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ब्लॉग: मोदी के लिए अश्विनी वैष्णव का महत्व

By लोकमत समाचार ब्यूरो | Updated: June 26, 2024 11:19 IST

वैष्णव मूल संघ परिवार के सदस्य नहीं हैं, पर वे मोदी के वृहद राजनीतिक और प्रशासनिक मिशन के केंद्र में हैं। ऐसी स्थिति में कई भूमिकाएं निभाते हुए वे एक ही लक्ष्य पर एकाग्र हैं।

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प्रभु चावला

भारतीय राजनीति की जानकारी रखने वाला हर व्यक्ति यह जानता है कि सफलता की बुलेट ट्रेन हॉर्वर्ड और व्हार्टन जैसे स्टेशनों से होकर गुजरती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पसंदीदा मंत्री अश्विनी वैष्णव का अभिजन टेक्नोक्रेट से अनेक मंत्रालयों के मंत्री के रूप में परिवर्तन प्रतिष्ठित बिजनेस स्कूलों के लिए शोध का एक विषय हो सकता है। नौकरशाह से राजनेता बने 54 वर्षीय वैष्णव की राजनीतिक और प्रशासनिक प्रबंधन में दक्षता के कारण उन्हें रेल, सूचना एवं प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिक्स व सूचना तकनीक मंत्रालयों के मंत्री के रूप में फिर से सरकार में शामिल किया गया है। वे ओडिशा से राज्यसभा में 2019 से सांसद हैं। नौकरशाह से राजनेता बनने की उनकी कहानी समकालीन राजनीति में सफलता की बड़ी गाथा है।

इस महीने की शुरुआत में जब उन्हें मोदी ने फिर मंत्री बनाया तो दिल्ली दरबारियों को बड़ा अचरज हुआ, क्योंकि बीते दशक के भाजपा के वर्चस्व को छोड़कर 1996 से ही रेल मंत्रालय हमेशा एनडीए के किसी घटक दल के पास होता था। मोदी को वैष्णव का महत्व पता है। वे महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के लिए पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव के साथ

भाजपा के सह-प्रभारी भी बनाए गए हैं।

राजनीति में वैष्णव एक विरोधाभास भी हैं क्योंकि वे राज्यसभा के अकेले ऐसे भाजपा सांसद हैं, जो दो बार निर्वाचित हुए हैं, पर अपनी पार्टी द्वारा नहीं, बल्कि नवीन पटनायक की पार्टी की उदारता के कारण, जिसे हाल ही में भाजपा ने राज्य में परास्त किया है। मोदी और अमित शाह ने पहले 2019 में और फिर 2024 में पटनायक से उनकी ओर से बात की थी। वैष्णव ने राज्य में एक दशक से कम समय तक आईएएस के रूप में काम किया था और 1999 के भीषण चक्रवात के समय डाटा संग्रहण में उनकी भूमिका की बड़ी सराहना हुई थी। साल 2003 से उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी के साथ काम किया- पहले प्रधानमंत्री कार्यालय में और फिर पूर्व प्रधानमंत्री के पद से हटने के बाद। विकसित भारत के गंतव्य के लिए मोदी रेल तथा सूचना तकनीक को अपने बेहतरीन इंजन के रूप में देखते हैं। और, सूचना मंत्री के रूप में वैष्णव देश-विदेश के मीडिया में ‘मोदी संदेश’ को भी प्रभावी ढंग से प्रसारित करेंगे।

वैष्णव अब तक 80 से अधिक चमकदार वंदे भारत ट्रेनें शुरू कर चुके हैं, जो 250 से ज्यादा जिलों से गुजरती हैं। रेलवे की छवि सुधारने में उन्होंने अपने बिजनेस मॉडल का सफल इस्तेमाल किया है. सौ से अधिक स्टेशनों को फिर से विकसित किया गया और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। ऐसा सैकड़ों स्टेशनों के साथ करने की उनकी योजना है। चुनाव से एक माह पहले 26 फरवरी को मोदी ने 553 स्टेशनों के पुनर्विकास की आधारशिला रखी थी।

विपक्ष ने मंत्री पर यात्रियों की सुरक्षा की उपेक्षा करने और सांगठनिक खामियों के आरोप लगाए हैं। मार्च तक रेलवे में सुरक्षा से संबंधित 1.7 लाख से अधिक पद खाली थे। बीते दशक में रेल दुर्घटनाओं में कमी आई है, पर हताहतों की संख्या बढ़ गई है। पिछले साल ओडिशा के बालासोर में हुई तिहरी रेल दुर्घटना में 291 लोगों की मौत हुई थी. अजीब संयोग है कि वैष्णव कभी बालासोर के कलेक्टर रहे थे।

