मार्च में दिसंबर की दस्तक: बिखरता ऋतुचक्र

By पंकज चतुर्वेदी | Updated: March 18, 2026 05:42 IST2026-03-18T05:42:01+5:302026-03-18T05:42:01+5:30

December arrives in March: दिल्ली, गाजियाबाद, कानपुर और लखनऊ जैसे शहरों में मार्च के पहले हफ्ते में अचानक छा जाने वाला घना कोहरा कोई साधारण मौसमी फेरबदल नहीं है.

December arrives in March disintegrating cycle seasons blog Pankaj Chaturvedi | मार्च में दिसंबर की दस्तक: बिखरता ऋतुचक्र

सांकेतिक फोटो

Highlights बात का प्रमाण है कि वायुमंडल अब अपनी मर्यादाएं भूलने लगा है.सामान्य से 8 से 12 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया गया है,दिन में सूरज की किरणें सीधे धरती को तपा रही हैं.

December arrives in March: भारतीय कैलेंडर में मार्च का महीना उस संधि काल का प्रतीक है जहां शिशिर की विदाई होती है और ग्रीष्म अपनी दस्तक देने लगता है. यह वह समय है जब पलाश के फूल दहकते हैं और गेहूं की बालियां सूरज की सुनहरी किरणों को सोखकर पकने की ओर बढ़ती हैं. किंतु इस वर्ष उत्तर भारत के आसमान ने जो रंग दिखाया है, वह न केवल अस्वाभाविक है बल्कि डराने वाला भी है. दिल्ली, गाजियाबाद, कानपुर और लखनऊ जैसे शहरों में मार्च के पहले हफ्ते में अचानक छा जाने वाला घना कोहरा कोई साधारण मौसमी फेरबदल नहीं है.

जब हवाई जहाजों को रास्ता बदलकर दूसरे राज्यों में उतरना पड़े और सड़कों पर दृश्यता शून्य हो जाए, तो समझ लेना चाहिए कि प्रकृति का संतुलन बुरी तरह डगमगा चुका है. इसे मौसम वैज्ञानिकों ने जलवायु आपातकाल की संज्ञा दी है, जो इस बात का प्रमाण है कि वायुमंडल अब अपनी मर्यादाएं भूलने लगा है.

रही बची कसर पूरी हो गई अचानक हुई बरसात और ओला वृष्टि ने – इससे फसलों तक चौपट हो गई. होली बीतते ही दिन और रात के तापमान में आ रहा यह भारी अंतर प्रकृति के बदलते मिजाज का एक गंभीर संकेत है. मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, उत्तर भारत के कई हिस्सों में दिन का तापमान सामान्य से 8 से 12 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया गया है,

जबकि रातें तुलनात्मक रूप से ठंडी बनी हुई हैं. इस तापमान की गड़बड़ी का बड़ा कारण पश्चिमी विक्षोभ का अत्यंत कमजोर होना है. आमतौर पर ये विक्षोभ बारिश और बर्फबारी लाते हैं जो तापमान को नियंत्रित रखते हैं. इनकी अनुपस्थिति के कारण आसमान पूरी तरह साफ है, जिससे दिन में सूरज की किरणें सीधे धरती को तपा रही हैं.

याद करें, इस बार जनवरी और फरवरी में करीब 60% कम हुई. इसके चलते मिट्टी में नमी न होने के कारण दिन की गर्मी वाष्पीकरण में खर्च होने के बजाय सीधे सतह को गर्म करती है. रात में, साफ आसमान होने के कारण धरती की गर्मी तेजी से वापस अंतरिक्ष में चली जाती है जिससे रातें ठंडी हो जाती हैं.

इसके साथ पश्चिमी भारत के ऊपर बने उच्च वायुदाब के क्षेत्रों के कारण हवाएं नीचे की ओर दब रही हैं. यह दबती हुई हवा गर्म हो जाती है और बादलों को बनने से रोकती है, जिससे दिन में 'हीटवेव' जैसी स्थिति बन रही है. मार्च में दिसंबर जैसा यह दृश्य एक बड़ी आपदा की आहट है.

यह हमारी जीवनशैली और विकास के उन मॉडलों पर सवालिया निशान खड़ा करता है जो प्रकृति की कीमत पर तैयार किए गए हैं. हिमालयी क्षेत्रों में पश्चिमी विक्षोभ की बदलती आवृत्ति और मैदानी इलाकों में बढ़ता कंक्रीट का जाल, दोनों ही इस संकट के लिए उत्तरदायी हैं.

Web Title: December arrives in March disintegrating cycle seasons blog Pankaj Chaturvedi

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