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कीटों की कम होती संख्या को बांधों से जोड़ते हैं नये साक्ष्य

By भाषा | Updated: June 17, 2021 14:15 IST

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लिआम एन नैश, पारिस्थितिकी पीएचडी शोधकर्ता, क्वीन मैरी यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन

लंदन, 17 जून (द कन्वरसेशन) कीड़े ग्रह पर जीवों का सबसे बड़ा समूह हैं और एक अनुमान के अनुसार इनकी कुल 55 लाख प्रजातियां हैं, जिनमें से 80 प्रतिशत की खोज किया जाना अभी बाकी है। चिंता की बात यह है कि मानव गतिविधियों के कारण दुनिया भर में कीड़ों की संख्या में भारी गिरावट दर्ज की जा रही है।

एक पारिस्थितिकी तंत्र में कीड़े लगभग हर वह भूमिका निभाते हैं जिसकी कल्पना की जा सकती है, जिसमें फसलों को परागित करना, छोटे कीटों को नियंत्रण में रखना और अन्य जानवरों के लिए भोजन के रूप में कार्य करना शामिल है। उनकी गिरावट के संभावित परिणाम इतने भयानक हैं कि इसे ‘कीट सर्वनाश’ करार दिया गया है।

इस आसन्न पर्यावरणीय आपदा पर विचार करें तो एक अधिक जटिल तस्वीर सामने आती है, जो इस समस्या के प्रति हमारी समझ स्पष्ट करती है।

उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में पृथ्वी के अनुमानित 85 प्रतिशत कीटों के आवास के बावजूद, इन क्षेत्रों में क्या हो रहा है, इसका गंभीर अध्ययन किया गया है।

कीट गिरावट को समझने के लिए हमारे नए अध्ययन में, हम उपोष्णकटिबंधीय मीठे पानी के कीड़ों के सबसे व्यापक ज्ञात डेटासेट में से एक प्रस्तुत करते हैं, जो २० वर्षों में जुटाया गया है। अध्ययन में हमने तमाम तरह के जलीय कीट समूहों में कीटों की संख्या में व्यापक गिरावट दर्ज की।

यह गिरावट दक्षिण अमेरिका में मीठे पानी की सबसे बड़ी प्रणाली, पराना नदी के बाढ़ के मैदान में चैनलों, झीलों, नदियों और बैकवाटर में दर्ज की गई। इसके साथ ही, हमने पाया कि आक्रामक मछलियों की संख्या में वृद्धि हुई और जल रसायन प्रणाली असंतुलित हो गई - इन सभी पर्यावरणीय परिवर्तनों को बांधों के निर्माण से जोड़ा गया।

पराना और उसकी सहायक नदियों पर 130 से अधिक बांध हैं। सबसे महत्वपूर्ण इताइपू है, जो दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा जलविद्युत संयंत्र है। ब्राजील और पराग्वे में स्थित, इसका जलाशय इतना बड़ा है कि इसने भरते ही पृथ्वी के सबसे बड़े झरनों में से एक, गुआरा फॉल्स को जलमग्न कर दिया।

निचली और ऊपरी पराना नदी के बीच इस तरह के प्राकृतिक भौगोलिक अवरोध को हटाने से बड़े पैमाने पर मछलियों के आक्रमण हुए: जिनमें से कई कीड़ों की शिकारी हैं।

साथ ही, बांध तलछट और पोषक तत्वों के प्रवाह को अवरुद्ध करते हैं, जल रसायन को बाधित करते हैं और पानी को अधिक पारदर्शी बनाते हैं। अधिकांश जलीय कीट गहरे रंग के होते हैं या गंदे पानी में छलावरण के लिए धब्बेदार होते हैं। बढ़ी हुई पानी की पारदर्शिता ने उनकी छिपने की क्षमता को कमजोर कर दिया, जिससे वे हमलावर मछलियों द्वारा खाए जाने के लिए और भी कमजोर हो गए।

ब्राजील की बिजली का लगभग 70 प्रतिशत जल विद्युत से आता है, और जलविद्युत बांध जीवाश्म ईंधन से निर्भरता हटाने के लिए आवश्यक होंगे। फिर भी, बांधों के गंभीर पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभाव हो सकते हैं। हमारे अध्ययन से पता चलता है कि बांधों के नकारात्मक परिणाम जंगलों में बाढ़ आने और स्थानीय समुदायों के विस्थापित होने के काफी बाद तक हो सकते हैं।

उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्र सबसे अधिक जैव विविधता वाले क्षेत्र होने के बावजूद सबसे अधिक खतरे में हैं। उनके प्रचुर प्राकृतिक संसाधन ग्रह की सबसे तेजी से बढ़ती मानव आबादी और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में से कुछ के लिए भोजन, पानी और ऊर्जा प्रदान करने के लिए अत्यधिक दबाव में हैं।

उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय जलीय कीड़े अधिक उत्तरी क्षेत्रों में अपने समकक्षों की तुलना में मानव गतिविधियों के कारण अधिक जोखिम में हो सकते हैं। मीठे पानी के क्षेत्र दुनिया के सबसे खतरनाक पारिस्थितिक तंत्रों में से हैं, और वैश्विक संरक्षण प्रयासों में इनपर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।

दुनिया के कुछ हिस्सों में जलीय कीट संरक्षण की सफलताओं का जश्न मनाया जाना चाहिए - लेकिन अन्य स्थानों की चुनौतियों को छिपाए बिना। उष्णकटिबंधीय कीड़ों पर भले ही कम अध्ययन किया गया है, लेकिन यह कम महत्वपूर्ण नहीं हैं।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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