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ब्लॉग: दुनिया को फिर से क्यों लुभा रहा है चांद?

By अभिषेक कुमार सिंह | Updated: July 18, 2023 13:34 IST

भारत, चीन, इजराइल और जापान की चांद पर जाने की तैयारियों से प्रेरित होकर नासा ने चंद्रमा पर दोबारा नहीं जाने की अपनी कसम तोड़ दी और आर्टेमिस मून मिशन के रूप में चंद्रमा पर इंसान को भेजने की एक व्यापक योजना पेश कर दी है.

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चंद्रमा के नए पहलुओं के बारे में अब दुनिया जानना चाहती है. यही वह वजह है जिस कारण भारत-चीन ही नहीं, दुनिया के कई अन्य देश भी चंद्रमा की नए सिरे से पड़ताल की नई होड़ में शामिल हो चुके हैं. जैसे वर्ष 2019 में इजराइल ने भी अपना एक छोटा रोबोटिक लैंडर चंद्रमा की ओर भेजा था, लेकिन वह मिशन कामयाब नहीं हो सका था. 

जापानी अभियान को भी नाकामी का मुंह देखना पड़ा था. पर भारत, चीन, इजराइल और जापान की चांद पर जाने की तैयारियों से प्रेरित होकर नासा ने चंद्रमा पर दोबारा नहीं जाने की अपनी कसम तोड़ दी और आर्टेमिस मून मिशन के रूप में चंद्रमा पर इंसान को भेजने की एक व्यापक योजना पेश कर दी. 

इस मिशन के तरह नासा ने आठ देशों के साथ एक बहुत महत्वपूर्ण समझौता भी किया है, जिसके अंतर्गत सभी आठ देश मिलकर शांति और जिम्मेदारी के साथ चंद्रमा के अन्वेषण में सहयोग करेंगे. कुछ ही दिनों पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका यात्रा के दौरान भी नासा के चंद्र मिशन में भारत के इसरो से सहयोग की चर्चा चली है.

चंद्रयान-3 असल में वर्ष 2019 में भारत के दूसरे मून मिशन यानी चंद्रयान-2 की आंशिक सफलता को एक नतीजे तक पहुंचाने के प्रयास में है या कहें कि उस अधूरे काम को पूरा करने की कोशिश में है, जो काम सॉफ्टवेयर की खामी के कारण दूसरा चंद्रयान करने से चूक गया था. 

भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो ने 22 अक्तूबर 2008 को जब अपना चंद्रयान-1 रवाना किया था, तो सिवाय इसके उस मिशन से कोई उम्मीद नहीं थी कि यह मिशन अंतरिक्ष में भारत के बढ़ते कदमों का सबूत देगा. लेकिन अपने अन्वेषण के आधार पर सितंबर 2009 में चंद्रयान-1 ने चंद्रमा पर पानी होने के सबूत दिए. इससे दुनिया में हलचल मच गई. 

चंद्रयान-1 से चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचाए गए उपकरण मून इंपैक्ट प्रोब ने चांद की सतह पर पानी को चट्टान और धूलकणों में भाप के रूप में उपलब्ध पाया था. चंद्रमा की ये चट्टानें दस लाख वर्ष से भी ज्यादा पुरानी बताई जाती हैं. ये प्रेक्षण अब चंद्रमा को इंसानी रिहाइश के अनुकूल बनाने, वहां खनिजों का उत्खनन करने और सुदूर अंतरिक्ष मिशनों (जैसे मंगल ग्रह तक यान पहुंचाने)  के लिए वहां बेस स्टेशन बनाने जैसी कई योजनाओं के लिए काम  आ रहे हैं.

इसमें दो राय नहीं कि अब हमारा चंद्रयान चंद्रमा के कुछ नए पहलुओं को उजागर करता है और इसी तरह नासा या किसी अन्य देश के अभियानों से चंद्रमा के बारे में कुछ नई सूचनाएं मिलती हैं, तो वे जानकारियां दुनिया, समाज और साइंस को उपलब्धियों के नए धरातल पर ले जाने में मददगार ही साबित होंगी. मौजूदा और भावी मून मिशन अगर चंद्रमा से जुड़ी कुछ गुत्थियां सुलझाने में हमारी मदद करते हैं तो उनसे  मानव सभ्यता की और उन्नति संभव है.

टॅग्स :चंद्रयान-3नासाइसरो
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