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एच1बी वीजा पर ट्रम्प ने चलाई कैंची, आवेदनों की मंजूरी में 10% की कटौती

By लोकमत समाचार ब्यूरो | Updated: June 6, 2019 03:32 IST

इस वीजा के जरिये अमेरिकी कंपनियों को उन क्षेत्रों में उच्च कुशल विदेशी पेशेवरों को नौकरी पर रखने की अनुमति मिलती है, जिनमें अमेरिकी पेशेवरों की कमी है.

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ठळक मुद्देभारत से सबसे ज्यादा होते हैं एच-1बी वीजा आवेदन इसके बाद चीन का नंबर आता है. वहां से तीन लाख आवेदन किए गए.

वाशिंगटन, 5 जूनः अमेरिका के वीजा कार्यक्र म पर ट्रम्प सरकार की सख्त नीतियों का असर दिखने लगा है. भारतीयों में लोकप्रिय एच1बी वीजा पर ट्रम्प ने कैंची चला दी है. 2017 की तुलना में बीते वर्ष 10% कम एच-1बी वीजा आवेदनों को मंजूरी दी गई. विशेषज्ञों के अनुसार, इस गिरावट के लिए सीधे तौर पर ट्रम्प सरकार की कठोर वीजा नीतियां जिम्मेदार हैं. वीजा मामलों को देखने वाले विभाग अमेरिकी सिटिजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेज (यूएससीआइएस) ने 2018 में तीन लाख 35 हजार एच-1बी वीजा आवेदनों को मंजूरी दी. इनमें नए और पुराने दोनों आवेदन शामिल थे.

यह आंकड़ा 2017 में स्वीकृत किए गए तीन लाख 73 हजार 400 वीजा से 10% कम था. विभाग की सालाना सांख्यिकी रिपोर्ट के अनुसार, एच1बी वीजा आवदेनों की मंजूरी की दर 2017 के 93% से कम होकर 2018 में 85% पर आ गई. स्थानीय मीडिया में माइग्रेशन पॉलिसी इंस्टीट्यूट की विश्लेषक सारा पीयर्स के हवाले से कहा गया है, ''मौजूदा प्रशासन एच-1बी वीजा के इस्तेमाल को कम करने के लिए लगातार आक्र ामक कदम उठा रहा है और इस प्रयास का असर आंकड़ों में दिख रहा है.''

क्या है एच-1बी वीजा

इस वीजा के जरिये अमेरिकी कंपनियों को उन क्षेत्रों में उच्च कुशल विदेशी पेशेवरों को नौकरी पर रखने की अनुमति मिलती है, जिनमें अमेरिकी पेशेवरों की कमी है. डोनाल्ड ट्रम्प के राष्ट्रपति बनने के बाद से ही इस पर लगाम कसी जा रही है. हर साल कुल 85 हजार एच-1बी वीजा जारी किए जाते हैं. यह वीजा तीन साल के लिए जारी होता है और छह साल तक इसकी अविध बढ़ाई जा सकती है.

भारत से सबसे ज्यादा होते हैं एच-1बी वीजा आवेदन

ट्रम्प प्रशासन ने एच1बी वीजा के आवेदन शुल्क को बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है. जुलाई 2017 में आई एक रिपोर्ट के मुताबिक, एच1बी वीजा के लिए सबसे ज्यादा भारतीय आवेदन करते हैं. इमिग्रेशन डिपार्टमेंट के अनुसार, 2007 से 2017 तक 22 लाख भारतीयों ने एच1बी वीजा के लिए आवेदन किया था. इसके बाद चीन का नंबर आता है. वहां से तीन लाख आवेदन किए गए.

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