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मॉडर्ना ने अपने टीके को कोरोना वायरस के खिलाफ 94.5 प्रतिशत प्रभावी बताया

By भाषा | Updated: November 16, 2020 22:04 IST

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(योषिता सिंह)

न्यूयॉर्क, 16 नवंबर अमेरिका की जैवप्रौद्योगिकी कंपनी मॉडर्ना ने सोमवार को घोषणा की कि प्राणघातक कोरोना वायरस के खिलाफ उसके द्वारा तैयार टीका बीमारी को रोकने में 94.5 प्रतिशत तक प्रभावी प्रतीत होता है। इससे महामारी से जूझ रही दुनिया के लिए उम्मीद की किरण दिखाई दी है।

मैसाच्युसेट्स के कैम्ब्रिज स्थित मॉडर्ना की घोषणा फाइजर और बायोनटेक की घोषणा के करीब एक हफ्ते बाद आई है जिसके मुताबिक उसके द्वारा विकसित कोविड-19 का संभावित टीका परीक्षण के दौरान 90 प्रतिशत तक प्रभावी पाया गया है।

मॉडर्ना ने बयान में कहा,‘‘ तीसरे चरण में एमआरएनए-1273 (टीके का नाम) के अध्ययन के लिए गठित...स्वतंत्र, एनआईएच द्वारा नियुक्त डॉटा सेफ्टी मॉनिटरिंग बोर्ड (डीएसएमबी) ने कंपनी को सूचित किया है कि उसका संभावित टीका प्रभाव के अध्ययन में निर्धारित अर्हता को पूरा करता है और टीका 94.4 प्रतिशत प्रभावी प्रतीत होता है।’’

कंपनी ने कहा कि ‘कोव’ नाम से किए गए अध्ययन के तहत अमेरिका में 30,000 प्रतिभागी पंजीकृत हैं।

मॉडर्ना के मुख्य कार्यकारी अधिकारी स्टीफन बैनसेल ने कहा, ‘‘ यह कोविड-19 का टीका विकसित करने के हमारे प्रयास में अहम क्षण है। जनवरी के शुरुआत से ही हम इस वायरस का पीछा कर रहे थे ताकि पूरी दुनिया में यथा संभव लोगों को बचाया जा सके। हम जानते थे कि इस महामारी में हर दिन अहम है। तीसरे चरण के अध्ययन के सकारात्मक विश्लेषण ने हमें चिकित्सकीय मान्यता दी कि हमारा टीका कोविड-19 बीमारी को रोक सकता हैं।’’

अंतरिम सुरक्षा और प्रभाव संबंधी आंकड़ों के आधार पर मॉडर्ना की मंशा आने वाले हफ्ते में अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्राधिकरण (यूएसएफडीए) के समक्ष इस दवा के लिए आपात इस्तेमाल अनुमति (ईयूए)हेतु आवेदन करने की है।

बैनसल ने कहा कि कंपनी अमेरिका में नियामक से टीके के आपात इस्तेमाल अनुमति के लिए आवेदन कर अगले ‘मील के पत्थर’ को हासिल करना चाहती है।

उन्होंने कहा कि इसके साथ ही हम कोव अध्ययन के तहत टीके से सुरक्षा और प्रभाव संबंधी आंकड़ों को एकत्र करना जारी रखेंगे।

कंपनी को उम्मीद है कि वर्ष 2020 के अंत तक वह अमेरिका में टीके की दो करोड़ खुराक तैयार कर लेगी। कंपनी की योजना वर्ष 2021 में 50 करोड़ से एक अरब खुराक का उत्पादन करने की है।

कंपनी ने कहा, ‘‘ अंतरिम विश्लेषण 95 स्वयंसेवकों पर आधारित है जिनमें 11 गंभीर मामले शामिल है। इनमें 15 वयस्कों की उम्र 65 साल से अधिक थी जबकि 20 प्रतिभागी विभिन्न नस्लीय पृष्ठभूमि (12 हिस्पैनिक या लातिन,चार काले या अफ्रीकी अमेरिकी, तीन एशियाई अमेरिकी और एक बहु नस्लीय) के थे।

अध्ययन के दौरान स्वयंसेवकों में मध्यम दर्जे का दुष्प्रभाव जैसे टीका लगाने के स्थान पर दर्द, चक्कर आना, सिरदर्द और टीके लगने के स्थान पर त्वचा लाल हो जाना, देखने को मिला। हालांकि, ये लक्ष्ण थोड़े समय के लिए रहे।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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