वैष्णव का मिशन मोदी की विभिन्न आकांक्षाओं को पूरा करना है, जिनमें मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना भी शामिल है। प्रधानमंत्री मानते हैं कि 2.30 करोड़ से अधिक दैनिक रेल यात्री अपने-आप में एक विशाल वोट बैंक हैं। प्रभावी शासन के लिए तकनीक का अधिक उपयोग मोदी का पसंदीदा विचार है, इसलिए डिजिटल इंडिया के लिए भी वैष्णव उनकी पसंद हैं। मोदी के नवोन्मेषी शासन मॉडल के वैष्णव अभिन्न अंग हैं, जिसमें टेक्नोक्रेट और पेशेवर बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। वैष्णव जैसे बाहर के लोगों को लाने से यह भी इंगित होता है कि राजनेताओं की भागीदारी घट रही है।

वैष्णव अपने समकक्ष समूह में शायद आदर्श बाबू के सटीक प्रतीक हैं। साल 1994 बैच के इस आईएएस अधिकारी की प्रशासनिक क्षमता पहली बार 1999 के चक्रवात के समय दिखी थी, जब उन्होंने दक्षता से उसका सामना किया और रिकॉर्ड समय में स्थिति को सामान्य कर दिया। उसी समय उनका संपर्क वाजपेयी के प्रधानमंत्री कार्यालय के संयुक्त सचिव अशोक सैकिया से हुआ था, जिनके जिम्मे आपदा प्रबंधन था। सैकिया उन्हें 2003 में उपसचिव के तौर पर प्रधानमंत्री कार्यालय लाए। प्रधानमंत्री पद से हटने के बाद वाजपेयी ने उन्हें अपना निजी सचिव बनाया. यह जिम्मेदारी वैष्णव ने 2006 तक निभाई। इसी अवधि में उन्होंने मोदी से अपनी निकटता बढ़ाई और 2008 में प्रबंधन की पढ़ाई के लिए अमेरिका के व्हार्टन चले गए।

अमेरिका से लौटने के कुछ समय बाद ही उन्होंने आईएएस से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली और कॉरपोरेट सेक्टर में चले गए। साल 2012 में उन्होंने अपनी कुछ कंपनियों की स्थापना की। इनमें से अधिकतर स्टील और पैलेट के कारोबार में हैं और दक्षिण के एक नामी उद्यमी के साथ साझेदारी में ओडिशा से चलती हैं। इसके अलावा उन्होंने गुजरात में गाड़ियों के कल-पुर्जे का कारोबार शुरू किया और राज्यसभा सांसद बनने से आठ महीने पहले सितंबर, 2018 में अहमदाबाद में एक घर खरीदा।

कारोबार के लिए गुजरात को चुनने के बारे में पूछे जाने पर इस समझदार नेता-उद्यमी ने कहा, ‘मैं गुजरात गया और एक कंटेनर में सात माह रहकर मैंने अपनी इकाइयां स्थापित कीं क्योंकि मैं रिकॉर्ड समय में अपनी फैक्टरी शुरू कर देना चाहता था।’ मंत्री के रूप में मिले बंगले के अलावा वैष्णव का असली घर मोदीनॉमिक्स और मोदीपॉलिटिक्स का कंटेनर है। वे कम बोलने और अपना काम चुपचाप करते रहने के लिए जाने जाते हैं। मोदी शासन क्षमता में उन्हें अच्छा मानते होंगे, पर वे राजनीति में भी समान रूप से दक्ष हैं।

मोदी की कैबिनेट में भाजपा के 25 मंत्री हैं, जिनमें वरिष्ठता में वैष्णव 20वें स्थान पर हैं, फिर भी जटिल राजनीतिक एवं वित्तीय मामलों में मोदी उन्हीं पर भरोसा करते हैं। पिछले साल अमित शाह ने उन्हें मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव का प्रभार सौंपा था। वे कांग्रेस को रोकने में सफल रहे थे। वे भोपाल में किराये के घर में दो माह रहे थे और भाजपा की जटिल बूथ प्रबंधन रणनीति को देख रहे थे। वे भाजपा की सभी रणनीतिक बैठकों में हिस्सा लेते हैं। लोकसभा चुनाव की रणनीति बनाने में भी वे अग्रणी रहे थे। वैष्णव मूल संघ परिवार के सदस्य नहीं हैं, पर वे मोदी के वृहद राजनीतिक और प्रशासनिक मिशन के केंद्र में हैं। ऐसी स्थिति में कई भूमिकाएं निभाते हुए वे एक ही लक्ष्य पर एकाग्र हैं।

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