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अमेरिका में भारतीय मूल के लोगों की आबादी सात वर्षों में 38 प्रतिशत तक बढ़ी

By भाषा | Updated: June 18, 2019 12:51 IST

साल 2010 के बाद से नेपाली समुदाय में 206.6 प्रतिशत, भारतीय समुदाय में 38 प्रतिशत, भूटानी नागरिकों में 38 प्रतिशत, पाकिस्तानियों में 33 प्रतिशत, बांग्लादेशी नागरिकों में 26 प्रतिशत और श्रीलंकाई आबादी में 15 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

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ठळक मुद्देरिपोर्ट के अनुसार, एशियाई अमेरिकी नागरिकों की आय में असमानता सबसे अधिक है।अमेरिका में रह रहे तकरीबन 50 लाख दक्षिण एशियाई नागरिकों में करीब एक फीसदी गरीबी में जी रहे हैं। 

अमेरिका में भारतीय मूल के लोगों की आबादी साल 2010 से 2017 के बीच सात वर्षों में 38 प्रतिशत तक बढ़ गई। दक्षिण एशियाई पैराकार समूह दक्षिण एशियन अमेरिकन्स लीडिंग टूगेदर (साल्ट) ने अपने स्नैपशॉट में कहा कि कम से कम 630,000 भारतीय हैं जिनका दस्तावेजों में रिकॉर्ड नहीं है।

यह 2010 के बाद 72 प्रतिशत वृद्धि है। उसने कहा कि अवैध भारतीय-अमेरिकी लोगों की वृद्धि वीजा अवधि के बाद भी यहां रह रहे भारतीय प्रवासियों की वजह से हो सकती है। उसने कहा कि साल 2016 में करीब 250,000 भारतीय अपनी वीजा अवधि समाप्त होने के बाद भी यहां रुके हुए थे।

सामान्य तौर पर दक्षिण एशियाई मूल के अमेरिकी निवासियों की आबादी 40 प्रतिशत तक बढ़ी है। सही मायनों में यह 2010 में 35 लाख से बढ़कर 2017 में 54 लाख हो गई। साल 2010 के बाद से नेपाली समुदाय में 206.6 प्रतिशत, भारतीय समुदाय में 38 प्रतिशत, भूटानी नागरिकों में 38 प्रतिशत, पाकिस्तानियों में 33 प्रतिशत, बांग्लादेशी नागरिकों में 26 प्रतिशत और श्रीलंकाई आबादी में 15 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, एशियाई अमेरिकी नागरिकों की आय में असमानता सबसे अधिक है। अमेरिका में रह रहे तकरीबन 50 लाख दक्षिण एशियाई नागरिकों में करीब एक फीसदी गरीबी में जी रहे हैं। 

लाखों अवैध शरणार्थियों को बाहर निकालना शुरू करेगा अमेरिका : ट्रंप

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को कहा कि अमेरिका अगले सप्ताह से ‘‘लाखों’’ अवैध शरणार्थियों को बाहर निकालना शुरू करेगा। ट्रंप ने आव्रजन एवं सीमा शुल्क प्रवर्तन एजेंसी का जिक्र करते हुए टि्वटर पर कहा, ‘‘अगले सप्ताह आईसीई लाखों अवैध विदेशियों को बाहर निकलाने की प्रक्रिया शुरू करेगा जो गैरकानूनी तरीके से अमेरिका में घुसे थे।

जितनी जल्दी वे घुसे थे उतनी ही फुर्ती से उन्हें हटा दिया जाएगा।’’ उन्होंने साथ ही कहा कि ग्वाटेमाला ‘सेफ थर्ड’ समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए तैयार है। इस समझौते के तहत ग्वाटेमाला क्षेत्र में प्रवेश कर रहे शरणार्थियों को शरणार्थी का दर्जा पाने के लिए वहां आवेदन करना होगा ना कि अमेरिका में।

अमेरिका में ग्वाटेमाला और अन्य मध्य अमेरिकी देशों से काफी संख्या में शरणार्थी आ रहे हैं। ये देश गिरोहों की हिंसा के शिकार हैं। ट्रंप ने अवैध शरणार्थियों के खिलाफ लड़ाई को अपने प्रशासन का मुख्य केंद्र बिंदु बनाया है। 

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