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प्रधानमंत्री मोदी ने शेख मुजीबुर रहमान की पुत्रियों को गांधी शांति पुरस्कार दिया

By भाषा | Updated: March 26, 2021 19:20 IST

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ढाका, 26 मार्च भारत द्वारा बांग्लादेश के राष्ट्रपिता शेख मुजीबुर रहमान को दिया गया 2020 का गांधी शांति पुरस्कार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को उनकी बेटियों- प्रधानमंत्री शेख हसीना और उनकी छोटी बहन रेहाना-को प्रदान किया।

देश की आजादी की स्वर्ण जयंती और ‘बंगबंधु’ शेख मुजीबुर रहमान की जन्मशती पर आयोजित समारोह में हिस्सा लेने और अपनी समकक्ष हसीना से वार्ता के लिये मोदी बांग्लादेश के दो दिवसीय दौरे पर हैं।

ढाका के नेशनल परेड स्क्वायर पर 50 वें राष्ट्रीय दिवस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मुजीबुर रहमान को गांधी शांति पुरस्कार देना भारत के लिये सम्मान की बात है।

बांग्लादेश के राष्ट्रपिता को श्रद्धांजलि के तौर पर मोदी ने ‘मुजीब जैकेट’ पहन रखी थी और कहा कि बंगबंधु के नेतृत्व व बहादुरी ने यह सुनिश्चित किया कि कोई भी ताकत बांग्लादेश को गुलाम नहीं बना सकती।

मोदी ने कहा, “यह मेरे जीवन के सबसे यादगार दिनों में से एक है। मैं शुक्रगुजार हूं कि बांग्लादेश ने मुझे इस आयोजन में शामिल किया। मैं आभारी हूं कि बांग्लादेश ने भारत को इस कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिये आमंत्रित किया। यह हमारे लिये गर्व की बात है कि हमें शेख मुजीबुर रहमान को गांधी शांति पुरस्कार से सम्मानित करने का मौका मिला।”

उन्होंने पुरस्कार, एक प्रशस्ति-पत्र और एक फलक तथा शाल प्रधानमंत्री शेख हसीना की मौजूदगी में शेख रेहाना को प्रदान किया।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने ट्वीट किया, “हमारे उपमहाद्वीप के सबसे महान नेताओं में से एक। बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान को 2020 का गांधी शांति पुरस्कार दिया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गांधी शांति पुरस्कार प्रधानमंत्री शेख हसीना और शेख रेहाना को दिया।”

हसीना ने अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत सरकार को यह प्रतिष्ठित पुरस्कार उनके पिता को प्रदान करने के लिये आभार व्यक्त किया।

भारत सरकार ने महात्मा गांधी की 125वीं जयंती के मौके पर 1995 में वार्षिक गांधी शांति पुरस्कार देना शुरू किया था।

गांधी शांति पुरस्कार 2020 इस हफ्ते के शुरू में बंगबंधु को देने की घोषणा की गई थी। यह पहला मौका है जब किसी को मरणोपरांत यह परस्कार दिया गया है।

पुरस्कार के तहत एक करोड़ रुपये, प्रशस्ति पत्र, एक फलक और शॉल दी जाती है।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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