Assemblies Elections 2026: 5 राज्यों के विधानसभा चुनाव परिणामों के सबक

By लोकमत समाचार सम्पादकीय | Updated: May 4, 2026 20:23 IST2026-05-04T20:21:56+5:302026-05-04T20:23:59+5:30

Assemblies Elections 2026: केरल में कांग्रेस ने दस साल पुराने वामपंथी शासन का अंत कर दिया है और पुडुचेरी में एनडीए ने लगातार दूसरी बार सत्ता में वापसी कर ली है.

Assemblies Elections 2026 Lessons assembly election results 5 states west bengal | Assemblies Elections 2026: 5 राज्यों के विधानसभा चुनाव परिणामों के सबक

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Highlightsअसम में भाजपा ने लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी कर ली है,थलापति विजय की नई-नवेली पार्टी तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) बाजी मार ले जाएगी.बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी से लोगों में असंतोष था.

Assemblies Elections 2026: देश के पांच राज्यों की विधानसभाओं के बहुप्रतीक्षित चुनाव परिणाम  तमिलनाडु को छोड़कर लगभग वैसे ही हैं जैसी अधिकतर एग्जिट पोल में उम्मीद जताई जा रही थी. प. बंगाल में भाजपा ने विशाल बहुमत के साथ ममता बनर्जी के 15 साल पुराने गढ़ को ढहा दिया है, असम में भाजपा ने लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी कर ली है,

केरल में कांग्रेस ने दस साल पुराने वामपंथी शासन का अंत कर दिया है और पुडुचेरी में एनडीए ने लगातार दूसरी बार सत्ता में वापसी कर ली है. तमिलनाडु में द्रमुक और अन्नाद्रमुक के बीच पिछले कई दशकों से चले आ रहे द्विध्रुवीय मुकाबले के बीच, कम ही लोगों को उम्मीद रही होगी कि अभिनेता से राजनेता बने थलापति विजय की नई-नवेली पार्टी तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) बाजी मार ले जाएगी (हालांकि एक्सिस माई इंडिया ने अपने एग्जिट पोल में  टीवीके की 98 से 120 के बीच सीटें आने की बात कही थी).

इसमें कोई शक नहीं कि सुपरस्टार थलापति विजय का तमिलनाडु में जबरदस्त क्रेज है और अपनी पार्टी की चुनावी जीत में उन्हें इसका भी फायदा मिला है, लेकिन हकीकत यह भी है कि वहां दोनों पारंपरिक राजनीतिक दलों को अदल-बदल कर सत्ता में लाते हुए जनता उनकी सीमाओं को जान चुकी थी और सत्ता परिवर्तन से जनता को उतनी ही देर राहत मिलती थी जितनी देर तक बोझ को एक कांधे से दूसरे कांधे पर रखने में मिलती है. बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी से लोगों में असंतोष था.

इसलिए थलापति विजय के रूप में एक नया मौका नजर आते ही लोगों ने उसे लपक लेने में संकोच नहीं किया. जहां तक प. बंगाल की बात है तो पंद्रह साल से सत्ता में काबिज ममता बनर्जी की सरकार में स्थानीय स्तर पर भ्रष्टाचार और विकास की धीमी गति को लेकर जनता में नाराजगी थी.

इसमें कोई शक नहीं कि भाजपा ने सत्ता हासिल करने के लिए वहां जमीनी स्तर पर काफी मेहनत की, जिसका उसे फल भी मिला है. केरल में भी पिनराई विजयन की वाम मोर्चा सरकार एंटी इनकम्बेंसी का शिकार हुई है. दस साल पुरानी वाम मोर्चा सरकार का वित्तीय प्रबंधन सवालों के घेरे में था.

सरकार पर भ्रष्टाचार के कई गंभीर आरोप लगे और राज्य में उच्च साक्षरता दर के बावजूद, बेरोजगारी के कारण युवाओं को पलायन करना पड़ रहा था, जिससे उनमें असंतोष था. असम और पुडुचेरी में जरूर सत्तारूढ़ दल अपनी सत्ता बचाने में कामयाब रहे हैं. जहां तक असम की बात है तो भाजपा सरकार की कई प्रमुख कल्याणकारी योजनाओं को इसका श्रेय दिया जा सकता है.

इसके अलावा निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन से बदले चुनावी समीकरणों और विपक्ष के बिखरावों ने भी भाजपा की सत्ता को बरकरार रखने में भूमिका निभाई. पुडुचेरी में भी एन. रंगासामी के नेतृत्व वाली सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं और विपक्ष के बिखराव को सत्तारूढ़ दल की वापसी का श्रेय दिया जा सकता है.

कुल मिलाकर पांच राज्यों के इन विधानसभा चुनाव परिणामों ने दिखाया है कि सरकारें अगर जनअपेक्षाओं पर खरा नहीं उतरतीं तो जनता उसे सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाने में संकोच नहीं करती. लेकिन इसके लिए विपक्ष का सशक्त होना भी जरूरी है. साथ ही अगर कोई नया और अच्छा विकल्प मिले तो पारंपरिक राजनीतिक दलों को दरकिनार कर, नए विकल्प को आजमाने से भी मतदाता नहीं चूकते हैं. 

Web Title: Assemblies Elections 2026 Lessons assembly election results 5 states west bengal

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