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जर्मनी के भावी चांसलर शोल्ज ने यूरोपीय संघ को मजबूत करने की पैरवी की

By भाषा | Updated: December 7, 2021 19:14 IST

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बर्लिन, सात दिसंबर (एपी) जर्मनी के भावी चांसलर ओलाफ शोल्ज ने मंगलवार को कहा कि उनकी नयी सरकार मजबूत यूरोपीय संघ (ईयू) की पैरवी करेगी और ट्रांस-अटलांटिक गठबंधन को आगे बढ़ाएगी।

लंबे समय से चांसलर एंजेला मर्केल की जगह लेने जा रहे ओलाफ शोल्ज के नाम को बुधवार को मंजूरी दिए जाने से पहले देश के तीन दलों ने प्रगतिशील गठबंधन बनाने को लेकर एक समझौते पर हस्ताक्षर किए।

शोल्ज ने मर्केल की विदेश नीति को कायम रखने का संदेश देते हुए कहा कि वह अपने पहले विदेश दौरे पर फ्रांस जाएंगे। मर्केल के नेतृत्व वाली सरकार में शोल्ज वित्त मंत्री एवं वाइस चांसलर के पद पर रहे।

शोल्ज ने कहा कि नयी सरकार ‘‘मजबूत, संप्रभु यूरोपीय संघ बनाने के लिए हाल के वर्षों में जर्मनी द्वारा किए गए प्रयासों को जारी रखना चाहती है। शोल्ज ने बर्लिन में संवाददाताओं से कहा, ‘‘इसके साथ ही, हम ट्रांस-अटलांटिक साझेदारी और नाटो (उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन) में हमारे सहयोग को रेखांकित करेंगे।’’

फरवरी में बीजिंग में शीतकालीन ओलंपिक के आयोजन के बहिष्कार किए जाने के मुद्दे पर क्या जर्मनी अमेरिका का साथ देगा, इस बारे में शोल्ज ने सवालों का स्पष्ट जवाब नहीं दिया। शोल्ज ने माना कि जर्मनी का अमेरिका के साथ करीबी संबंध है लेकिन कहा कि ओलंपिक मुद्दे पर कदम उठाने के संबंध में अभी फैसला नहीं हुआ है।

शोल्ज की मध्य वाम पार्टी ‘सोशल डेमोक्रेट्स’, पर्यावरण के मुद्दों को उठाने वाली पार्टी ‘ग्रीन्स’ और कारोबार समर्थक ‘फ्री डेमोक्रेट्स’ के बीच हुए समझौते को तीन पार्टियों के सदस्यों से हाल के दिनों में मजबूत समर्थन मिला। समझौते से शोल्ज के संसद में बुधवार को चुने जाने का रास्ता साफ हो गया है क्योंकि तीनों दलों के पास ठोस बहुमत है। पहली बार सरकार बनाने के लिए तीनों दलों ने समझौता किया है।

नयी सरकार के लिए, खासकर ग्रीन्स पार्टी के लिए जलवायु परिवर्तन से निपटने को लेकर कदम उठाना शीर्ष प्राथमिकता है। अन्य प्राथमिकताओं में यूरोप की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था का आधुनिकीकरण और अधिक उदारवादी सामाजिक नीतियों की पेशकश करना शामिल है। इन सबसे ऊपर, सरकार को कोरोना वायरस संक्रमण की उच्च दर को कम करने के लिये तत्काल कदम उठाने की जरूरत होगी।

जर्मनी में सितंबर में हुए चुनाव से पहले कई मुद्दों पर वैचारिक मतभेद रखने वाले तीन दलों के बीच समझौता अपेक्षाकृत जल्दी और सौहार्दपूर्ण माहौल में हुआ है। जर्मनी की 16 साल से चांसलर मर्केल ने इस बार पद के लिए अपनी रुचि नहीं दिखाई। मर्केल का मध्य दक्षिणपंथी ‘यूनियन ब्लॉक’ चुनाव में हार के बाद विपक्ष की भूमिका में रहेगा।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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