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चीन की प्रौद्योगिकी कंपनी हुवावेई पर नकेल, ट्रंप प्रशासन की नई पाबंदी, 38 इकाइयों को निगरानी सूची में डाला

By भाषा | Updated: August 18, 2020 18:14 IST

चीन ने अमेरिका पर वैश्विक व्यापार को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया है। अमेरिका की हुवावेई पर नई पाबंदी लगाये जाने के बाद उसने यह बात कही। चीन ने मंगलवार को यह भी कहा कि वह चीनी कंपनियों के संरक्षण के लिये जरूरी कदम उठाएगा।

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ठळक मुद्देडोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को फॉक्स न्यूज से कहा, ‘‘हम अमेरिका में उनके उपकरण नहीं चाहते क्योंकि वे हमारी जासूसी करते हैं...कोई भी देश जो इसका उपयोग करता है, हम खुफिया जानकारी साझा करने के संदर्भ में कुछ भी नहीं करेंगे।नया नियम जारी किया जिसके जरिये यह सुनिश्चित किया गया है कि हुवावेई अमेरिकी चिप प्रौद्योगिकी हासिल नहीं कर पाये।

वाशिंगटनः चीन की प्रौद्योगिकी कंपनी हुवावेई पर ट्रंप प्रशासन ने सख्ती और बढ़ा दी है। प्रशासन ऐसे कदम उठा रहा है जिससे हुवावेई तक अमेरिकी प्रौद्योगिकी की पहुंच किसी भी तरीके से नहीं हो।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को फॉक्स न्यूज से कहा, ‘‘हम अमेरिका में उनके उपकरण नहीं चाहते क्योंकि वे हमारी जासूसी करते हैं...कोई भी देश जो इसका उपयोग करता है, हम खुफिया जानकारी साझा करने के संदर्भ में कुछ भी नहीं करेंगे।’’

वाणिज्य मंत्रालय ने सोमवार को नया नियम जारी किया जिसके जरिये यह सुनिश्चित किया गया है कि हुवावेई अमेरिकी चिप प्रौद्योगिकी हासिल नहीं कर पाये। अमेरिका ने पिछले साल गूगल म्यूजिक और अन्य स्मार्टफोन सर्विस समेत अमेरिकी उपकरणों और प्रौद्योागिकी की पहुंच को लेकर हुवावेई पर पाबंदी लगा दी थी। पुन: मई में व्हाइट हाउस ने दुनिया भर में काम कर रही उन इकाइयों पर भी जुर्माना कड़ा कर दिया, जो अमेरिकी प्रौद्योगिकी का उपयोग कर हुवावेई के लिये उपकरण बना रहे थे।

वाणिज्य वभाग ने सोमवार को कहा कि हुवावेई पर और पाबंदियां लगाने की जरूरत है क्योंकि चीनी कंपनी लगातार तीसरे पक्षों को आपूर्ति की जा रही प्रौद्योगिकी का उपयोग कर प्रतिबंध से बचने का प्रयास कर रही है। नये नियम के तहत हुवावेई पर अमेरिकी प्रौद्योगिकी का उपयोग कर बनाये गये और वाणिज्यिक रूप से उपलब्ध चिप तक पहुंच को रोकने की कोशिश की गयी है।

वाणिज्य मंत्री विलबर रॉस ने सोमवार को फॉक्स बिजनेस से कहा, ‘‘नये नियम में यह साफ किया गया है कि अमेरिकी साफ्टवेयर या उपकरणों के जरिये हुवावेई के माध्यम से उपकरणों के विनिर्माण पर पाबंदी है और उसके लिये लाइसेंस की जरूरत है।’’ अमेरिका ने सोमवार को हुवावेई की 21 देशों में 38 संबद्ध इकाइयों को अपनी निगरानी सूची में शामिल किया है।

अमेरिका इन कदमों के जरिये यह सुनिश्चित कर रहा है कि कंपनी किसी तरीके से उसके कानून के साथ खिलवाड़ नहीं करे। इन इकइयों पर संवेदनशील प्रौद्योगिकी प्राप्त करने को लेकर पाबंदी लगायी गयी है। साथ ही अमेरिका ने अपने देश में हुवावेई के कुछ ग्राहकों को उसके उपकरण और साफ्टवेयर के उपयोग को लेकर दी गयी छूट भी समाप्त कर दी है।

इस बीच, हुवावेई ने सोमवार को कुछ भी कहने से मना किया लेकिन उसने चीन सरकार की तरफ से जासूसी करने की बात फिर से खारिज की। चीनी अधिकारियों का कहना है कि अमेरिका, राष्ट्रीय सुरक्षा की आड़ में अमेरिकी प्रौद्योगिकी उद्योग के प्रतिस्पर्धी कंपनी को रोकने का प्रयास कर रहा है।

चीन ने कहा, हुवावेई पर पाबंदियां लगाकर अमेरिका वैश्विक व्यापार को नुकसान पहुंचा रहा

चीन ने अमेरिका पर वैश्विक व्यापार को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया है। अमेरिका की हुवावेई पर नई पाबंदी लगाये जाने के बाद उसने यह बात कही। चीन ने मंगलवार को यह भी कहा कि वह चीनी कंपनियों के संरक्षण के लिये जरूरी कदम उठाएगा। हालांकि उसने कोई जवाबी कार्रवाई का संकेत नहीं दिया। अमेरिका ने सोमवार को नये नियम जारी कर हुवावेई पर सख्ती बढ़ा दी। इसके तहत वाणिज्य विभाग उन आपूर्तिकर्ताओं के लिये अमेरिकी प्रौद्योगिकी के उपयोग पर प्रतिबंध लगाएगा जो उसका उपयोग कर हुवावेई के लिये प्रोसेसर चिप और अन्य उपकरण बनाते हैं।

हुवावेई चीन की पहली वैश्विक प्रौद्योगिकी प्रतिस्पर्धी कंपनी है। वह फोन कंपनियों के लिये उपकरणों की सबसे बड़ी आपूर्तिकर्ता और एक प्रमुख स्मार्टफोन बांड है। चीनी विदेश मंत्रालय ने ट्रंप प्रशासन से चीनी कंपनियों को परेशान करने और उसे दबाने का काम बंद करने को कहा। हुवावेई टेक्नोलॉजीज लि. अमेरिका और चीन के बीच प्रैद्योगिकी और सुरक्षा को लेकर विवाद का प्रमुख विषय बन गया है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि हुवावेई से देश की सुरक्षा को खतरा है।

अमेरिका, यूरोपीय तथा अन्य मित्र देशों से भी चीनी कंपनी की प्राद्योगिकी से बचने के लिये कह रहा है। हुवावेई ने नये नियम को लेकर कुछ भी कहने से मना किया लेकिन उसने चीन सरकार की तरफ से जासूसी करने की बात फिर से खारिज की है। चीनी अधिकारियों का कहना है कि अमेरिका, राष्ट्रीय सुरक्षा की आड़ में अमेरिकी प्रौद्योगिकी उद्योग के लिये प्रतिस्पर्धी कंपनी को रोकने का प्रयास कर रहा है।

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