‘स्पीकर ऑफ द नेसेट मेडल’ से सम्मानित?, पीएम मोदी को इजरायली संसद के सर्वोच्च सम्मान से नवाजा

By सतीश कुमार सिंह | Updated: February 25, 2026 22:53 IST2026-02-25T22:46:27+5:302026-02-25T22:53:20+5:30

इज़रायल की संसद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को "स्पीकर ऑफ़ द नेसेट मेडल" से सम्मानित किया। यह नेसेट का सबसे बड़ा सम्मान है।

watch Knesset confers Speaker of the Knesset Medal Prime Minister narendra modi highest honour Israeli Parliament see video | ‘स्पीकर ऑफ द नेसेट मेडल’ से सम्मानित?, पीएम मोदी को इजरायली संसद के सर्वोच्च सम्मान से नवाजा

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Highlightsकोई भी चीज़ आतंकवाद को सही नहीं ठहरा सकती। ज़ीरो टॉलरेंस की नीति है, जिसमें कोई डबल स्टैंडर्ड नहीं है।गाज़ा पीस इनिशिएटिव, जिसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने मंज़ूरी दी थी, एक रास्ता दिखाता है।

यरुशलम: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को बुधवार को भारत और इजराइल के बीच रणनीतिक संबंधों को सुदृढ़ करने में उनके असाधारण योगदान के लिए ‘स्पीकर ऑफ द नेसेट मेडल’ से सम्मानित किया गया। भारतीय प्रधानमंत्री यह पदक पाने वाले पहले नेता हैं, जो इजराइली संसद ‘नेसेट’ का सर्वोच्च सम्मान है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को कहा कि इजरायल की तरह, भारत भी आतंकवाद को कतई बर्दाश्त नहीं करने की एक सुसंगत और अडिग नीति अपनाता है। इजरायल की संसद ‘नेसेट’ को संबोधित करते हुए कहा कि नागरिकों की हत्या और आतंकवाद को किसी भी तरह से जायज नहीं ठहराया जा सकता।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का बुधवार को इजरायल पहुंचने पर भव्य स्वागत किया गया। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और उनकी पत्नी सारा ने बेन गुरियन हवाई अड्डे पर मोदी की अगवानी की। बुधवार को एक "शानदार" बैठक की, जिसमें उन्होंने द्विपक्षीय संबंधों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कई मुद्दों और क्षेत्र में महत्वपूर्ण घटनाक्रमों पर चर्चा की। 

सामरिक रिश्तों को मज़बूत करने के लिए PM मोदी के असाधारण योगदान के सम्मान में दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि पिछले कुछ सालों से, भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली बड़ी इकॉनमी रहा है। जल्द ही, हम दुनिया की टॉप तीन इकॉनमी में शामिल होंगे। पिछले कुछ सालों में, भारत ने दूसरे देशों के साथ कई ज़रूरी ट्रेड एग्रीमेंट किए हैं।

हमारी टीमें एक बड़े फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर बातचीत के लिए कड़ी मेहनत कर रही हैं। यहूदी समुदाय भारत में बिना किसी ज़ुल्म या भेदभाव के रहते आए हैं। उन्होंने अपने धर्म को बचाए रखा है और समाज में पूरी तरह से हिस्सा लिया है। कोई भी वजह आम लोगों की हत्या को सही नहीं ठहरा सकती।

कोई भी चीज़ आतंकवाद को सही नहीं ठहरा सकती। भारत ने भी लंबे समय तक आतंकवाद का दर्द सहा है। हमें 26/11 के मुंबई हमले में इज़राइली नागरिकों समेत बेगुनाहों की जान जाने की याद है। आपकी तरह, हमारी भी आतंकवाद के लिए ज़ीरो टॉलरेंस की नीति है, जिसमें कोई डबल स्टैंडर्ड नहीं है।

गाज़ा पीस इनिशिएटिव, जिसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने मंज़ूरी दी थी, एक रास्ता दिखाता है। भारत ने इस पहल के लिए अपना पक्का समर्थन जताया है। हमारा मानना ​​है कि इसमें इस इलाके के सभी लोगों के लिए एक सही और टिकाऊ शांति का वादा है, जिसमें फ़िलिस्तीन मुद्दे को सुलझाना भी शामिल है। हमारी सभी कोशिशें समझदारी, हिम्मत और इंसानियत से चलें।

शांति का रास्ता हमेशा आसान नहीं होता, लेकिन भारत इस इलाके में बातचीत, शांति और स्थिरता के लिए आपके और दुनिया के साथ है। इस प्रतिष्ठित सदन के सामने खड़ा होना मेरे लिए सौभाग्य और सम्मान की बात है। मैं भारत के प्रधानमंत्री के तौर पर और एक पुरानी सभ्यता के प्रतिनिधि के तौर पर दूसरी सभ्यता को संबोधित करते हुए ऐसा कर रहा हूँ। मैं अपने साथ 140 करोड़ भारतीयों का अभिवादन और दोस्ती, सम्मान और साझेदारी का संदेश लाया हूँ

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