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ट्रंप की गोली मारने की चेतावनी के बाद सोशल मीडिया पर नफरत भरे पोस्ट की बाढ़ आ गई थी

By भाषा | Updated: October 27, 2021 19:36 IST

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कोलंबस (अमेरिका) ,27 अक्टूबर (एपी) अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर जब यह चेतावनी दी थी कि मिनियापोलिस में लुटेरों को गोली मार दी जाएगी, तब फेसबुक पर पिछले साल 28 मई की रात नफरत भरे और हिंसक पोस्ट की बाढ़ आनी शुरू हो गई थी।

उल्लेखनीय है कि मिनियापोलिस पुलिस अधिकारी डेरेक चाउविन द्वारा 46 वर्षीय अश्वेत व्यक्ति जॉर्ज फ्लॉएड की गर्दन आठ मिनट से अधिक समय तक घुटनों से जमीन पर दबाये रखने के बाद उसकी मौत हो गई थी। राहगीरों द्वारा बनाया गया इस घटना का वीडियो लाखों बार ऑनलाइन देखा गया। मिनिसोटा के सबसे बड़े शहर में प्रदर्शन हुए और यह जल्द ही पूरे अमेरिका में फैल गए।

पूर्व राष्ट्रपति के सोशल मीडिया पोस्ट के आंतरिक कपंनी विश्लेषण के खुलासे के मुताबिक लेकिन यह तब तक नहीं फैला था जब तक कि ट्रंप ने इस सिलसिले में सोशल मीडिया पर पोस्ट नहीं डाली थी।

उन्होंने 28 मई को पूर्वाह्न नौ बज कर 53 मिनट पर अपने ट्विटर और फेसबुक पोस्ट में कहा था, ‘‘ये लुटेरे जार्ज फ्लॉएड का अपमान कर रहे हैं और मैं ऐसा नहीं होने दूंगा।’’ उन्होंने कहा था, ‘‘कोई समस्या आने पर हम उसे नियंत्रित कर लेंगे लेकिन जब लूटपाट शुरू होगी, तब गोलीबारी भी शुरू हो जाएगी।’’

ट्रंप के ट्विटर और फेसबुक अकाउंट तब बंद कर दिये गये थे।

फेसबुक के लीक दस्तावेजों से यह पता चलता है कि उनके सोशल मीडिया पोस्ट ने पहले से विभाजित देश में और अधिक गुस्सा भड़काया था।

फेसबुक के अपने आंतरिक विश्लेषण में यह अनुमान व्यक्त किया गया है कि करीब 90 प्रतिशत सच है कि ट्रंप के संदेश ने कंपनी के नियमों का उल्लंघन किया।

फिर भी, फेसबुक ने ट्रंप के संदेश के खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई नहीं की है।

वहीं, अगले दिन कुछ प्रदर्शनों ने हिंसक रूप ले लिया और इसने अमेरिका के लगभग हर छोटे -बड़े शहर को अपनी चपेट में ले लिया।

ओहायो स्टेट यूनिवसिर्टी में संचार विभाग के प्रोफेसर लैनर होल्ट ने कहा, ‘‘जब लोग फेसबुक द्वारा निभाई गई भूमिका पर गौर करेंगे तो वे नहीं कहेंगे कि फेसबुक के चलते ऐसा हुआ था, लेकिन फेसबुक निश्चित तौर पर इसका प्रसार करने वाला माध्यम था।’’

हालांकि, माइक्रोब्लॉगिंग साइट ट्विटर ने शीघ्रता से कदम उठाते हुए ट्रंप के ट्वीट को एक चेतावनी से ढंक दिया था और उपयोगकर्ताओं को इसे साझा करने से प्रतिबंधित कर दिया था।

फेसबुक की आंतरिक चर्चा से ‘सिक्युरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन’ को अवगत कराया गया है। फेसबुक के पूर्व कर्मचारी व व्हिसलब्लोअर फ्रांसेस हाउगेन के कानूनी सलाहकार द्वारा इसे अमेरिकी संसद को उपलब्ध कराया जाएगा।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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