इंटरनेट से ईशनिंद संबंधी सामग्री हटवाने के लिए पाक अदालत में याचिका

By भाषा | Updated: December 29, 2020 22:28 IST2020-12-29T22:28:38+5:302020-12-29T22:28:38+5:30

Petition in Pak court to remove blasphemous material from internet | इंटरनेट से ईशनिंद संबंधी सामग्री हटवाने के लिए पाक अदालत में याचिका

इंटरनेट से ईशनिंद संबंधी सामग्री हटवाने के लिए पाक अदालत में याचिका

(एम जुल्करनैन)

लाहौर, 29 दिसंबर पाकिस्तान की एक उच्च अदालत से सरकार को यह निर्देश देने का अनुरोध किया गया है कि वह गूगल पर मौजूद अल्पसंख्यक अहमदिया समुदाय के नेता का नाम "इस्लाम के खलीफा" के तौर पर से हटवाए।

पाकिस्तान टेलीकम्यूनिकेशन अथॉरिटी (पीटीए) इस बाबत पहले ही गूगल इंक और विकिपीडिया को नोटिस जारी कर चुकी है।

लाहौर उच्च न्यायालय में यह याचिका वकील अजहर हसीब ने दायर की है। उन्होंने अदालत को बताया कि अहमदिया समुदाय के नेता मिर्जा मसरूर अहमद का नाम "इस्लाम के मौजूदा खलीफा" के तौर पर और कुरान का "असत्यापित संस्करण" गूगल पर अपलोड किया गया है।

उन्होंने उच्च न्यायालय से सरकार को यह निर्देश देने की फरियाद की कि वह "इस्लाम के तथाकथित खलीफा" का नाम हटवाने के लिए गूगल और इंटरनेट के अन्य मंचों के समक्ष यह मामला उठाए।

लाहौर उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायधीश मोहम्मद कासिम खान ने संघीय विधि अधिकारी से पूछा कि क्या संघीय जांच एजेंसी (एफआईए) के पास गूगल जैसे सर्च इंजन के खिलाफ मामला दर्ज करने के अधिकार हैं ?

न्यायमूर्ति खान ने विधि अधिकारी से यह भी पूछा कि एफआईए उस शख्स या संस्था के खिलाफ क्या कार्रवाई कर सकती है जो देश के बाहर से इंटरनेट पर ईशनिंदा संबंधी सामग्री का प्रचार कर रहा हो।

विधि अधिकारी ने अदालत को बताया कि एफआईए इंटरनेट पर मौजूद किसी भी आपत्तिजनक और ईशनिंदा संबंधी सामग्री पर कार्रवाई करने के लिए जिम्मेदार है।

इसके बाद अदालत ने विधि अधिकारी को इस बिंदु पर सहायता करने का निर्देश दिया कि अगर ईशनिंदा संबंधी सामग्री को नहीं हटाया जाता है तो क्या एफआईए गूगल के खिलाफ मामला दर्ज कर सकती है ?

उधर, पीटीए ने कहा कि अहमदिया नेता द्वारा खुद को "इस्लाम का खलीफा" बताना और कुरान का "असत्यापित संस्करण" इंटरनेट पर डालना गंभीर मामला है और इससे तत्काल निपटा जाना चाहिए।

जब पीटीआई ने अहमदिया समुदाय के एक प्रतिष्ठित सदस्य से संपर्क किया तो उन्होंने कहा कि उनके लिए इस वक्त, इस पर टिप्पणी करना मुमकिन नहीं है।

गौरतलब है कि पाकिस्तान की संसद ने 1974 में अहमदिया समुदाय को गैर मुस्लिम घोषित कर दिया था। एक दशक के बाद, उनपर खुद को मुस्लिम बताने पर भी रोक लगा दी गई थी।

पाकिस्तान की 22 करोड़ आबादी में से करीब एक करोड़ गैर मुस्लिम हैं।

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Web Title: Petition in Pak court to remove blasphemous material from internet

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