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नेपाल में संकटः सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी की अहम बैठक, प्रधानमंत्री ओली अनुपस्थित, राजनीतिक पेंच फंसा, पलटे ‘प्रचंड’

By भाषा | Updated: July 21, 2020 17:47 IST

ओली और प्रचंड को अपने मतभेदों को दूर करने के लिये अधिक वक्त दिये जाने को लेकर पार्टी की स्थायी समिति की अहम बैठक सात बार टाली जा चुकी थी। स्थायी समिति के सदस्य एवं एनसीपी के वरिष्ठ नेता गणेश शाह ने बताया कि प्रधानमंत्री ओली बैठक में शामिल नहीं हुए।

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ठळक मुद्देबैठक दो घंटे के लिए स्थगित की गई क्योंकि दोनों नेताओं ने अहम मुद्दों के हल के लिये अनौपचारिक चर्चा करने की खातिर कुछ मांगा।स्थायी समिति की बैठक काठमांडू के बालूवतार में प्रधानमंत्री के आवास पर दोपहर करीब एक बज कर 20 मिनट पर शुरू हुई। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के बीच सत्ता साझेदारी समझौते के हल में एक अहम भूमिका निभाएगी।

काठमांडूः नेपाल के प्रधानमंत्री के. पी. शर्मा ओली और सत्तारूढ़ नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एनसीपी) के कार्यकारी अध्यक्ष पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’ के नेतृत्व वाले पार्टी के प्रतिद्वंद्वी गुट के बीच मंगलवार की बहुप्रतीक्षित बैठक मतभेदों को दूर करने में नाकाम रही।

दरअसल, प्रधानमंत्री की अनुपस्थिति में हुई बैठक में राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा नहीं हुई। पार्टी की स्थायी समिति के सदस्य एवं एनसीपी के वरिष्ठ नेता गणेश शाह ने बताया कि राजधानी काठमांडू के बालूवतार में प्रधानमंत्री के आवास पर समिति की बैठक हुई, लेकिन इसमें राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा नहीं हुई।

उन्होंने बताया कि 45 सदस्यीय स्थायी समिति की बैठक में प्रधानमंत्री ओली शामिल नहीं हुए। पार्टी की शीर्ष इकाई की अगली बैठक एक सप्ताह बाद होगी। इससे पहले, ओली और प्रचंड को अपने मतभेदों को दूर करने के लिये अधिक वक्त दिये जाने को लेकर पार्टी की स्थायी समिति की अहम बैठक सात बार टाली जा चुकी थी। मंगलवार की बैठक भी दो घंटे के लिए स्थगित करनी पड़ी क्योंकि प्रधानमंत्री ओली ने सत्ता साझेदारी के अहम मुद्दों का हल करने के लिये प्रचंडी के साथ बैठक की।

बैठक में मुख्य रूप से देश में आई प्राकृतिक आपदाओं पर चर्चा की गई

शहा ने बताया कि बैठक में मुख्य रूप से देश में आई प्राकृतिक आपदाओं पर चर्चा की गई। स्थायी समिति की अगली बैठक 28 जुलाई को पूर्वाह्न 11 बजे बालूवतार में करने का निर्णय लिया गया है, जिसमें पार्टी की गतिविधियों, सरकार के कामकाज, पार्टी कैडर एवं नेताओं के बीच काम के बंटवारे को अंतिम रूप देना और प्रस्तावित आम सभा सहित अन्य मुद्दों की समीक्षा की जाएगी। शाह ने बताया कि पार्टी के अंदरूनी कलह को दूर करने के लिये स्थायी समिति की बैठक से पहले वरिष्ठ नेताओं के बीच अनौपचारिक बैठकें हो सकती हैं।

देश के विभिन्न हिस्सों में लगातार बारिश के कारण आई बाढ़ एवं भूस्खलन में जानमाल को हुई क्षति पर बैठक में पार्टी के सदस्यों ने चिंता प्रकट की। उन्होंने सरकार से त्वरित गति से राहत करने का अनुरोध किया। पार्टी प्रवक्ता नारायण काजी श्रेष्ठ ने कहा, ‘‘आज के लिये एकमात्र एजेंडा यह था कि पार्टी सदस्यों को प्राकृतिक आपदाओं के प्रति प्रतिक्रिया का निर्देश दिया जाए। ’’ श्रेष्ठ ने बताया, ‘‘बैठक में बाढ़ एवं भूस्खलन में मरने वाले लेागों के प्रति भी संवेदना प्रकट की गई और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की गई। ’’

