लाइव न्यूज़ :

पाकिस्तान में बर्फबारी ने 50 साल के रिकॉर्ड तोड़ा, अब तक 111 लोगों की मौत

By भाषा | Updated: January 15, 2020 19:45 IST

'डॉन’ की खबर के मुताबिक, नीलम घाटी हिमस्खलन से सबसे ज्यादा प्रभावित हुई है। यहां कई घरों को नुकसान पहुंचा है और 66 लोगों की मौत हो गई है। नीलम घाटी के उपायुक्त रज़ा महमूद शाहिद को यह कहते हुए खबर में उद्धृत किया गया है कि कम से कम 84 मकान और 17 दुकानें पूरी तरह नष्ट हो गईं।

Open in App
ठळक मुद्दे94 घर और एक मस्जिद को आंशिक रूप से क्षति पहुंची है। बलूचिस्तान में 20 लोगों की मौत हो गई है। इसके अलावा सियालकोट और पंजाब के अन्य जिलों में पिछले कुछ दिनों में कम से कम सात लोगों की मौत हुई है।

पाकिस्तान और उसके कब्जे वाले कश्मीर व अन्य हिस्सों में बर्फीले तूफान, बर्फबारी से संबंधित घटनाओं की वजह से मरने वालों की संख्या बुधवार को बढ़कर 111 पहुंच गई।

इस बीच, सेना ने राहत कार्य तेज करने के साथ ही देश में खराब मौसम से प्रभावित लोगों की मानवीय आधार पर मदद भी तेज की है। जियो न्यूज की खबर के मुताबिक, पाक के कब्जे वाले कश्मीर की नीलम घाटी हिमस्खलन से सबसे ज्यादा प्रभावित हुई है। यहां सैंकड़ों इमारतों को नुकसान पहुंचा है और 73 लोगों की मौत हो गई है।

नीलम घाटी के उपायुक्त रज़ा महमूद शाहिद के मुताबिक शुरुआती आकलन के मुताबिक 52 घर पूरी तरह से बर्बाद हो गए हैं जबकि 82 अन्य मकानों को नुकसान पहुंचा है। जियो न्यूज की खबर के मुताबिक बलूचिस्तान में 31 लोगों की मौत हो गई है। इसके अलावा सियालकोट और पंजाब के अन्य जिलों में पिछले कुछ दिनों में कम से कम सात लोगों की मौत हुई है। एक्सप्रेस ट्रिब्यून की खबर के मुताबिक बलूचिस्तान प्रांतीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने कहा कि मौसम संबंधी घटनाओं में कम से कम 31 लोगों की जान गई है।

अखबार के मुताबिक शुक्रवार को फिर से बर्फबारी शुरू होने की उम्मीद है ऐसे में पाकिस्तान की सेना ने प्रभावित इलाके में नागरिक प्रशासन की मदद के लिये जवानों और हेलीकॉप्टरों को लगाया है। इसके अलावा रास्तों को खोलने और घाटी के दूर-दराज के इलाके में हेलीकॉप्टरों के जरिये राहत सामग्री भी गिराई जा रही है। बारिश संबंधी घटनाओं के कारण पाक अधिकृत कश्मीर, खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में प्रमुख सड़कें और राजमार्ग बंद हैं।

सरकारी पाकिस्तान टेलीविजन(पीटीवी) की खबर के मुताबिक, स्थिति पर चिंता जाहिर करते हुए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वह तत्काल प्रभावित लोगों को मानवीय सहायता पहुंचाएं। उन्होंने बुधवार को मुजफ्फराबाद में संयुक्त सैन्य अस्पताल का दौरा किया और हिमस्खलन में घायल हुए लोगों से मुलाकात की।

डान की खबर के मुताबिक दौरे के दौरान पीओके के मुख्य सचिव मतहर नियाज राणा ने उन्हें बर्फबारी और हिमस्खलन के कारण क्षेत्र में हुए नुकसान की जानकारी दी और चलाए जा रहे राहत अभियान के बारे में भी बताया। रेडियो पाकिस्तान की खबर के मुताबिक पाकिस्तानी सेना, नागरिक प्रशासन के साथ मिलकर नीलम घाटी में राहत और बचाव अभियान चला रही हैं।

मौसम कार्यालय ने स्वात, कोहिस्तान, संगला, बुनेर, मनशेरा, एबटाबाद, मुरी, गलवत, नीलम, बाग, हवेली, रावलाकोट, एस्टोर, हुंजा और स्कार्दू जिलों में भारी बर्फबारी के कारण अंतरशहरी सड़कों के बंद होने के खतरे को भी रेखांकित किया है। भारी बर्फबारी के कारण पाकिस्तान और अफगानिस्तान को जोड़ने वाले प्रमुख राजमार्ग भी बंद हैं। पाकिस्तान के सेना प्रमुख कमर जावेद बाजवा ने लोगों की मौत पर शोक व्यक्त किया।

टॅग्स :पाकिस्तानइमरान खानमौसम
Open in App

संबंधित खबरें

विश्वअफगानिस्तान में भारी बारिश, 77 लोगों की मौत, 137 लोग घायल और हजारों लोग विस्थापित, वीडियो

भारतपाकिस्तान के रक्षामंत्री ख्वाजा आसिफ के कोलकाता पर हमले की धमकी वाले बयान पर सोशल मीडिया पर 'धुरंधर' अंदाज़ में आई प्रतिक्रिया

विश्वकर्ज़ में डूबे पाकिस्तान के लिए भारी मुसीबत, यूएई ने इसी महीने 3.5 अरब डॉलर का लोन चुकाने को कहा

ज़रा हटकेपाकिस्तान की 80% आबादी समलैंगिक और 20% उभयलिंगी?, ट्रांसजेंडर कार्यकर्ता हिना बलोच का बयान, वायरल वीडियो

कारोबारपाकिस्तान में पेट्रोल की कीमत 458.40, केरोसिन दाम 457.80 और डीजल की कीमत 520.35 रुपये प्रति लीटर?

विश्व अधिक खबरें

विश्वसमय तेजी से बीत रहा और 48 घंटे बाद उन पर कहर टूट पड़ेगा?, ट्रंप ने कहा- होर्मुज जलडमरूमध्य को नहीं खोले तो?

विश्व5 दिन और न्यायिक हिरासत में रहेंगे पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक

विश्वUS-Israel-Iran War: ट्रंप का दावा- "तेहरान हमले में ईरानी सैन्य नेता ढेर", IDF ने हिज्बुल्लाह और ईरान के 200 से ज्यादा ठिकानों को बनाया निशाना

विश्ववैज्ञानिकों ने हमारे सौरमंडल के बाहर 45 पृथ्वी जैसे ग्रहों को खोज निकाला

विश्वअसल समस्या ट्रम्प हैं या दुनिया का दरोगा बनने की अमेरिकी मनोदशा?