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स्कूल में अंग्रेजी साहित्य से क्या लुप्त हो रही है - भावना

By भाषा | Updated: December 1, 2021 19:55 IST

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(मार्सेलो गिवानेली एवं मेगन मैंसवर्थ, अंग्रेजी भाषा और साहित्य, एस्टन विश्वविद्यालय)

बर्मिंघम (ब्रिटेन), एक दिसंबर (द कन्वरसेशन) फिक्शन पढ़ना एक भावनात्मक अनुभव है। भावनाएं महसूस करना-यहां तक कि उदासी जैसी नकारात्मक भावनाएं- पढ़ने को प्रेरित करती हैं और हमें पुस्तकों का आनंद उठाने में सहायता करती है। ब्रिटेन की चैरिटी संस्था नेशनल लिटरेसी ट्रस्ट के शोध में पाया गया है कि करीब 45 प्रतिशत लोगों ने कहा है कि पढ़ने के बाद उन्हें बेहतर महसूस हुआ।

पढ़ने के दौरान हम जो भावनाएं महसूस करते हैं वह हमें परानुभूति प्रदर्शित करने में मदद करती है, यह समझने में मदद करती है कि अन्य के भी विचार हैं जो हमें दूसरों की मदद के लिए प्रेरित करती है। पढ़ने का भावनात्मक अनुभव, व्यक्तिगत और सामाजिक, दोनों रूप से फायदेमंद है।

हालांकि, इंग्लैंड में अंग्रेजी साहित्य के पाठों में युवाओं के पढ़ाई के अनुभव में पढ़ने और भावना के बीच संबंध बड़े पैमाने पर लुप्त है।

एक अरूचिपूर्ण रुख :

जीसीएसई अंग्रेजी साहित्य पाठ्यक्रम की आलोचना पाठ्य पुस्तकों के इसके संकीर्ण चयन को लेकर की जाती है। बच्चों को पाठ याद करने पर ध्यान देना होता है,जो विषय को छात्रों को पढ़ने के अनुभव प्राप्त करने से दूर कर देता है।

इससे भी अधिक, अंग्रेजी साहित्य में परीक्षा के प्रश्न आमतौर पर अरूचिपूर्ण तरीके से तैयार किये जाते हैं। इस तरह के सवाल से छात्र पाठ में रुचि लिये बगैर लेखक के इरादे व शैली के बारे में सोचते हैं।

इस तरह से परीक्षा के प्रश्नों की तैयारी कराते समय शिक्षक अपने अध्यापन में भावनाओं को कम तवज्जो दे सकते हैं जो अंग्रेजी साहित्य के अध्ययन को व्यक्तिगत आनंद प्राप्त करने में बहुत अलग बना देगा।

अध्यापन और अंग्रेजी साहित्य के मूल्यांकन में भावनाओं से इस तरह से दूर हटना एक हालिया बदलाव है। 1921 में न्यूबोल्ट रिपोर्ट में, इंग्लैंड में अंग्रेजी अध्यापन की शैक्षणिक समीक्षा के लिए एक ऐतिहासिक पहल में दलील दी गई थी कि भावना साहित्य के अध्ययन के केंद्र में होना चाहिए।

इंग्लैंड में करीब 70 साल बाद भी अंग्रेजी साहित्य में प्रश्न भावना प्रेरित उत्तर मांग रहे थे।

शिक्षक क्या सोचते हैं :

हमारे हालिया अध्ययन में हमने साहित्य अध्यापन में भावनाओं पर शिक्षकों के विचारों का पूरे इंग्लैंड में यह पता लगाने के लिए अंग्रेजी के 140 शिक्षकों का सर्वेक्षण किया। हमने पाया कि वे छात्रों में भावनाएं पैदा करने को काफी महत्व देते हैं।

शिक्षक अपनी कक्षाओं में चर्चा के महत्व को बढ़ावा देने के भी भी इच्छुक नजर आए।

वहीं, कुछ शिक्षकों को लगता है कि मौजूदा मूल्यांकन प्रणाली ने पाठ के साथ व्यक्तिगत और भावनात्मक लगाव को बाधित किया है।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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