श्रेष्ठ के हवाले से काठमांडू पोस्ट अखबार ने बताया कि पार्टी के सदस्यों को राहत एवं बचाव कार्य में शामिल होने का निर्देश का एक प्रस्ताव पेश किया गया क्योंकि बाढ़ एवं भूस्खलन में 223 लोगों की मौत हो गई है, करीब 100 लोग लापता हो गये हैं। पार्टी की 45 सदस्यीय शक्तिशाली स्थायी समिति की बैठक सबसे पहले 24 जून को बुलाई गई थी, जिसके पहले प्रधानमंत्री ओली ने आरोप लगाया था कि कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा, तीन भारतीय क्षेत्रों को देश के नए राजनीतिक नक्शे में शामिल करने के बाद उन्हें सत्ता से बाहर करने के लिए पार्टी के कुछ नेता दक्षिणी पड़ोसी देश के साथ मिल गए हैं।

प्रचंड के नेतृत्व वाले गुट ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि वे लोग इस्तीफा मांग रहे हैं, न कि भारत मांग रहा है। उन्होंने ओली को अपने आरोप के समर्थन में सबूत दिखाने को भी कहा। पूर्व प्रधानमंत्री ‘प्रचंड’ समेत एनसीपी के शीर्ष नेताओं ने प्रधानमंत्री ओली के इस्तीफे की मांग की है। उनका कहना है कि ओली की हालिया भारत विरोधी टिप्पणी ‘न तो राजनीतिक रूप से सही थी और न ही कूटनीतिक रूप से उपयुक्त थी।’ प्रचंड ने सोमवार को कहा था कि पार्टी के अंदर मतभेदों को दूर करने की कोशिशें जारी हैं।

देव गुरूंग ने मीडिया से कहा कि बैठक प्रधानमंत्री ओली की सहमति से शुरू हई थी

पार्टी के वरिष्ठ नेता देव गुरूंग ने मीडिया से कहा कि बैठक प्रधानमंत्री ओली की सहमति से शुरू हई थी, लेकिन वह इसमें शामिल नहीं हुए। बैठक में पार्टी की 441 सदस्यीय केंद्रीय समिति की तारीख भी निर्धारित किये जाने की संभावना है, यह पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के बीच सत्ता साझेदारी समझौते के हल में एक अहम भूमिका निभाएगी।

स्थायीय समिति में 45 सदस्य हैं। इसकी बैठक में प्रधानमंत्री ओली के राजनीतिक भविष्य के बारे में फैसला होने की उम्मीद है। वह प्रचंड नीत असंतुष्ट समूह द्वारा शीर्ष पद छोड़ने के लिये अत्यधिक दबाव का सामना कर रहे हैं।

पार्टी की 45 सदस्यीय शक्तिशाली स्थायी समिति की बैठक सबसे पहले 24 जून को बुलाई गई थी, जिसके पहले प्रधानमंत्री ओली ने आरोप लगाया था कि कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा, तीन भारतीय क्षेत्रों को देश के नए राजनीतिक नक्शे में शामिल करने के बाद उन्हें सत्ता से बाहर करने के लिए पार्टी के कुछ नेता दक्षिणी पड़ोसी देश के साथ मिल गए हैं।

प्रचंड के नेतृत्व वाले गुट ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि वे लोग इस्तीफा मांग रहे हैं, न कि भारत मांग रहा है। उन्होंने ओली को अपने आरोप के समर्थन में सबूत दिखाने को भी कहा। पूर्व प्रधानमंत्री ‘प्रचंड’ समेत एनसीपी के शीर्ष नेताओं ने प्रधानमंत्री ओली के इस्तीफे की मांग की है। उनका कहना है कि ओली की हालिया भारत विरोधी टिप्पणी ‘न तो राजनीतिक रूप से सही थी और न ही कूटनीतिक रूप से उपयुक्त थी।’ प्रचंड ने सोमवार को कहा था कि पार्टी के अंदर मतभेदों को दूर करने की कोशिशें जारी हैं। 

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