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ब्लॉग: उच्च सदन के लिए घटिया चुनावी राजनीति

By राजकुमार सिंह | Updated: March 1, 2024 10:06 IST

सबसे बड़ा खेल छोटे से पर्वतीय राज्य हिमाचल प्रदेश में हुआ, जहां जीत के लिए जरूरी से भी ज्यादा वोट होने के बावजूद कांग्रेस उम्मीदवार अभिषेक मनु सिंघवी हार गए और भाजपा के हर्ष महाजन जीत गए।

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राज्यसभा को संसद का उच्च सदन कहा जाता है. पर 27 फरवरी को हुए चुनाव में दलीय निष्ठा और राजनीतिक नैतिकता की जैसी धज्जियां उड़ीं, उससे बड़प्पन का संदेश तो नहीं गया, उलटे लोकतंत्र शर्मसार ही हुआ। इस तरह चुने गए उच्च सदन के सांसद कैसा महसूस कर रहे होंगे- वे ही जानते होंगे, पर अपने माननीय विधायकों के ऐसे आचरण से उन्हें चुननेवाले निश्चय ही शर्मिंदा हुए होंगे।

जिस पार्टी ने टिकट दिया, जिसके चुनाव चिन्ह पर मतदाताओं ने वोट दिया, उन्हीं के सगे नहीं हुए। तब फिर किसके सगे हुए या होंगे? बेशक ऐसा पहली बार नहीं हुआ, पर बार-बार होने से गलत काम सही तो साबित नहीं हो जाता।

2024 में राज्यसभा की 56 सीटें खाली हुईं। राज्यसभा सांसद चुनने के लिए संबंधित राज्य की विधानसभा के सदस्य ही मतदान करते हैं। इसलिए यह तस्वीर भी लगभग स्पष्ट होती है कि किस दल के कितने उम्मीदवार जीत सकते हैं। यही कारण रहा कि 41 राज्यसभा सीटों के लिए विभिन्न दलों के उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित भी हुए। जहां थोड़े भी अतिरिक्त वोट थे और अन्य दलों के विधायकों में सेंधमारी से अतिरिक्त राज्यसभा सांसद जितवाने की संभावना थी- वहां खुला खेल हुआ।

जो दल और उम्मीदवार जीता, उसे उस खेल में अंतरात्मा के दर्शन हुए, तो जिस दल और उम्मीदवार के हिस्से हार आई, उसे वह लोकतंत्र को खतरे में डालनेवाला खरीद-फरोख्त का खेल नजर आया पर क्या सैकड़ों विधायकों में से मुट्ठी भर द्वारा ही क्रॉस वोटिंग से राजनेताओं में अंतरात्मा दुर्लभ चीज ही साबित नहीं हुई? सिर्फ उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और हिमाचल प्रदेश की 15 सीटों के लिए ही मतदान की जरूरत पड़ी- और इन तीनों ही राज्यों में कुछ-कुछ माननीयों की अंतरात्मा ठीक मतदान के वक्त जाग गई।

उत्तर प्रदेश से 10 राज्यसभा सीटें खाली हुईं। विधानसभा में मौजूदा सदस्य संख्या के हिसाब से भाजपा के पास अपने सात उम्मीदवार जिताने के लिए पर्याप्त वोट के अलावा कुछ अतिरिक्त वोट थे। सपा के पास दो उम्मीदवार जिताने के लिए तो पर्याप्त वोट थे ही, कुछ अतिरिक्त वोट भी थे। सब कुछ राजनीतिक नैतिकता के दायरे में होता तो उत्तर प्रदेश से नौ ही राज्यसभा सदस्य चुने जाते और दसवीं सीट खाली रह जाती।

अतिरिक्त वोटों के लालच ने ही दोनों दलों को अतिरिक्त उम्मीदवार उतारने को प्रेरित किया- और उस खेल को भी, जिसमें कुछ माननीयों की अंतरात्मा ऐसी जागी कि फिर उसे दलीय निष्ठा से ले कर नैतिकता तक कुछ भी नजर नहीं आया।

खेल कांग्रेस शासित कर्नाटक में भी हुआ। वहां चार सीटें खाली हुई थीं, लेकिन अतिरिक्त वोटों के लालच से पांच उम्मीदवार उतार दिए गए। कांग्रेस ने तीन उम्मीदवार उतारे, जबकि भाजपा और जनता दल सेक्युलर गठबंधन ने दो। अपना दूसरा उम्मीदवार जितवाने के लिए गठबंधन को पांच अतिरिक्त वोटों की जरूरत थी, पर भाजपा विधायक सोम शेखर रेड्डी ने क्रॉस वोटिंग कर कांग्रेस उम्मीदवार के पक्ष में वोट दे दिया।

सबसे बड़ा खेल छोटे से पर्वतीय राज्य हिमाचल प्रदेश में हुआ, जहां जीत के लिए जरूरी से भी ज्यादा वोट होने के बावजूद कांग्रेस उम्मीदवार अभिषेक मनु सिंघवी हार गए और भाजपा के हर्ष महाजन जीत गए।

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