चुनाव परिणाम के बाद पश्चिम बंगाल हिंसा की चपेट में क्यों?
By लोकमत समाचार सम्पादकीय | Updated: May 7, 2026 07:08 IST2026-05-07T07:08:56+5:302026-05-07T07:08:56+5:30
चुनाव परिणाम आने के बाद पश्चिम बंगाल के कई इलाकों से हिंसा की खबरें आ रही हैं. कम से कम चार लोगों की हत्या हुई और कई जगह आगजनी हो रही है. मरने वालों में भाजपा के कार्यकर्ता भी हैं और टीएमसी के कार्यकर्ता भी.

चुनाव परिणाम के बाद पश्चिम बंगाल हिंसा की चपेट में क्यों?
पश्चिम बंगाल में चुनाव के पहले जिस तरह का धार्मिक ध्रुवीकरण नजर आ रहा था उसने चुनाव आयोग को भी चिंतित कर दिया था. यही कारण था कि ढाई लाख से ज्यादा केंद्रीय सुरक्षाकर्मी वहां तैनात किए गए थे. सौभाग्य से चुनाव के दौरान वहां हिंसा की ज्यादा घटनाएं नहीं हुईं लेकिन चुनाव परिणाम आने के बाद पश्चिम बंगाल के कई इलाकों से हिंसा की खबरें आ रही हैं. कम से कम चार लोगों की हत्या हुई और कई जगह आगजनी हो रही है. मरने वालों में भाजपा के कार्यकर्ता भी हैं और टीएमसी के कार्यकर्ता भी. इस बीच दोनों दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप चल रहा है.
टीएमसी का आरोप है कि उसके कार्यालयों पर हमले किए गए हैं. इधर भाजपा का कहना है कि टीएमसी से जुड़े लोग खुद को भाजपा का बता रहे हैं और उपद्रव कर रहे हैं ताकि जनता में भाजपा को बदनाम किया जाए. शुभेंदु अधिकारी ने तो यहां तक कहा है कि भारतीय जनता पार्टी जब तक किसी को सदस्य न बनाए तब तक वह व्यक्ति खुद को भाजपा का नहीं कह सकता. उनके इस बयान से ऐसा लगता है कि दूसरे दलों से जुड़े लोग अब खुद को भाजपाई बता रहे हैं.
बंगाल की राजनीति में यह दस्तूर की तरह है. दबंग और अपराध जगत से जुड़ा तबका बहुत पहले वामपंथी सरकार के साथ था. जब ममता बनर्जी सत्ता में आईं तो ऐसे ज्यादातर तत्व तृणमूल कांग्रेस में आ गए ताकि उन्हें राजनीतिक शरण मिल सके. अब जब तृणमूल की नैया डूबी है तो ये लोग निश्चित रूप से भाजपा की छतरी संभालने की कोशिश करेंगे. इस मामले मेंं भाजपा को सचेत रहने की जरूरत है और शुभेंदु अधिकारी ने स्थिति स्पष्ट कर भी दी है.
अभी तात्कालिक जरूरत इस बात की है कि हिंसा की जो घटनाएं हो रही हैं, उन पर तत्काल काबू पाया जाए और ऐसी स्थिति पैदा न होने दी जाए कि पहले से ही बंटा हुआ समाज और ज्यादा बंट जाए! इस मामले में ममता बनर्जी को भी सदाशयता का परिचय देना चाहिए. पराजय के बावजूद इस्तीफा नहीं देने की बात कह कर उन्होंने आग में घी डालने का काम किया है. उनके इस तेवर से उनके कार्यकर्ताओं को क्रोधित होने का मौका मिलेगा. यह स्थिति ठीक नहीं है. उपद्रवियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस का रवैया अपनाना होगा.