Assembly elections 2026: राष्ट्रीय राजनीति भी तय करेंगे विधानसभा चुनाव

By राजकुमार सिंह | Updated: March 17, 2026 05:30 IST2026-03-17T05:30:31+5:302026-03-17T05:30:31+5:30

Assembly elections 2026: टीवीके नामक दल बना कर फिल्म अभिनेता से राजनेता बने थलापति विजय अगर बड़ी ताकत बन कर उभरे तो तमाम समीकरण गड़बड़ा सकते हैं.

Assembly elections 2-phase polling West Bengal 1 phase in TN Kerala, Assam Puducherry counting on May 4 polls decide national politics blog raj kumar singh | Assembly elections 2026: राष्ट्रीय राजनीति भी तय करेंगे विधानसभा चुनाव

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HighlightsAssembly elections 2026: भाजपा मुख्य विपक्षी दल बन चुकी है.  Assembly elections 2026: असम में लगातार दूसरी बार भाजपा सरकार है.Assembly elections 2026: कांग्रेस को एक और बड़ा झटका चुनाव से ठीक पहले दिया.

Assembly elections 2026: पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और केंद्रशासित प्रदेश पुदुचेरी में विधानसभा चुनाव का बिगुल बज गया है. चुनाव परिणाम इन पांच राज्यों में भावी सरकार का फैसला ही नहीं करेंगे, राष्ट्रीय राजनीति की दिशा भी बताएंगे. इन राज्यों का सत्ता संग्राम ज्यादा दिलचस्प इसलिए भी होगा, क्योंकि दो राज्यों में केंद्र में सत्तारूढ़ गठबंधन राजग की सरकारें हैं तो तीन में विपक्षी गठबंधन इंडिया की. सत्ता तो हर राज्य की महत्वपूर्ण होती है, पर सबसे ज्यादा निगाहें प. बंगाल के चुनाव पर रहेंगी. कांग्रेस छोड़ अपनी अलग तृणमूल कांग्रेस बनानेवाली ममता बनर्जी वहां तीन बार से मुख्यमंत्री हैं. दिलचस्प समीकरण यह कि पहले सत्ता में रही कांग्रेस और फिर तीन दशक से भी ज्यादा सत्तारूढ़ रहा वाम मोर्चा अब बंगाल की राजनीति में हाशिये पर हैं, जबकि भाजपा मुख्य विपक्षी दल बन चुकी है.  

तमिलनाडु की राजनीति अरसे तक द्रमुक और अन्नाद्रमुक के बीच दो ध्रुवीय रही, लेकिन जयललिता के निधन के बाद वह संतुलन गड़बड़ा गया है. अन्नाद्रमुक के एकीकरण और उससे गठबंधन के जरिये भाजपा वहां सत्ता परिवर्तन की संभावनाएं तलाश रही है, लेकिन एम. के. स्टालिन सरकार के कार्यकाल में रह-रह सनातन धर्म और हिंदी भाषा को ले कर उठते रहे विवादों के बावजूद यह आसान नहीं लगता.

हां, टीवीके नामक दल बना कर फिल्म अभिनेता से राजनेता बने थलापति विजय अगर बड़ी ताकत बन कर उभरे तो तमाम समीकरण गड़बड़ा सकते हैं. पांच चुनावी राज्यों में भाजपा की जीत की सबसे बेहतर संभावनाएं असम में हैं. अरसे से घुसपैठ और जनसांख्यिकी परिवर्तन जैसे मुद्दों से घिरे रहे असम में लगातार दूसरी बार भाजपा सरकार है.

पूर्व कांग्रेसी हिमंत बिस्वा सरमा ने पूर्वोत्तर राज्यों में भाजपा का जैसा विस्तार करवाया, उसके पुरस्कारस्वरूप उन्हें पिछले चुनाव के बाद असम का मुख्यमंत्री बनाया गया. भाजपा के लाड़ले हिमंत इस समय कांग्रेस ही नहीं, राहुल गांधी के भी सबसे मुखर आलोचक हैं. पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेन बोरा को भाजपा में शामिल करवा कर हिमंत ने कांग्रेस को एक और बड़ा झटका चुनाव से ठीक पहले दिया.

बेशक असम की राजनीति में गठबंधन आज भी निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं. इसलिए यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा और कांग्रेस में से कौन बेहतर ढंग से चुनावी गठबंधन को अंजाम दे पाता है.  
 केरल की दो ध्रुवीय राजनीति में भाजपा के लिए ज्यादा संभावनाएं हैं नहीं. बेशक वहां से लोकसभा चुनाव जीते अभिनेता गोपी केंद्र में मंत्री बनाए गए.

हाल ही में कांग्रेस सांसद शशि थरूर के निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा अपना मेयर भी बनाने में सफल हो गई, लेकिन केरल की सत्ता की जंग अभी भी मुख्यत: वाम मोर्चा यानी एलडीएफ और कांग्रेसनीत मोर्चा यूडीएफ के बीच ही सिमटी है. कोई भी जीते, सत्ता इंडिया गठबंधन के पास ही रहेगी.

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