लद्दाख सीमा विवाद: सैन्य कमांडरों में बातचीत के बाद चीन ने LAC पर बढ़ाया हेलिकॉप्टर ऑपरेशन, भारतीय इलाकों की निगरानी की जा रही
By अनुराग आनंद | Updated: June 8, 2020 17:15 IST2020-06-08T17:07:23+5:302020-06-08T17:15:38+5:30
भारत और चीन के बीच सैन्य कमांडरों की 6 जून को हुई मुलाकात के मजह दो दिन बाद ये घटना घटी है।

सांकेतिक तस्वीर (File Photo)
नई दिल्ली: भारत और चीन के बीच पूर्वी लद्दाख में हुए सीमा विवाद पर कुटनीतिक व सैन्य स्तर पर बातचीत जारी है। इस बीच आज (सोमवार) एक बार फिर से चीन के हेलिकॉप्टर ने एलएसी से सटे क्षेत्रों में उड़ान भरी है।
टीओआई के मुताबिक, दोनों देशों के सैन्य कमांडरों की 6 जून को हुई मुलाकात के मजह दो दिन बाद ये घटना घटी है। सैन्य कमांडरों ने पूर्वी लद्दाख में जारी तनाव को कम करने के लिए बातचीत की थी। लेकिन, इस बातचीत के बाद से ही बॉर्डर पर चीन का आक्रमक रूप देखने को मिल रहा है।
यही नहीं सूत्रों से मिल रही जानकारी के मुताबिक, पिछले एक सप्ताह से चीनी वायु सेना की गतिविधियां तेज हो गई हैं। सीमा के पास के विवादित क्षेत्रों में लगातार चीन के हेलिकॉप्टर नजर आ रहे हैं। यह संभव है कि बॉर्डर पर तैनात चीनी सेना को जरूरी समान पहुंचाने के लिए चीनी हेलिकॉप्टर उड़ान भर रहे हों। लेकिन, मिल रही जानकारी के मुताबिक, चीनी सेना के मिग-17 और लोकल मीडियम चोपर ने उड़ान भरी है।
गलवान घाटी में भारतीय क्षेत्र के ऊपर से भरी उड़ान-
सूत्रों ने बताया कि पूर्वी लद्दाख में दोनों सेनाओं के बीच टकराव और तनाव की स्थिति के बीच चीन के हेलिकॉप्टर कई बार भारतीय इलाकों में भी नजर आए। ये गलवान घाटी में भारतीय कंस्ट्रक्शन साइट के ऊपर भी उड़ान भरते देखे गए थे।
चीन और भारत के बीच सीमा को लेकर क्या विवाद है?
भारत और चीन के बीच 3,488 किलोमीटर लंबी एलएसी पर विवाद है। चीन अरुणाचल प्रदेश पर दावा करता है और इसे दक्षिणी तिब्बत का हिस्सा बताता है। वहीं, भारत इसे अपना अभिन्न अंग करार देता है। दोनों पक्ष कहते रहे हैं कि सीमा विवाद के अंतिम समाधान तक सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति एवं स्थिरता कायम रखना जरूरी है।
क्या है भारत और चीन के बीच लद्दाख में ताजा विवाद
बता दें कि चीन द्वारा पैंगोंग सो इलाके के फिंगर क्षेत्र में भारत द्वारा एक महत्वपूर्ण सड़क निर्माण का तीखा विरोध मौजूदा गतिरोध के शुरू होने की वजह है। इसके अलावा चीन द्वारा गलवान घाटी में दरबुक-शायोग-दौलत बेग ओल्डी मार्ग को जोड़ने वाली एक सड़क के निर्माण के विरोध को लेकर भी गतिरोध है। पैंगोंग सो में फिंगर क्षेत्र में सड़क को भारतीय जवानों के गश्त करने के लिहाज से अहम माना जाता है। भारत ने पहले ही तय कर लिया है कि चीनी विरोध की वजह से वह पूर्वी लद्दाख में अपनी सीमावर्ती आधारभूत परियोजनाओं को नहीं रोकेगा।
लद्दाख में वास्तवित नियंत्रण रेखा (LAC) से सटे कुछ क्षेत्रों में चीन के साथ बीते 5 मई से तनाव की स्थिति कायम है। पांच मई को पूर्वी लद्दाख के पैंगोंग सो क्षेत्र में लगभग 250 भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच लोहे की छड़ों और डंडों के साथ झड़प हुई थी। इसमें दोनों तरफ के कई सैनिक घायल हो गए थे। इसके बाद चीनी सैनिक 9 मई को सिक्किम के नाकू ला में भी भारतीय सैनिक के साथ उलझ गए थे। उस झड़प में दोनों ओर से करीब 10 सैनिकों को चोटें आई थीं।
विवाद शुरू होने के बाद सीमा पर दो पक्षों ने बढ़ाई जवानों की तैनाती
सैनिकों की झड़प के बाद दोनों पक्षों ने लद्दाख में जवानों की तैनाती बढ़ा दी है। उपग्रह से ली गई तस्वीरों में नजर आ रहा है कि चीन ने वास्तविक नियंत्रण रेखा के अपनी तरफ के क्षेत्र में सैन्य आधारभूत ढांचे में महत्वपूर्ण रूप से इजाफा किया है, जिसमें पैंगोंग सो इलाके से 180 किलोमीटर दूर सैन्य हवाईअड्डे का उन्नयन भी शामिल है। चीनी सेना एलएसी के निकट अपने पीछे के सैन्य अड्डों पर रणनीतिक रूप से जरूरी चीजों का भंडारण कर रही है, जिनमें तोप, युद्धक वाहनों और भारी सैन्य उपकरणों आदि को वहां पहुंचाना शामिल है।
चीन ने उत्तरी सिक्किम और उत्तराखंड में वास्तविक नियंत्रण रेखा से लगे कुछ क्षेत्रों में भी अपनी उपस्थिति बढ़ायी है, जिसके बाद भारत भी अतिरिक्त सैनिकों को भेजकर अपनी उपस्थिति बढ़ा रहा है।
