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BJP-RSS News: ‘परिवार’ में फिर से कैसे कायम हो शांति?

By हरीश गुप्ता | Updated: July 25, 2024 10:55 IST

BJP-RSS News: भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने 18 मई 2024 को कुछ ऐसा कह दिया जिसकी कल्पना भी नहीं की गई थी.

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ठळक मुद्देभाजपा को अब आरएसएस के समर्थन की जरूरत नहीं है.पहले ‘सुपरमैन’ बनना चाहता है, फिर ‘भगवान’ और फिर ‘विश्वरूप’.भाजपा समेत इसके सभी 36 अग्रणी संगठनों के प्रदर्शन की समीक्षा की जाएगी.

BJP-RSS News: इस साल मई में लोकसभा चुनाव के बीच शुरू हुए भाजपा और उसके संरक्षक आरएसएस के बीच कड़वे अध्याय का अभी उपसंहार नहीं हुआ है. ‘संघ परिवार’ में इस तरह के मतभेद कोई नई बात नहीं हैं, क्योंकि वसंतराव ओक, बलराज मधोक, लालकृष्ण आडवाणी या यहां तक कि अटल बिहारी वाजपेयी के समय भी ये मतभेद सामने आए थे. लेकिन ज्यादातर हिंदी फिल्मों की तरह इनका अंत हमेशा सुखद होता था और आरएसएस हमेशा विजयी होता था. लेकिन इस बार भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने 18 मई 2024 को कुछ ऐसा कह दिया जिसकी कल्पना भी नहीं की गई थी.

लोकसभा चुनाव के बीच उन्होंने कहा कि भाजपा को अब आरएसएस के समर्थन की जरूरत नहीं है, क्योंकि पार्टी बड़ी हो गई है और (अपने मामलों को खुद चलाने में) सक्षम है. वह यहीं नहीं रुके और आगे कहा, ‘‘हर किसी की अपनी-अपनी जिम्मेदारियां और भूमिकाएं हैं. आरएसएस एक सांस्कृतिक और सामाजिक संगठन है और हम एक राजनीतिक संगठन हैं... यह जरूरत का सवाल नहीं है....’’

नड्डा के बयान ने राजनीतिक पर्यवेक्षकों और परिवार को चौंका दिया, लेकिन कोई भी प्रतिक्रिया देने को तैयार नहीं था. हालांकि, लोकसभा चुनाव के नतीजों ने भाजपा नेतृत्व को चौंका दिया क्योंकि उसकी सीटों की संख्या 303 से घटकर 240 पर आ गई. पार्टी ने बहुमत खो दिया, हालांकि एनडीए विजेता बनकर उभरा. उम्मीद थी कि भाजपा नेतृत्व इस मामले में कुछ सुधार करेगा. लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ.

आखिरकार, आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने ठीक दो महीने बाद 18 जुलाई को बोलने का फैसला किया. उन्होंने रांची में एक सार्वजनिक समारोह में कहा, ‘‘आत्म-विकास के क्रम में, एक व्यक्ति पहले ‘सुपरमैन’ बनना चाहता है, फिर ‘भगवान’ और फिर ‘विश्वरूप’. उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन लक्षित व्यक्ति के बारे में किसी को संदेह नहीं रहा.

सुरेश सोनी होने का महत्व

अब सबकी निगाहें केरल में 31 अगस्त से शुरू हो रही आरएसएस की तीन दिवसीय वार्षिक समन्वय समिति की बैठक पर टिकी हैं, जिसमें भाजपा समेत इसके सभी 36 अग्रणी संगठनों के प्रदर्शन की समीक्षा की जाएगी. अंदरूनी सूत्रों को उम्मीद है कि केरल बैठक में नड्डा और कुछ वरिष्ठ केंद्रीय मंत्रियों के शामिल होने से आगे का रास्ता निकल सकता है.

खबरों की मानें तो भाजपा नेतृत्व पहले ही सुलह के पक्ष में है. पार्टी को एहसास हो गया है कि आरएसएस के बिना वह ‘नई कांग्रेस’ बन जाएगी. अगर आरएसएस हर जिले और कस्बे में अपनी राजनीतिक शाखा से अपने कार्यकर्ताओं को हटा लेता है, तो भाजपा के पास केवल दूसरे दलों से आए दलबदलू ही बचेंगे.

