वेदप्रताप वैदिक का ब्लॉग: यूरोपीय संघ का लड़खड़ाना

By वेद प्रताप वैदिक | Updated: February 3, 2020 10:25 IST2020-02-03T10:25:54+5:302020-02-03T10:25:54+5:30

यूरोपीय संघ और ग्रेट ब्रिटेन का 31 जनवरी को औपचारिक संबंध-विच्छेद हो गया. इस प्रक्रिया में दो ब्रिटिश प्रधानमंत्रियों- डेविड कैमरन और थेरेसा मे को इस्तीफा भी देना पड़ा लेकिन वर्तमान प्रधानमंत्नी बोरिस जॉनसन को इस ऐतिहासिक कदम का श्रेय मिलेगा कि उन्होंने ब्रिटेन को यूरोप से ‘आजाद’ करवा दिया.

Ved Pratap Vaidik blog: European Union's falter | वेदप्रताप वैदिक का ब्लॉग: यूरोपीय संघ का लड़खड़ाना

तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक तौर पर किया गया है। (फाइल फोटो)

यूरोपीय संघ और ग्रेट ब्रिटेन का 31 जनवरी को औपचारिक संबंध-विच्छेद हो गया. इस प्रक्रिया में दो ब्रिटिश प्रधानमंत्रियों- डेविड कैमरन और थेरेसा मे को इस्तीफा भी देना पड़ा लेकिन वर्तमान प्रधानमंत्नी बोरिस जॉनसन को इस ऐतिहासिक कदम का श्रेय मिलेगा कि उन्होंने ब्रिटेन को यूरोप से ‘आजाद’ करवा दिया. इसे लाखों अंग्रेजों ने प्रदर्शन करके ‘आजादी’ कहा क्योंकि वे मानने लगे थे कि ब्रिटेन पिछले 47 साल से यूरोप का अनाथालय बनता जा रहा था. यूरोपीय संघ के 28 देशों में से किसी भी देश के नागरिक ब्रिटेन में बेरोक-टोक आ जा सकते थे, वहां रह सकते थे, नौकरी और व्यापार कर सकते थे. उन देशों और ब्रिटेन के बीच बिना किसी तटकर के खुला व्यापार हो सकता था.

ब्रिटेन क्योंकि यूरोप के सभी देशों में सबसे समृद्ध और ताकतवर देश है, इसलिए उसकी नौकरियों पर अन्य यूरोपीय संघ के लोग आकर कब्जा करने लगे थे. सस्ते वेतन पर काम करने वाले ये लोग अंग्रेजों को अपदस्थ करते जा रहे थे. इसी तरह अन्य देशों की सस्ती मजदूरी पर बनी वस्तुएं ब्रिटिश बाजारों को पाटती चली जा रही थीं.

इसीलिए ‘ब्रेक्जिट’ को ब्रिटेन की जनता उत्सव की तरह मना रही है. लेकिन ‘ब्रेक्जिट’ को लेकर जो जनमत-संग्रह हुआ था, उसमें यदि 52 प्रतिशत वोटरों ने यूरोपीय संघ छोड़ने के पक्ष में वोट दिया था तो 48 प्रतिशत ने उसमें जमे रहने पर सहमति दी थी, क्योंकि हजारों ब्रिटिश नागरिक इन यूरोपीय देशों में बिना पासपोर्ट-वीजा आते-जाते रहते थे, नौकरियां और व्यापार करते थे.

इसके अलावा नार्दर्न आयरलैंड के लोग ‘ब्रेक्जिट’ के विरुद्ध वोट देते रहे हैं. लेकिन अब जबकि ब्रेक्जिट लागू हो गया है तो भी अगले माह तक यूरोपीय संघ और ब्रिटेन का संबंध पूर्ववत रहेगा. इस बीच दोनों यह तय करेंगे कि ब्रिटेन और शेष 27 यूरोपीय देश के बीच द्विपक्षीय आपसी संबंध कैसे रहेंगे. वास्तव में यह यूरोपीय संघ के क्षीण या विसर्जित होने की शुरु आत है. हमारे लिए यह चिंता का विषय है, क्योंकि हम तो सारे दक्षिण एशिया के देशों का यूरोपीय संघ से भी बेहतर संगठन बनाना चाहते हैं.

Web Title: Ved Pratap Vaidik blog: European Union's falter

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