भर नहीं थी बल्कि साझी सांस्कृतिक, धार्मिक विरासत के जरिये पिछले कुछ बरसों से तनावपूर्ण संबंधों के दौर से गुजरे भारत और नेपाल संबंधों को भारत के साथ-साथ नेपाल द्वारा भी सहज करने की कोशिश करने का संदेश रही है. 

नेपाल में चीन विकास योजनाओं के जरिये विशेष तौर पर लुम्बिनी में बौद्ध धर्मस्थलों का विकास करने की आड़ में नेपाल में अंधाधुंध निवेश कर अपनी पैठ मजबूत कर रहा है. 

सांस्कृतिक तौर पर दोनों देश हैं नजदीकी- दौरे से संकेत

जाहिर है ऐसे में कुछ घंटों की नेपाल यात्रा के जरिये भारत की तरफ से संदेश दिया गया है कि सांस्कृतिक तौर पर दोनों देश नजदीकी से जुड़े हुए हैं. साझे सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत बनाकर दोनों देश अपने हितों की न केवल रक्षा करेंगे बल्कि इस से आर्थिक, राजनीतिक संबंध और मजबूत होंगे. 

फिलहाल ये स्थिति बनाने में भारत के साथ-साथ नेपाल में भी आपसी समझदारी, बेहतर तालमेल नजर आ रहा है. दोनों के बीच अधिक सार्थक साझीदारी की जरूरत है और यह जिम्मेवारी दोनों की ही है. भारत को देखना होगा कि वह सांस्कृतिक धार्मिक रिश्तों के आधार पर नेपाल के साथ आर्थिक रिश्तों को लेकर जिम्मेदारी से, सक्रियता से काम करे.

नेपाल में पहले से बहुत सारी परियोजनाएं है लंबित

एक आम शिकायत यह रही है कि नेपाल में हमारी जो पहले से परियोजनाएं हैं, उसमें बहुत सारी लंबित पड़ी हैं. उन सभी को सक्रियता से पूरा करने की जरूरत है, साथ ही नेपाल को आर्थिक सहायता भी बढ़ाने की आवश्यकता है. 

पनबिजली, आधारभूत क्षेत्र की विकास परियोजनाएं, दोनों देशों के बीच संपर्क मार्ग/ माध्यम बढ़ना प्राथमिकता के क्षेत्र रहेंगे. पीएम मोदी की इस यात्रा में इन क्षेत्रों में कुछ अहम समझौते इसी दिशा में अहम कदम माने जा सकते हैं. 

भारत को वहां राजनीतिक संवेदनशीलता और राजनीतिक सतर्कता से करना होगा काम-जानकार

लेकिन आर्थिक विकास में सक्रियता लाने के साथ जैसा कि नेपाल मामलों के एक जानकार का कहना है कि भारत को वहां राजनीतिक संवेदनशीलता और राजनीतिक सतर्कता से भी काम करना पड़ेगा. पिछली बार नेपाल की नाकाबंदी जैसे कुछ कदमों की वजह से वहां भारत विरोधी तत्वों को भारत के खिलाफ भड़काने का मौका मिल गया. 

ऐसे में स्वाभाविक तौर पर चीन को नेपाल के साथ अपनी पींग बढ़ाने का और मौका मिलेगा, नेपाल के साथ उसकी नजदीकी बढ़ेगी. 

यहां विशेष तौर पर दक्षिण एशिया के देशों की बात करें तो चीन विकास योजनाओं में सहयोग देने की आड़ में इन देशों में भारी निवेश कर उन्हें ऋण जाल के संकट में उलझा कर दक्षिण एशिया के देशों में अपनी पैठ बढ़ाना चाहता है या यूं कहें कि उसका विस्तारवादी एजेंडा बढ़ रहा है. 

दक्षिण एशिया देशों में चीन राजनीतिक हस्तक्षेप

उसके पास आर्थिक संसाधन हैं और इन सभी देशों में चीन राजनीतिक हस्तक्षेप भी कर रहा है. बीते कुछ वर्षों में जिस तरह से चीन का नेपाल में दखल बढ़ा है, वह भारत के लिए भी चिंताजनक है और यह चिंता केवल नेपाल को लेकर ही नहीं है, बल्कि दक्षिण एशिया के हमारे सभी पड़ोसी देशों को लेकर यह गंभीर चिंता का विषय है. 

भले ही वह श्रीलंका, बांग्लादेश, पाकिस्तान हो, यहां तक कि म्यांमार, मालदीव हो या भूटान हो, वह भारत के लिए एक चुनौतीपूर्ण स्थिति है. चीन के ऋण जाल में फंसे श्रीलंका की मौजूदा बदहाली सबके सामने है ही.

पीएम मोदी की यह है पांचवी नेपाल यात्रा

बहरहाल, पीएम मोदी की प्रधानमंत्री बनने के बाद नेपाल की यह पांचवीं यात्रा सांस्कृतिक-धार्मिक विरासत से जुड़ी थी लेकिन इसे दोनों देशों के बीच अनेक मुद्दों को लेकर आपसी संबंधों में उपजी असहज स्थिति या यूं कहें कुछ तल्खियों की स्थिति से निकलने यानी संबंधों को फिर से पटरी पर लाने की कवायद माना जा सकता है. 

दोनों देशों के बीच साझी सांस्कृतिक, धार्मिक विरासत है, दोनों के संबंधों को रोटी-बेटी का संबंध माना जाता है. ऐसे में इस कवायद से उम्मीद तो बनी है और दोनों को ही सुनिश्चित करना होगा कि ये आपसी साझीदारी अधिक सार्थक हो.

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