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इजराइल-अमेरिका-ईरानः इस जंग से शायद कोई अछूता नहीं बचेगा

By लोकमत समाचार ब्यूरो | Updated: March 24, 2026 05:36 IST

Israel-America-Iran: बड़े हमले का अर्थ क्या है? किसी को नहीं पता. केवल अमेरिका ही इसके बारे में बता सकता है. इस जंग में मध्यपूर्व का पूरा इलाका जल रहा है. जिन देशों का विवाद से कोई लेना-देना नहीं था, वे भी इसमें पिस रहे हैं. भीषण तबाही हो रही है.

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ठळक मुद्देऐसी परमाणु सामग्री रखी हो कि विकिरण प्रारंभ हो जाए तो क्या होगा?ईरान ने यदि तत्काल समुद्री रास्ते को नहीं खोला तो वो बड़ा हमला करेगा. भारत में हम सीधे तौर पर अभी परेशान नहीं हो रहे हैं लेकिन तकलीफ तो प्रारंभ हो ही गई है.

Israel-America-Iran:इजराइल-अमेरिका को ईरान पर हमले करते और ईरान को पलटवार करते तीन सप्ताह से ज्यादा हो चुके हैं लेकिन अभी ऐसी कोई संभावना नहीं लग रही है कि ये मार-काट जल्दी रुक जाएगी! बल्कि हालात लगातार बद से बदतर होते जा रहे हैं. ईरान ने इजराइल के परमाणु ठिकाने के पास मिसाइल दागी है. इजराइल ने ईरान के परमाणु ठिकानों को नष्ट करने के लिए कई बम बरसाए हैं. जरा सोचिए कि यदि किसी ऐसे ठिकाने पर मिसाइल या बम गिर जाए जहां ऐसी परमाणु सामग्री रखी हो कि विकिरण प्रारंभ हो जाए तो क्या होगा?

अब अमेरिका ने धमकी दी है कि ईरान ने यदि तत्काल समुद्री रास्ते को नहीं खोला तो वो बड़ा हमला करेगा. इस बड़े हमले का अर्थ क्या है? किसी को नहीं पता. केवल अमेरिका ही इसके बारे में बता सकता है. इस जंग में मध्यपूर्व का पूरा इलाका जल रहा है. जिन देशों का विवाद से कोई लेना-देना नहीं था, वे भी इसमें पिस रहे हैं. भीषण तबाही हो रही है.

मगर जो लोग जंग से दूर हैं, वे भी किसी न किसी रूप में प्रभावित होने वाले हैं. भारत में हम सीधे तौर पर अभी परेशान नहीं हो रहे हैं लेकिन तकलीफ तो प्रारंभ हो ही गई है. उदाहरण के लिए यदि होटल वालों को पर्याप्त गैस सिलेंडर मिलने में परेशानी आ रही है तो उनका ग्राहक कौन है? आम आदमी ही तो ग्राहक है! परेशान तो वही हो रहा है.

इस तरह की खबरें भी आ रही हैं कि गैस की किल्लत के कारण सड़क किनारे के बहुत से ढाबे ट्रक चालकों को खाना उपलब्ध नहीं करा पा रहे हैं. इस मामले में सरकार को ध्यान देना चाहिए. हमें सरकार की तारीफ करनी होगी कि इस जंग के प्रभाव को अभी आम आदमी तक नहीं पहुंचने दिया गया है लेकिन जंग यदि ज्यादा दिनों तक जारी रहती है कि पूरी दुनिया के साथ हमें भी पेट्रोल-डीजल की कमी का सामना करना पड़ सकता है. जब डीजल-पेट्रोल महंगे होंगे तो भाड़ा बढ़ जाएगा औ बाकी चीजें भी महंगी हो जाएंगी.

हालांकि यह उम्मीद की जानी चाहिए कि अभी तक सरकार ने जिस तरह से इस प्रसंग को संभाला है, उसी तरह से आगे भी संभाल लेगी लेकिन सवाल है कि जब पूरी दुनिया आफत का सामना कर रही होगी तो कोई अकेला देश अपने लिए हालात को कैसे संभाल सकता है? बड़े देशों के पास क्षमता होती है और वे कुछ दिनों तक संकट का समाना कर सकते हैं लेकिन छोटे देशों की हालत क्या होगी?

यह बात खासतौर पर अमेरिका को समझनी चाहिए जो दुनिया का चौधरी कहलाता है. मगर हकीकत यह है कि अमेरिका को दुनिया से कोई मतलब नहीं! उसे तो बस पूरी दुनिया में दादागीरी करनी है. मगर उसे यह समझ लेना चाहिए कि वक्त बहुत बलवान होता है. दंभ किसी का नहीं टिकता.  

 

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