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‘यह दिल दुखाने वाला है’: अफ़्रीका महाद्वीप के लोगों को तत्काल टीके की जरूरत

By भाषा | Updated: June 9, 2021 13:36 IST

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(गेराल्ड इमरे)

केपटाउन, नौ जून (एपी) कोविड-19 महामारी पर नियंत्रण पाने के लिए देशों द्वारा अपने नागरिकों को टीका लगाए जाने के मामले में अफ्रीका दुर्भाग्यपूर्ण तरीके से पीछे चल रहा है।

विश्व स्तर पर कोविड-19 संबंधी आंकड़ा जुटाने वाला जॉन्स हॉपकिन्स विश्वविद्यालय के अनुसार अफ्रीका महाद्वीप में सबसे मजबूत अर्थव्यवस्था वाला और कोविड-19 महामारी से बेहद प्रभावित देश दक्षिण अफ्रीका में अब तक कुल आबादी में से 0.8 फीसदी लोगों को ही टीके लगे हैं। इस देश के हजारों स्वास्थ्यकर्मी अब भी टीका लगने की अपनी बारी का इंतज़ार कर रहे हैं।

वहीं 20 करोड़ आबादी वाले अफ़्रीका के सबसे बड़े देश नाइजीरिया में सिर्फ 0.1 फीसदी लोगों को टीके लगे हैं जबकि पांच करोड़ आबादी वाले केन्या में तो यह आंकड़ा इससे भी कम है। यूगांडा को तो ग्रामीण इलाकों से टीके वापस मंगवाने पड़ गए क्योंकि उसके पास बड़े शहरों में ही संक्रमण से निपटने के लिए टीके नहीं हैं।

अफ्रीका बीमारी नियंत्रण व बचाव केंद्र (सीडीसी) ने बताया कि चाड में तो पिछले सप्ताह तक किसी भी व्यक्ति को टीका ही नहीं लगा था। वहीं इस महाद्वीप के कम से कम पांच देश ऐसे हैं, जहां अब तक किसी भी व्यक्ति को टीके की खुराक नहीं दी गई है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने पिछले सप्ताह कहा था कि 130 करोड़ की आबादी वाला यह महाद्वीप ऐसे समय में टीके की गंभीर कमी का सामना कर रहा है जब यहां महामारी की नई लहर लोगों को बेहद प्रभावित कर रही है। अफ़्रीका में टीके की खेप की आपूर्ति ‘लगभग रूक’ गई है।

अफ़्रीका सीडीसी निदेशक डॉक्टर जॉन निकेंगसॉन्ग ने कहा कि यह बेहद चिंता और ग़ुस्से वाली बात है।

वहीं अफ्रीका की तुलना में अमेरिका और ब्रिटेन की बात की जाए तो संक्रमण से ज़्यादा ख़तरे का सामना करने वाले वयस्क और बुजुर्गों समेत 40 प्रतिशत से ज़्यादा आबादी को टीके लगा चुकी है। वहीं यूरोप में 20 प्रतिशत या उससे ज़्यादा की आबादी को टीके की खुराक देने वाले देशों के नागरिक गर्मी की छुट्टियाँ मनाने के बारे में सोच पा रहे हैं।

यहां तक कि अमेरिका, फ़्रांस और जर्मनी में कोविड-19 से कम ख़तरे का सामना कर रहे युवाओं को भी टीके की खुराक दी जा रही है

उन्होंने एक साक्षात्कार में जी-7 की बैठक में इस सप्ताह धनी देशों के नेताओं से अपील की है कि वह बचे हुए टीकों की खुराक को साझा करें और ‘नैतिक तबाही’ का भार अपने कंधे पर न लें।

दक्षिण अफ्रीका की मानवाधिकार वकील फातिमा हसन ने कहा, ‘‘ लोग मर रहे हैं और समय का पहिया हमारे विपरित चल रहा है। यह बेहद दिल दुखाने वाल है।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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