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जी-7 के नेता टीका, चीन और बहुराष्ट्रीय कंपनियों के न्यूनतम कर को लेकर सहमत

By भाषा | Updated: June 13, 2021 20:42 IST

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कार्बिस बे (इंग्लैंड), 13 जून (एपी) दुनिया के अमीर देशों के नेताओं ने गरीब देशों को कोविड-19 रोधी टीके की एक अरब से ज्यादा खुराकें मुहैया कराने का संकल्प लिया है। इसके साथ ही उन्होंने बहुराष्ट्रीय कंपनियों पर वैश्विक न्यूनतम कर का समर्थन किया और सहमति जतायी कि वे चीन की बाजार विरोधी आर्थिक नीतियों से मुकाबला के लिए साथ मिलकर काम करेंगे और बीजिंग से शिनजियांग और हांगकांग में मानवाधिकारों का सम्मान करने के लिए कहेंगे।

दक्षिण-पश्चिम इंग्लैंड में रविवार को जी-7 के शिखर सम्मेलन के समापन पर ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने कहा कि देशों को सीधे तौर पर और अंतरराष्ट्रीय ‘कोवैक्स’ पहल, दोनों तरीके से टीकों की आपूर्ति की जाएगी। इस प्रतिबद्धता के बावजूद विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने कहा है कि दुनिया की कम से कम 70 प्रतिशत आबादी के टीकाकरण और महामारी को समाप्त करने के लिए और 11 अरब और खुराकों की जरूरत है।

विभिन्न देशों के वित्त मंत्रियों द्वारा कर से बचने का प्रयास कर रही बहुराष्ट्रीय कंपनियों पर कम से कम 15 प्रतिशत वैश्विक कर लगाने को लेकर चर्चा के बाद न्यूनतम कॉरपोरेट कर को लेकर भी जी-7 में व्यापक विचार-विमर्श हुआ। अमेरिका ने न्यूनतम कर की पैरवी की और राष्ट्रपति जो बाइडन का मानना है कि एक साथ काम करते हुए यह सम्मेलन ज्यादा उचित वैश्विक अर्थव्यवस्था का समर्थन कर सकता है। समूह द्वारा रविवार को जारी एक विज्ञप्ति में कहा गया, ‘‘चीन के संबंध में और प्रतिस्पर्धा के लिए हम वैश्विक अर्थव्यवस्था के निष्पक्ष और पारदर्शी व्यवस्था को कमजोर करने वाली बाजार विरोधी नीतियों और प्रथाओं को चुनौती देने के लिए सामूहिक दृष्टिकोण पर परामर्श करना जारी रखेंगे।’’

नेताओं ने कहा कि वे चीन से शिनजियांग और हांगकांग में मानवाधिकारों और मौलिक आजादी का सम्मान करने के लिए कहेंगे। चीन पर आरोप है कि शिनजियांग में अल्पसंख्यक उईगुर के अधिकारों का वह हनन कर रहा है। सम्मेलन की मेजबानी करने वाले जॉनसन ने कहा कि दुनिया के बाकी हिस्सों में लोकतंत्र और मानवाधिकारों के मूल्य को प्रदर्शित करने और दुनिया के गरीब देशों को टिकाऊ विकास के लिए जी-7 नेताओं के बीच "शानदार सद्भाव" है। जी-7 के देशों में कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, अमेरिका और ब्रिटेन हैं।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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