गाजियाबाद टास्क बेस्ड कोरियन लव गेमः आत्महत्या की बढ़ती प्रवृत्ति पर कैसे लगे रोक?
By कृष्ण प्रताप सिंह | Updated: February 17, 2026 05:15 IST2026-02-17T05:15:14+5:302026-02-17T05:15:14+5:30
Ghaziabad Task Based Korean Love Game: बेंगलुरु से तीर्थयात्रा पर राजगीर (बिहार) गए एक ही परिवार के दो पुरुष व दो महिलाएं वहां की एक धर्मशाला में फंदे से लटक गए थे.

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Ghaziabad Task Based Korean Love Game: गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश) में टास्क बेस्ड कोरियन लव गेम की लत और पारिवारिक तनाव की शिकार तीन सगी अवयस्क बहनों द्वारा अपनी सोसाइटी की नौवीं मंजिल से कूदकर जान दे देने की घटना अभी भूली भी नहीं थी कि उसी प्रदेश में स्थित मथुरा के एक गांव में एक ही परिवार के पांच सदस्यों द्वारा सामूहिक आत्महत्या की विचलित कर देने वाली खबर सामने आ गई. इससे कुछ दिन पहले एक महिला व दो पुरुषों ने दिल्ली के पीरागढ़ी फ्लाईओवर के पास खड़ी एक कार में जहर खाकर सामूहिक आत्महत्या कर ली थी,
जबकि बेंगलुरु से तीर्थयात्रा पर राजगीर (बिहार) गए एक ही परिवार के दो पुरुष व दो महिलाएं वहां की एक धर्मशाला में फंदे से लटक गए थे. गुजरात में सूरत के लालगेट क्षेत्र में सऊदी अरब से लौटे एक मां-बाप के बेटे सहित जहर खाकर जान दे देने की हिलाकर रख देने वाली घटना इनके अतिरिक्त थी.
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के मुताबिक हमारे देश में हर चार मिनट से भी कम में अपनी जिंदगी या जीवनस्थितियों से हताश-निराश कोई न कोई व्यक्ति आत्महत्या कर लेता है. दिहाड़ी मजदूरों और किसानों द्वारा की जाने वाली आत्महत्याएं समस्या का दूसरा ही पहलू सामने लाती हैं.
कुल आत्महत्याओं में इनका एक चौथाई से ज्यादा हिस्सा बताता है कि बेरोजगारी और आर्थिक बदहाली से जन्मी निराशाएं इनका दूसरी निराशाओं से कहीं ज्यादा बड़ा कारण हैं. हम जिस सामाजिक ताने-बाने में रह रहे हैं, उसमें हत्याएं, (जो आत्महत्याओं की अपेक्षा बहुत कम होती हैं) रोकने या हत्यारों को दंड दिलाने के लिए तो कई कानून, प्रवर्तन एजेंसियां, जेल व न्यायालय हैं, लेकिन आत्महत्याओं के विरुद्ध कोई कारगर तंत्र बनाने पर विचार तक नहीं किया जाता. बस, साल में एक दिन आत्महत्या रोकथाम दिवस मनाकर अपना कर्तव्य समाप्त मान लिया जाता है.
इस कारण स्थिति यह है कि जो मानसिक अवसाद आत्महत्याओं का सबसे बड़ा कारक है, न हमारे समाज में उससे पीड़ितों के प्रति सहानुभूति का भाव है, न उनके उपचार के लिए कारगर चिकित्सा व्यवस्था. तिस पर अभी तक उन समूहों को ठीक से चिन्हित करने का काम भी पूरा नहीं हुआ है, जिनमें आत्महत्या की दर या अंदेशे अधिक होते हैं.
यों, किसे नहीं मालूम कि परीक्षाओं में नाकामी झेलने वाले छात्र, पारिवारिक तनाव से जूझते बुजुर्ग पुरुष व महिलाएं, जटिल परिस्थितियों में तनाव के बीच काम करने वाले सैन्य व अर्धसैनिक बलों के जवान और थोड़े से वेतन में जिंदगी को जैसे-तैसे घसीटते रहने को अभिशप्त बेरोजगारों वगैरह पर ही आत्महत्याओं का सबसे ज्यादा कहर टूटता है.
तिस पर अब मोबाइल पर खेले जाने वाले टास्क बेस्ड गेम भी आत्महत्याओं के लिए उकसाने लगे हैं और इस कारण ज्यादा चिंताजनक हैं कि उनका सबसे ज्यादा असर अवयस्कों यानी बच्चों पर टूटता है. लेकिन जब चिह्नित करने का काम ही पिछड़ा हुआ है तो यह कैसे होगा कि आत्महत्या की प्रवृत्ति से पीड़ित या उसका प्रयास करके बच जाने वाले वालों की देखभाल व पुनर्वास के काम को गम्भीरता से लिया जाए!