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योग का उद्भव नेपाल में हुआ, भारत में नहीं: ओली

By भाषा | Updated: June 23, 2021 15:46 IST

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(शिरीष बी प्रधान)

काठमांडू, 23 जून नेपाल के प्रधानमंत्री के पी शर्मा ने यह दावा कर एक और विवाद खड़ा कर दिया कि योग का उद्भव भारत में नहीं बल्कि उनके देश में हुआ था। हालांकि नेपाल के एक अग्रणी विशेषज्ञ इस विचार से सहमत नजर नहीं आते।

बालुवतार में प्रधानमंत्री आवास पर 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे ओली ने कहा कि जब ''दुनिया के इस हिस्से'' में योग का उद्भव हुआ तब भारत एक अलग देश के तौर पर अस्तित्व में भी नहीं आया था। उन्होंने कहा, ''योग विश्व के इस हिस्से में पैदा हुआ। इसका उद्भव उत्तराखंड से हुआ। विशेष रूप से, नेपाल योग का उद्गम स्थल है।''

ओली ने कहा कि लगभग 15 हजार साल पहले, शंभूनाथ या शिव ने योग प्रथाओं का प्रतिपादन किया था। बाद में, महर्षि पतंजलि ने योग के दर्शन को अधिक परिष्कृत व व्यवस्थित तरीके से विकसित किया। उन्होंने कहा, ''योग किसी धर्म विशेष या धार्मिक पंथ से संबंधित नहीं है।''

ओली ने कहा, “शिव ने पृथ्वी पर सबसे लंबे दिन में योग का अभ्यास शुरू किया, जो कि ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार 21 जून को पड़ता है। भारत के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने उसी दिन अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाने का प्रस्ताव रखा, जिसके लिए हम सभी को प्रसन्न होना चाहिए।''

उन्होंने दावा किया, ''वास्तव में योग की उत्पत्ति उत्तराखंड से हुई थी और उस समय उत्तराखंड वर्तमान भारत में नहीं था। भारत उस समय एक स्वतंत्र देश के रूप में पैदा भी नहीं हुआ था। सिर्फ योग ही नहीं, कपिल मुनि द्वारा प्रतिपादित सांख्य दर्शन भी हमारी धरती से ही उत्पन्न हुआ है।''

सांख्य भारतीय दर्शन की छह अस्तिका विद्याओं में से एक है। यह योग की सैद्धांतिक नींव तैयार करता है।

ओली ने कहा, ''आयुर्वेद का विकास करने वाले चरक ऋषि भी इसी भूमि में पैदा हुए थे।''

नेपाल के एक प्रमुख योग विशेषज्ञ योगाचार्य जीएन सरस्वती ने हालांकि कहा कि प्रधानमंत्री ओली का दावा पूर्ण सत्य पर आधारित नहीं है। उन्होंने कहा कि योग की उत्पत्ति भारतवर्ष में हिमालय क्षेत्र से हुई जिसमें भारत, नेपाल, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, तिब्बत, श्रीलंका, बांग्लादेश आदि शामिल थे। उन्होंने कहा, ''केवल लोकप्रियता के लिए, उचित अध्ययन के बिना ऐतिहासिक सत्य के बारे में नहीं बोलना चाहिए।''

ओली ने पिछले साल यह दावा करके विवाद खड़ा कर दिया था कि भगवान राम का जन्म नेपाल के चितवन जिले के मादी क्षेत्र या अयोध्यापुरी में हुआ था, न कि भारत के अयोध्या में। उन्होंने वहां भगवान राम, सीता, लक्ष्मण और अन्य के विशाल मंदिरों के निर्माण का भी आदेश दिया था।

ओली ने दावा किया था, “अयोध्यापुरी नेपाल में था। नेपाल में अयोध्यापुरी के पास बाल्मीकि आश्रम भी था। सीता की मृत्यु देवघाट में हुई, जो नेपाल में अयोध्यापुरी और बाल्मीकि आश्रम के पास है।''

नेपाल के विदेश मंत्रालय ने ओली के दावे के तुरंत बाद एक बयान जारी कर कहा था कि प्रधानमंत्री की टिप्पणी ''किसी भी राजनीतिक विषय से जुड़ी नहीं थी'' और किसी की भावना को ''आहत'' करने का कोई इरादा नहीं था।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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