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रूस हमारा जांचा-परखा मित्र, पुतिन की भारत यात्रा कई मायनों में रही अत्यंत महत्वपूर्ण 

By लोकमत न्यूज़ ब्यूरो | Updated: October 12, 2018 19:41 IST

जब कुछ वर्ष पहले सोवियत रूस का विघटन हो गया और उसके कब्जे में पूर्वी यूरोप के जो देश थे वे धीरे-धीरे स्वतंत्र हो गए उस समय ऐसा लग रहा था कि रूस अब हमारी मदद करने योग्य नहीं रह गया है।

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गौरीशंकर राजहंस

हाल ही में संपन्न हुई रूस के राष्ट्रपति व्लादीमीर पुतिन की भारत यात्र कई मायनों में अत्यंत महत्वपूर्ण रही। भारत ने रूस के साथ लगभग 40 हजार करोड़ की लागत वाला एस-400 मिसाइल सिस्टम खरीदने का सौदा किया। यह अपने आप में अत्यंत महत्वपूर्ण बात है। 

हाल तक भारत सहित अन्य देशों को अमेरिका डरा धमका रहा था कि जो देश रूस के साथ रक्षा समझौता करेंगे या रूस के रक्षा विमानों और मिसाइलों को खरीदेंगे उनके साथ अमेरिका मित्रवत संबंध नहीं रखेगा। इस बीच रूस चीन के बहुत नजदीक आ गया था और भारत को यह डर सताने लगा था कि शायद रूस उसके साथ कोई रक्षा समझौता नहीं करे। परंतु भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कूटनीति पूर्णत: सफल रही। 

उन्होंने अमेरिका को अपने पक्ष में तो कर ही लिया था, परंतु साथ ही साथ यह जगजाहिर कर दिया कि सुरक्षा के मामले में भारत किसी भी बात पर समझौता नहीं करेगा। उन्होंने अमेरिका की चेतावनी को दरकिनार किया और रूस के साथ एस-400 मिसाइल का सौदा कर लिया। 

जब कुछ वर्ष पहले सोवियत रूस का विघटन हो गया और उसके कब्जे में पूर्वी यूरोप के जो देश थे वे धीरे-धीरे स्वतंत्र हो गए उस समय ऐसा लग रहा था कि रूस अब हमारी मदद करने योग्य नहीं रह गया है। परंतु यह अनुमान गलत निकला और रूस ने अपनी आर्थिक मजबूरी के बाद भी भारत का खुले हृदय से साथ दिया। 

पुतिन ने भारत के हाल के दौरे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आश्वस्त किया कि वह पूरी तरह भारत के हितों की रक्षा करेंगे और भारत के साथ जो पुराने संबंध हैं वे कायम रहेंगे। उनके कहने का अर्थ था कि यह सच है कि रूस और चीन में हाल के वर्षो में दोस्ती बहुत अधिक बढ़ गई है, परंतु इससे भारत के साथ रूस की दोस्ती में कोई अंतर नहीं आएगा बल्कि रूस चीन पर यह दबाव डाल सकता है कि वह पाकिस्तान की आतंकवादी हरकतों को बंद करवाए। 

पुतिन ने साफ-साफ कहा कि भारत की तरह रूस भी आतंकवादी हरकतों को बर्दाश्त नहीं कर सकता है। यह सही है कि हाल के वर्षो में भारत अमेरिका के बहुत नजदीक आ गया है और कई मामलों में भारत के दृष्टिकोण को सही आंकते हुए पाकिस्तान को आर्थिक और सैन्य मदद बंद कर दी है। इसलिए हमें अमेरिका की मित्रता की भी आवश्यकता है और रूस की दोस्ती की भी। आशा की जानी चाहिए कि अमेरिका इस सत्य को समङोगा और अपनी सुरक्षा की दृष्टि से भारत ने रूस के साथ जो एस-400 मिसाइलों का समझौता किया है उसमें कोई टांग नहीं अड़ाएगा।

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