पार्किंसन रोग : हमारे पास अब तक निदान नहीं, लेकिन उपचार के तरीके तलाशने में लंबा वक्त लगा

By भाषा | Updated: June 5, 2021 16:19 IST2021-06-05T16:19:53+5:302021-06-05T16:19:53+5:30

Parkinson's disease: We don't have a diagnosis yet, but it took a long time to find treatment methods | पार्किंसन रोग : हमारे पास अब तक निदान नहीं, लेकिन उपचार के तरीके तलाशने में लंबा वक्त लगा

पार्किंसन रोग : हमारे पास अब तक निदान नहीं, लेकिन उपचार के तरीके तलाशने में लंबा वक्त लगा

(क्रिस्टलीना एंटोनियड्स, ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय, बास्तियान ब्लोम, रेडबौड विश्वविद्यालय और सलिल पटेल, ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय)

ऑक्सफोर्ड/निजमेजेन, पांच जून (द कन्वर्सेशन) : ब्रिटिश प्रसारक जेरेमी पैक्समैन ने खुलासा किया है कि वह दुनिया के उन एक करोड़ लोगों में शुमार हैं जो पार्किंसन रोग के साथ जीवन जी रहे हैं। उपचार और निदान तथा रोग के मामलों के संबंध में यह बेहद तेजी से फैलने वाली तंत्रिका संबंधी स्थिति है जो शारीरिक अक्षमता और मृत्यु का कारण बनती है।

हालांकि अब तक इस रोग का कोई निदान नहीं ढूंढा जा सका है। करीब 200 वर्ष पूर्व जब सबसे पहले इस रोग का पता चला तब से अब तक इसके उपचार की विधि तलाशने में लंबा समय लग गया है।

पार्किंसन से ग्रस्त लोगों में रासायनिक डोपामाइन नहीं होता है क्योंकि शरीर में इसका निर्माण करने वाली कुछ तंत्रिका कोशिकाएं मृत हो जाती हैं।

डोपामाइन एक न्यूरोट्रांसमीटर है जो मस्तिष्क और शरीर में कई महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह शरीर की गतिविधि में समन्वय के लिए मस्तिष्क के कुछ हिस्से को संदेश भेजने में मदद करता है।

पार्किंसन के प्रबंधन को उस मेज के रूप में समझा जा सकता है जो चार पांव पर टिकी रहती है।

ऐसी दवाएं हैं जो लापता डोपामाइन को हटा देती हैं या इसके प्रभाव को कम कर देती हैं। इसके निदान के लिए मरीज के मस्तिष्क की सर्जरी, उसकी अलग-अलग तरीके से देखभाल की जरूरत होती है। इसमें मरीज तथा उसके परिवार को रोग की सारी जानकारी होनी चाहिए।

पार्किंसन मस्तिष्क के एक हिस्से में तंत्रिकाओं के बिगड़ने से होता है जिसे बेसल गैंग्लिया कहते हैं। बेसल गैंग्लिया नाभिकीय तंत्रिकाओं का समूह है जो सेरेब्रल कॉर्टेक्स (मस्तिष्क की बाहरी परत) के गहरे नीचे में होता है।

डोपामाइन की कमी के कारण शरीर में कंपकंपी, अंगों में कठोरपन, अंग और गति का सामान्य रूप से धीमा हो जाना जैसे विकार आ जाते हैं।

पार्किंसन का इतिहास :

पार्किंसन रोग को सबसे पहले 1817 में जेम्स पार्किंसन ने ‘शेकिंग पालसी’ का नाम दिया। इसके करीब 50 साल बाद 1872 में पेरिस के तंत्रिका रोग विशेषज्ञ जीन मार्टिन शैरकॉट ने इसे पार्किंसन रोग नाम दिया।

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Web Title: Parkinson's disease: We don't have a diagnosis yet, but it took a long time to find treatment methods

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