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ईद के मौके पर पाकिस्तान का निकला 'दिवाला', भारतीय रुपये के मुकाबले आधी हुई करेंसी

By कोमल बड़ोदेकर | Updated: June 14, 2018 11:20 IST

ईद का त्यौहार नजदीक है ऐसे में जहां लोग खरीदारी और जश्न के माहौल में हैं वहीं भारत के पड़ौसी मुल्क पाकिस्तान की चिंता सातवें आसमान पर पहुंच गई है और इसका कारण है उसकी कमजोर होती आर्थिक स्थिति।

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इस्लामाबाद, 14 जून। ईद का त्यौहार नजदीक है ऐसे में जहां लोग खरीदारी और जश्न के माहौल में हैं वहीं भारत के पड़ौसी मुल्क पाकिस्तान की चिंता सातवें आसमान पर पहुंच गई है और इसका कारण है उसकी कमजोर होती आर्थिक स्थिति। बीते कुछ समय से पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था लगातार नीचे गिर रही है। इसके साथ उस पर कर्ज का दबाव भी तेजी से बढ़ रहा है। पाकिस्तान की खराब आर्थिक स्थित का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उसकी करेंसी की कीमत भारती रूपये के मुकाबले आधी रह गई है।

मंगलवार को जारी हुए आंकडों पर गौर करें तो एक ओर जहां भारतीय रुपये की कीमत डॉलर के मुकाबले 67 रुपये है वहीं अमेरिकी डॉलर के मुकाबले पाकिस्तानी रुपये की कीमत अब 122 रुपये पर पहुंच गई है। जबकि सोमवार को आई रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तानी रुपये की कीमत करीब 3.8 फीसदी तक गिर गई थी। 

पाकिस्तान में अगले महीने होने वाले आम चुनाव लचर होती आर्थिक स्थिति चुनावों में बड़ा मुद्दा बन सकती है। जानकारों की माने तो पाकिस्तान चुनाव के बाद अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) से एक बार फिर कर्ज मांग सकता है। वहीं आर्थिक विशेषज्ञों ने पाकिस्तान में भुगतान संतुलन संकट की आशंका जताई है। 

इस मामले में कार्यवाहक वित्त मंत्री शमशाद अख्तर ने कहा कि, ‘हमें 25 अरब डॉलर के अपने व्यापार घाटे के अंतर को हमारे भंडार के जरिए पाटना होगा और कोई विकल्प नहीं है। हमारी सरकार के सामने यह सबसे बड़ी चिंता है।

गौरतलब है कि हाल ही में आई एक रिपोर्ट में बताया गया था कि पाकिस्तान के पास अब 10.3 अरब डॉलर का ही विदेशी मुद्रा भंडार है, जो पिछले साल मई में 16.4 अरब डॉलर था। वहीं समाचार एजेंसी रॉयटर्स की माने तो पाकिस्तान का चीन और इसके बैंकों से इस वित्तीय वर्ष में लिया गया कर्ज करीब 5 बिलियन डॉलर तक पहुंचने की कगार पर है।

वहीं पाकिस्तान के प्रमुख अखबार डॉन के मुताबिक, पाकिस्तान भुगतान संकट के चलते चीन से 1-2 बिलियन डॉलर (68- 135 अरब रुपए) का नया लोन ले सकता है। पाकिस्तान से चीन द्वारा लोन लेने की यह स्थिति दर्शाती है कि पाकिस्तान बीजिंग पर आर्थिक तौर पर किस तरह से निर्भर हो चुका है।

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