चिंतित भाजपा सरकार मंत्रिमंडल गठन में व्यस्त थी और खबर है कि उसने रास्ता निकालने के लिए आरएसएस के दिग्गज सुरेश सोनी के दरवाजे खटखटाए हैं. सोनी का आरएसएस में काफी सम्मान है और उन्होंने गुजरात में काम किया है और मोदी को दिल्ली लाने में उनका बहुत बड़ा योगदान रहा है.

आरएसएस नेतृत्व ने भाजपा नेतृत्व को स्पष्ट कर दिया है कि वह प्रॉक्सी या किसी और तरीके से सरकार चलाने में दिलचस्पी नहीं रखता है. हालांकि, वह चाहेगा कि नए पार्टी प्रमुख की नियुक्ति से पहले उससे सलाह ली जाए, जो आरएसएस का समर्पित कार्यकर्ता हो. भाजपा ने जवाब में कहा कि बजट सत्र के कारण समय कम है और विधानसभा चुनाव भी नजदीक हैं, जिसके लिए समय देना होगा.

यह भी कहा गया कि कार्यकारी अध्यक्ष की नियुक्ति की जाए. इस बीच कई नाम सामने आए, जिनमें महाराष्ट्र से ताल्लुक रखने वाले भाजपा महासचिव विनोद तावड़े, हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर और शिवराज सिंह चौहान शामिल हैं. लेकिन भाजपा नेतृत्व ने सुझाव दिया कि नड्डा को जनवरी 2025 तक पार्टी पद पर बने रहने दिया जाए.

हालांकि आरएसएस के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले, जो पदानुक्रम में दूसरे नंबर पर हैं, दिल्ली में तैनात हैं और आरएसएस के संयुक्त महासचिव अरुण कुमार भाजपा के साथ समन्वय का काम देखते हैं, लेकिन इस संकट को सुरेश सोनी ने संभाला.

हरियाणा को खट्टर ही चला रहे

मनोहर लाल खट्टर ने भले ही हरियाणा के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है और करनाल से लोकसभा चुनाव जीतने के बाद उन्हें केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल कर लिया गया है, लेकिन इससे उनके राज्य में कामकाज चलाने पर रोक नहीं लगी है. वे चंडीगढ़ में मुख्यमंत्री बंगले में ही रह रहे हैं, क्योंकि उनके उत्तराधिकारी नायब सिंह सैनी को प्रशासन चलाने में उनके मार्गदर्शन की आवश्यकता है.

खट्टर मोदी के वफादार हैं और पूर्णकालिक आरएसएस कार्यकर्ता हैं. उनके कहने पर ही खट्टर के एक और वफादार मोहन लाल बडोली को हरियाणा भाजपा का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था. बडोली ने सोनीपत से 2024 का लोकसभा चुनाव लड़ा था, लेकिन वे असफल रहे. वे भाजपा के विधायक हैं.

वे जाति से ब्राह्मण हैं और भाजपा को उम्मीद है कि राज्य में गैर-जाट वोटों के बहुमत को अपने पाले में ला सकेंगे. खट्टर पंजाबी हैं, जबकि सैनी ओबीसी हैं. भाजपा को लगता है कि जाट कांग्रेस, इनेलो और जेजेपी में बंट जाएंगे. हालांकि, भाजपा को तीसरी बार किस्मत आजमाने में मुश्किल होगी.

लोकसभा चुनावों के दौरान, भाजपा को राज्य में बड़ा झटका लगा था जब उसने 10 में से पांच लोकसभा सीटें खो दीं और उसका वोट प्रतिशत भी गिर गया. कई लोग आश्चर्य व्यक्त करते हैं कि खट्टर हरियाणा में पार्टी का चेहरा क्यों बने हुए हैं, जबकि दिसंबर में विधानसभा चुनावों से पहले सत्ता विरोधी लहर के कारण उन्हें हटा दिया गया था.

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