नक्शे में कनाडा, ग्रीनलैंड और वेनेजुएला को अमेरिकी क्षेत्र दिखाया?, आखिर ये तकरार कहां तक जाएगी?
By लोकमत समाचार सम्पादकीय | Updated: January 22, 2026 05:41 IST2026-01-22T05:41:00+5:302026-01-22T05:41:00+5:30
यूरोपीय देशों- डेनमार्क, नाॅर्वे, स्वीडन, फ्रांस, जर्मनी, यूके, नीदरलैंड्स और फिनलैंड के सामान पर 10 प्रतिशत इम्पोर्ट टैरिफ लगाने की धमकी भी दी है, जिसकी यूरोपीय देशों में सख्त प्रतिक्रिया हो रही है.

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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने जिस तरह से सोशल मीडिया प्लेटफार्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर ग्रीनलैंड में अमेरिकी झंडा गाड़ते हुए अपनी एआई से बनी तस्वीर शेयर की है और एक नक्शा जारी किया है, उसने यूरोपीय देशों में हड़कंप मचा दिया है. नक्शे में कनाडा, ग्रीनलैंड और वेनेजुएला को अमेरिकी क्षेत्र दिखाया गया है. यही नहीं, ट्रम्प ने ग्रीनलैंड को हथियाने का विरोध करने वाले यूरोपीय देशों- डेनमार्क, नाॅर्वे, स्वीडन, फ्रांस, जर्मनी, यूके, नीदरलैंड्स और फिनलैंड के सामान पर 10 प्रतिशत इम्पोर्ट टैरिफ लगाने की धमकी भी दी है, जिसकी यूरोपीय देशों में सख्त प्रतिक्रिया हो रही है.
यूरोपीय कमीशन चीफ उर्सुला वाॅन डेर लेयेन ने कहा है कि यूरोपीय यूनियन (ईयू) का जवाब बिना डरे, बराबरी का होगा. फ्रांसीसी राष्ट्रपति मैक्रों ने तो ट्रम्प को परोक्ष रूप से गुंडा तक बताते हुए कह दिया कि दुनिया ‘गुंडों’ के युग में जी रही है. इस प्रकार कहा जा सकता है कि ट्रम्प ने सभी यूरोपीय देशों को सदमे जैसी हालत में ला दिया है,
क्योंकि अमेरिका से यूरोपीय देशों के आर्थिक संबंध इतनी गहराई से गुंथे हुए हैं कि उन्हें खत्म या सीमित करना आसान नहीं है, लेकिन ट्रम्प की दादागीरी को सह लेना भी बहुत मुश्किल है. ट्रम्प के तानाशाह रवैये की ज्वलंत मिसाल यह है कि नाॅर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोर को भेजे संदेश में उन्होंने कहा है,
‘यह देखते हुए कि आपके देश ने मुझे आठ से अधिक युद्धों को रोकने के बावजूद नोबल शांति पुरस्कार नहीं दिया तो अब मुझे केवल शांति के बारे में सोचने की कोई बाध्यता महसूस नहीं होती. ...जब तक ग्रीनलैंड पर हमारा पूर्ण नियंत्रण नहीं होगा, तब तक दुनिया सुरक्षित नहीं है.’ इसके पहले वेनेजुएला के राष्ट्रपति के सपत्नीक अपहरण को दुनिया देख ही चुकी है.
इसमें कोई शक नहीं कि अमेरिका और यूरोपीय देशों के बीच तनातनी अगर इसी तरह जारी रही तो इसका फायदा चीन उठाएगा और विश्व व्यवस्था को अपने इर्द-गिर्द केंद्रित करने की कोशिश करेगा. जहां तक भारत का सवाल है, अमेरिका के मनमाने टैरिफ की मार वह पहले से झेल ही रहा है, इसलिए इस मौके का फायदा उठाने की कोशिश उसे करनी चाहिए.
यूरोपीय कमीशन चीफ उर्सुला ने भारत की तारीफ करते हुए कहा भी है कि भारत-ईयू 27 जनवरी को ऐतिहासिक व्यापार समझौता करेंगे और यह फ्री ट्रेड एग्रीमेंट 200 करोड़ लोगों के लिए नया बाजार बनाएगा, जो जीडीपी के 25 प्रतिशत का प्रतिनिधित्व करेगा.
उन्होंने इसे मदर ऑफ ऑल डील्स बताया है. लेकिन अमेरिका के लोगों को भी सोचना होगा कि अगर उन्होंने ट्रम्प की मनमानी के खिलाफ जोरदार आवाज नहीं उठाई तो सदियों की मेहनत से निर्मित अमेरिका की वैश्विक छवि के मटियामेट होने में देर नहीं लगेगी.