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हांगकांग चुनाव : चीन समर्थक प्रत्याशियों को मिली भारी जीत

By भाषा | Updated: December 20, 2021 21:22 IST

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हांगकांग, 20 दिसंबर (एपी) हांगकांग की विधायिका के लिए हुए चुनाव में चीन समर्थक प्रत्याशियों ने भारी जीत दर्ज की है। उन्होंने बीजिंग की ओर से स्वायत्त क्षेत्र के निर्वाचन कानून में बदलाव के बाद हुए पहले चुनाव में मध्यमार्गी और निर्दलीय प्रत्याशियों को करारी मात दी है।

चीन ने यह सुनिश्चित करने के लिए कानून पारित किया था कि केवल बीजिंग के प्रति निष्ठा रखने वाले लोग ही शहर का प्रशासन संभालें। इसके बाद रविवार को हुए पहले चुनाव में बीजिंग के विश्वासपात्र उम्मीदवारों ने अधिकतर सीट पर जीत दर्ज की है।

हांगकांग की नेता और चीन समर्थक कैरी लैम ने सोमवार को संवाददाता सम्मेलन में कहा कि वह 30.2 प्रतिशत मतदान होने के बावजूद ‘संतुष्ट’ हैं।

उल्लेखनीय है कि वर्ष 1997 में ब्रिटेन ने हांगकांग को चीन को सौंपा था और इसके बाद से यह सबसे कम मतदान प्रतिशत है।

कैरी लैम ने कहा कि पंजीकरण कराने वाले मतदाताओं की संख्या 92.5 प्रतिशत थी जो वर्ष 2012 और 2016 के चुनाव के मुकाबले अधिक है, तब केवल 70 प्रतिशत मतदाताओं का पंजीकरण हुआ था।

उल्लेखनीय है कि नए कानून के तहत विधायिका के लिए प्रत्यक्ष निर्वाचित सदस्यों की संख्या 35 से घटाकर 20 कर दी गई है, जबकि कुल सदस्यों की संख्या में वृद्धि की गई और अब 70 के बजाय 90 सदस्यीय परिषद है। इनमें से अधिकतर सदस्यों की नियुक्ति चीन समर्थक निकाय करते हैं, और यह सुनिश्चित किया जाता है कि उनका विधायिका में बहुमत हो।

हालांकि, विपक्षी खेमे ने चुनाव की आलोचना की है। सबसे बड़े लोकंतत्र समर्थक दल डेमोक्रेटिक पार्टी ने 1997 के बाद पहली बार अपने एक भी उम्मीदवार को चुनावी मैदान में नहीं उतारा।

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियान ने कहा कि मतदान प्रतिशत कम रहने के कई कारण रहे।

झाओ ने प्रेस वार्ता के दौरान कहा, '' इसकी वजह केवल महामारी नहीं है, बल्कि हांगकांग में चीन विरोधी ताकतों की तरफ से पैदा की गई बाधा और बाहरी शक्तियां भी जिम्मेदार हैं।''

इस बीच, अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन द्वारा जारी एक संयुक्त बयान में ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, कनाडा, न्यूजीलैंड और अमेरिका के विदेश मंत्रियों ने हांगकांग की चुनावी प्रणाली के लोकतांत्रिक तत्वों के क्षरण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर बढ़ते प्रतिबंधों पर गंभीर चिंता व्यक्त की।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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