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भरत झुनझुनवाला का ब्लॉग: वायु प्रदूषण ले डूबेगा अर्थव्यवस्था को 

By भरत झुनझुनवाला | Updated: June 26, 2019 06:32 IST

आम आदमी को वह ईंट 8 रुपए के स्थान पर 10 रुपए की खरीदनी पड़ेगी. इस प्रकार वायु प्रदूषण के लाभ और हानि दोनों ही आम आदमी पर पड़ते हैं. वायु प्रदूषण रोकने का लाभ आम आदमी को जीवन काल में वृद्धि के रूप में सीधे मिलता है.

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विश्व के 20 सबसे वायु प्रदूषित शहरों में से 14 भारत में हैं. इनमें कानपुर विश्व का सर्वाधिक प्रदूषित शहर है. हमारी इस दुरूह परिस्थिति के पीछे कारण यह है कि वायु प्रदूषण से भारी हानि आम जनता को होती है जबकि वायु प्रदूषण फैलाने से न्यून लाभ चुनिंदा व्यवसायियों को होता है. अत: व्यवसायी अपने न्यून लाभ के लिए वायु प्रदूषण का विस्तार करते हैं और भारी खामियाजा आम जनता भुगतती है. व्यवसायियों पर नकेल कसने में सरकार फेल है.

समस्या यह है कि वायु प्रदूषण नियंत्नण का खर्च व्यवसायी को वहन करना पड़ता है जबकि उसका लाभ आम आदमी को मिलता है. व्यवसायियों के स्वार्थ को हासिल करने के लिए सरकारें उन्हें वायु प्रदूषण नियंत्नण उपकरण लगाने को बाध्य नहीं करती हैं. लेकिन वास्तव में व्यवसायी द्वारा वहां किए गए खर्च का बोझ भी अंतत: आम आदमी पर ही पड़ता है. जैसे यदि ईंट के भट्टे पर वायु प्रदूषण नियंत्नण के उपकरण लगाए गए तो ईंट का दाम 8 रुपए से बढ़कर 10 रुपए हो जाएगा.

आम आदमी को वह ईंट 8 रुपए के स्थान पर 10 रुपए की खरीदनी पड़ेगी. इस प्रकार वायु प्रदूषण के लाभ और हानि दोनों ही आम आदमी पर पड़ते हैं. वायु प्रदूषण रोकने का लाभ आम आदमी को जीवन काल में वृद्धि के रूप में सीधे मिलता है. अत: लोगों को यह तय करना है कि वह महंगी ईंट खरीदेंगे अथवा लंबा जीवन चाहेंगे. यदि लंबा जीवन चाहिए तो महंगी ईंट खरीदना ही पड़ेगा.

 समस्या यह है कि जनता ईंट भट्टे व्यवसायी को प्रदूषण नियंत्नण उपकरण लगाने के लिए बाध्य नहीं कर सकती है. जनता के पास कोई अधिकार नहीं है कि वह व्यवसायी से कहे कि तुम हमसे ईंट का 2 रु पया अधिक ले लो लेकिन वायु प्रदूषण नियंत्नण उपकरण लगाओ. अंतत: यह कार्य सरकार को ही करना पड़ेगा. सरकार जनता के हित की रक्षक होती है. सरकार की जिम्मेदारी है कि जनता के हित में जो कार्य हो उसके अनुसार कानून बनाए और उसे लागू करे.

लेकिन सरकार के सामने प्रश्न यह रहता है कि प्रदूषण नियंत्नण उपकरण लगाने का सीधा बोझ व्यवसायी के ऊपर पड़ता है. इसलिए व्यवसायी का दबाव होता है कि सरकार उसे उपकरण लगाने पर मजबूर न करे; और दूसरी तरफ जनता का दबाव होता है कि सरकार नियंत्नण उपकरण लगवाए. सरकार इन दोनों दबाव के बीच में अपना रास्ता बनाती है. जब जनता का  दबाव अधिक होता है तो सरकार कानून बनाकर वायु प्रदूषण नियंत्नण यंत्न लगाने को व्यवसायियों को मजबूर करती है.

अत: अपने देश में वायु प्रदूषण की बुरी हालत इस बात को दर्शाती है कि सरकार पर व्यवसायियों का दबाव ज्यादा है और उनके दबाव में सरकार वायु प्रदूषण नियंत्नण उपकरण लगाने पर दबाव नहीं डाल रही है और जनता के जीवन काल को छोटा कर रही है.

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