ऊर्जा संकट पर राहुल की बॉक्सिंग और मोदी का सूर्य नमस्कार

By आलोक मेहता | Updated: March 14, 2026 07:26 IST2026-03-14T07:25:19+5:302026-03-14T07:26:57+5:30

अदानी और अंबानी समूह ने विशाल ग्रीन एनर्जी परियोजनाएं शुरू की हैं, जबकि टाटा और बिरला समूह सौर ऊर्जा उत्पादन और तकनीक में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.

Rahul's boxing and Modi's Surya Namaskar on energy crisis | ऊर्जा संकट पर राहुल की बॉक्सिंग और मोदी का सूर्य नमस्कार

ऊर्जा संकट पर राहुल की बॉक्सिंग और मोदी का सूर्य नमस्कार

राहुल गांधी को बचपन से बॉक्सिंग का शौक है और राजनीति में भी उनकी शैली वही है. बॉक्सिंग मुकाबले में कम समय में हार-जीत का फैसला हो जाता है. जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी प्रारंभिक काल से सूर्य नमस्कार के साथ अधिक समय और संयम से अधिकाधिक शांत भाव से शक्ति अर्जन और उसके दूरगामी लाभ पर ध्यान देते रहे हैं. वर्तमान में पश्चिम एशिया के युद्ध के कारण  ऊर्जा के वैश्विक संकट - खासकर पेट्रोलियम और गैस की आवश्यकताओं पर राहुल गांधी तथा उनकी कांग्रेस पार्टी संसद के अंदर-बाहर बहुत हंगामा कर रही है.

जबकि मोदी  सरकार की ओर से पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी ने विस्तृत वक्तव्य देकर विश्वास दिलाया कि पेट्रोल, गैस की कमी नहीं है और ऊर्जा संकट से निपटने तथा 40 देशों से कच्चे तेल के आयात के अनुबंधों से भविष्य में आपूर्ति के इंतजाम हैं.

राहुल गांधी करीब 22 वर्षों से सांसद हैं, जिनमें 10 वर्ष उनकी यानी कांग्रेस नेतृत्व वाली सरकार थी. उन्होंने तब से अब तक कितनी बार ऊर्जा की नीतियों, कार्यक्रमों पर संसद के अंदर या बाहर बोला? विशेष रूप से सबसे कम खर्च और मुफ्त मिल सकने वाली सौर ऊर्जा को प्राथमिकता पर अपनी या पराई सरकार का ध्यान आकर्षित किया? हां प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की सरकार के कुछ सहयोगियों, सलाहकारों और राज्य सरकारों के प्रयासों से सौर ऊर्जा के लिए स्वीकृतियां मिलीं.

दूसरी तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार आने के बाद  (2014–2025)  सौर ऊर्जा की योजनाओं का  विस्तार  और क्रियान्वयन सूर्य की रोशनी की तरह तेजी से हुआ है. इस अवधि में सौर ऊर्जा की क्षमता कई गुना बढ़ी, बड़े सोलर पार्क बने, घरेलू निर्माण उद्योग विकसित हुआ और भारत वैश्विक सौर ऊर्जा नेतृत्व की ओर बढ़ा. आज सौर ऊर्जा भारत की ऊर्जा नीति का केंद्रीय स्तंभ बन चुकी है.

यदि वर्तमान गति बनी रहती है तो आने वाले दशक में भारत दुनिया की सबसे बड़ी सौर ऊर्जा अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो सकता है. सौर ऊर्जा तथा अन्य तरीकों से बिजली, गैस आदि के उत्पादन में बढ़ोत्तरी से कच्चे तेल के आयात में निरंतर कमी हुई. इसका लाभ वर्तमान वैश्विक पेट्रोल, गैस की गड़बड़ाई  अर्थव्यवस्था में भारत को बहुत अधिक सुरक्षित रखने में हो पा रहा है.

मोदी सरकार की नीतियों और निजी निवेश के संयोजन से भारत आज दुनिया के सबसे बड़े सौर ऊर्जा बाजारों में शामिल हो गया है. यदि वर्तमान गति बनी रहती है तो आने वाले दशक में भारत विश्व के सबसे बड़े सौर ऊर्जा उत्पादक देशों में शामिल हो सकता है. बड़े पैमाने पर सौर ऊर्जा उत्पादन के लिए 15 ‘सोलर पार्क मॉडल’ विकसित किए गए हैं. इस मॉडल में सरकार भूमि, ट्रांसमिशन और बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराती है और निजी कंपनियां बिजली उत्पादन करती हैं.

राजस्थान और गुजरात भविष्य में भी भारत के सोलर केंद्र रहेंगे. कच्छ और थार रेगिस्तान में विशाल सोलर पार्क बन रहे हैं. अदानी और अंबानी समूह ने विशाल ग्रीन एनर्जी परियोजनाएं शुरू की हैं, जबकि टाटा और बिरला समूह सौर ऊर्जा उत्पादन और तकनीक में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं. इस तरह केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर जमीन तथा अन्य सुविधाओं से अपनी बिजली उत्पादन क्षमता निरंतर बढ़ा सकती हैं. राजस्थान, गुजरात, मध्यप्रदेश  और कुछ दक्षिणी राज्यों को बहुत सफलता मिल रही है. आश्चर्य यह है कि अपार संभावनाओं के बावजूद बिहार और उत्तर प्रदेश सबसे पीछे हैं.

Web Title: Rahul's boxing and Modi's Surya Namaskar on energy crisis

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