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भारतीय-अमेरिकियों के बढ़ते प्रभाव पर आधारित किताब कमला हैरिस से है प्रेरित

By भाषा | Updated: July 13, 2021 17:30 IST

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वाशिंगटन, 13 जुलाई अमेरिका की उपराष्ट्रपति के रूप में कमला हैरिस के ऐतिहासिक चयन और देश में छोटे किंतु शक्तिशाली भारतीय समुदाय के उदय को दर्शाने के लिए प्रभावशाली भारतीय-अमेरिकियों, विद्वानों, राजनयिकों एवं उद्यमियों ने एक किताब में अपने विचार एवं अनुभव साझा किए हैं।

उद्यमों में निवेश करने वाले जाने-माने भारतीय-अमेरिकी पूंजीपति एम आर रंगास्वामी ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘कमला हैरिस के उपराष्ट्रपति बनने की गाथा लोक सेवा, संघर्ष, कड़ी मेहनत और प्रवासी भारतीयों के सफल होने की क्षमता की कहानी है।’’

‘कमला हैरिस एंड द राइज ऑफ इंडियन अमेरिकन्स’ (कमला हैरिस और भारतीय अमेरिकियों का उदय) के लेखकों में शामिल रंगास्वामी ने कहा कि भारतीय-अमेरिकी समुदाय का कई क्षेत्रों में गहरा प्रभाव है। उन्होंने कहा, ‘‘शिक्षा से लेकर तकनीक तक, व्यवसाय से लेकर चिकित्सा तक, आतिथ्य से लेकर सरकार तक हम अमेरिका में और विश्व स्तर पर उद्योगों को सक्रिय रूप से आकार दे रहे हैं। विशेष रूप से पिछले एक दशक में राजनीतिक शक्ति के तौर पर हमारा उदय अविश्वसनीय रहा है।’’

56 वर्षीय हैरिस उपराष्ट्रपति चुनी जाने वाली पहली महिला, पहली अश्वेत अमेरिकी और पहली दक्षिण एशियाई अमेरिकी हैं।

हैरिस के माता-पिता प्रवासी थे। उनके पिता डोनाल्ड हैरिस जमैका से थे और उनकी मां श्यामला गोपालन चेन्नई की रहने वाली एक कैंसर शोधकर्ता और नागरिक अधिकार कार्यकर्ता थीं।

भारतीय-अमेरिकियों की संख्या 40 लाख से अधिक है, जिनमें से 18 लाख से अधिक के पास मताधिकार है।

इस पुस्तक को भारतीय संपादक तरुण बासु ने संपादित किया है। इस किताब में 16 लेखों के जरिए भारतीय-अमेरिकी समुदाय के विकास की कहानियों को बताया गया है। अमेरिका में भारत के पूर्व राजदूत अरुण के सिंह, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं सांसद शशि थरूर और सेवानिवृत्त भारतीय दूत टी पी श्रीनिवासन ने इस पुस्तक में अपने विचार साझा किए हैं। इनके अलावा ‘इंडिया अब्रॉड’ के पूर्व संपादक अजीज हनीफा, यूसी सैन डिएगो के चांसलर प्रदीप के खोसला, प्रथम यूएसए के अध्यक्ष दीपक राज, ‘बैटर्ड विमेन्स जस्टिस प्रोजेक्ट’ के लिए मुख्य रणनीति अधिकारी सुजाता वारियर, मानवी की सह-संस्थापक शमिता दास दासगुप्ता, ग्लोबल प्रेस की मुख्य परिचालन अधिकारी लक्ष्मी पार्थसारथी, विद्वान एवं प्रोफेसर मैना चावला सिंह और अनुभवी पत्रकार मयंक छाया, अरुण कुमार एवं सुमन गुहा मजूमदार इसके लेखकों में शामिल हैं।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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