वेनेजुएला की तरह ग्रीनलैंड पर कार्रवाई नहीं कर पाएंगे ट्रंप, सुरक्षा के लिए पहुंची यूरोपीय सेनाएं
By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: January 16, 2026 09:57 IST2026-01-16T09:56:39+5:302026-01-16T09:57:39+5:30
Greenland vs Trump: हालांकि, व्हाइट हाउस की प्रवक्ता कैरोलिन लेविट ने बृहस्पतिवार को कहा कि इसका अमेरिकी राष्ट्रपति के निर्णय लेने या ग्रीनलैंड हासिल करने के लक्ष्य पर कोई असर नहीं पड़ा।

वेनेजुएला की तरह ग्रीनलैंड पर कार्रवाई नहीं कर पाएंगे ट्रंप, सुरक्षा के लिए पहुंची यूरोपीय सेनाएं
Greenland vs Trump: डेनमार्क, ग्रीनलैंड और अमेरिका के प्रतिनिधियों के बीच हुई बातचीत में ग्रीनलैंड के भविष्य को लेकर ‘‘बुनियादी असहमति’’ उजागर होने के मध्य, कई यूरोपीय देशों के सैनिक डेनमार्क के समर्थन में आर्कटिक द्वीप पहुंच रहे हैं। यह असहमति बृहस्पतिवार को तब और स्पष्ट हो गई, जब ‘व्हाइट हाउस’ (अमेरिका के राष्ट्रपति का आधिकारिक आवास एवं कार्यालय) ने डेनमार्क एवं ग्रीनलैंड के अधिकारियों के साथ और बातचीत की योजनाओं को ग्रीनलैंड को अमेरिका द्वारा हासिल करने के लिए ‘‘अधिग्रहण समझौते पर तकनीकी वार्ता’’ बताया।
यह डेनमार्क के विदेश मंत्री लार्स लोके रासमुसेन के उस बयान से काफी अलग था, जिसमें उन्होंने इसे ऐसा कार्य समूह बताया था जो देशों के बीच मतभेदों को सुलझाने के तरीकों पर चर्चा करेगा। बुधवार को वार्ता शुरू होने से पहले डेनमार्क ने घोषणा की थी कि वह ग्रीनलैंड में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाएगा। फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन, नॉर्वे, स्वीडन और नीदरलैंड सहित कई यूरोपीय साझेदारों ने प्रतीकात्मक संख्या में सैनिक भेजना शुरू कर दिया या अगले कुछ दिनों में ऐसा करने का वादा किया।
सैनिकों की यह तैनाती यूरोपीय एकजुटता दिखाने और ट्रंप को यह संदेश देने के लिए है कि ग्रीनलैंड पर अमेरिकी कब्जा जरूरी नहीं है क्योंकि उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) मिलकर उस आर्कटिक क्षेत्र की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकता है जिसमें रूस और चीन की बढ़ती दिलचस्पी देखी जा रही है। हालांकि, व्हाइट हाउस की प्रवक्ता कैरोलिन लेविट ने बृहस्पतिवार को कहा कि इसका अमेरिकी राष्ट्रपति के निर्णय लेने या ग्रीनलैंड हासिल करने के लक्ष्य पर कोई असर नहीं पड़ा।
उन्होंने कहा, ‘‘राष्ट्रपति ने अपनी प्राथमिकता काफी स्पष्ट कर दी है। वह चाहते हैं कि अमेरिका ग्रीनलैंड हासिल करे। वह मानते हैं कि ऐसा करना हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा के सर्वोत्तम हित में है।’’ रासमुसेन ने ग्रीनलैंड के अपने समकक्ष विवियन मोट्सफेल्ट की मौजूदगी में बुधवार को कहा कि अमेरिका के उपराष्ट्रपति जे डी वेंस और अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ ‘व्हाइट हाउस’ में बैठक के बाद भी ग्रीनलैंड को लेकर ‘‘मौलिक असहमति’’ बनी हुई है।
रासमुसेन ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा था, ‘‘ हमने एक उच्च स्तरीय कार्य समूह बनाने का फैसला किया है ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या हम आगे बढ़ने का एक साझा रास्ता खोज सकते हैं।’’ मंत्री ने कहा था कि कार्यकारी समूह की पहली बैठक कुछ ही हफ्तों में होगी। इस बीच, फ्रांस और जर्मनी ने ग्रीनलैंड में अपने सैनिक भेजने की घोषणा की। डेनमार्क के प्रसारक ‘डीआर’ के अनुसार, डेनमार्क के रक्षा मंत्री ट्रोएल्स लुंड पाउल्सेन ने बृहस्पतिवार को कहा कि कई नाटो देशों के सैनिक बारी-बारी से ग्रीनलैंड में रहेंगे।
European troops arrive in Greenland as talks with U.S. highlight ‘disagreement’ over island’s futurehttps://t.co/0ITlTkeqAopic.twitter.com/bJIsCKRwNq
— The Washington Times (@WashTimes) January 16, 2026